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ट्रंप को बड़ा झटका, अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने टैरिफ रिफंड देने का दिया आदेश

 
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की आर्थिक नीतियों को लेकर एक बड़ा फैसला सामने आया है। अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत United States Court of International Trade ने उन कंपनियों को टैरिफ (आयात शुल्क) की रकम वापस करने का रास्ता साफ कर दिया है, जिन्हें पिछले साल ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए शुल्क का भुगतान करना पड़ा था।

दरअसल, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट Supreme Court of the United States पहले ही इन टैरिफ को गैरकानूनी करार दे चुका है। इसके बाद ट्रेड कोर्ट ने बुधवार को U.S. Customs and Border Protection को आदेश दिया कि IEEPA कानून के तहत वसूले गए शुल्क की रकम संबंधित कंपनियों को वापस की जाए।

कंपनियों को मिलेगा रिफंड का अधिकार

अदालत के फैसले के अनुसार, जिन कंपनियों ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) के तहत लगाए गए टैरिफ का भुगतान किया था, वे रिफंड पाने की हकदार होंगी। जज Richard Eaton ने अपने फैसले में कहा कि जिन आयातकों की एंट्री IEEPA ड्यूटी के तहत हुई थी, उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ मिलेगा।

यह फैसला टेनेसी की फिल्ट्रेशन कंपनी Atmus Filtration Technologies से जुड़े केस में आया है। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिफंड से जुड़े अन्य मामलों की सुनवाई भी वही करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ को बताया था गैरकानूनी

पिछले महीने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के इमरजेंसी टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया था। कोर्ट का कहना था कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को इस तरह के टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं देता।

ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल अप्रैल में “लिबरेशन डे टैरिफ” लागू किए थे। इन टैरिफ की दर 10 प्रतिशत से शुरू होकर 50 प्रतिशत तक थी और China, Mexico और Canada समेत कई देशों पर अलग-अलग शुल्क लगाए गए थे। इनसे अमेरिकी सरकार को करीब 130 अरब डॉलर की आय हुई थी।

हजारों कंपनियां कर सकती हैं दावा

फिलहाल रिफंड की प्रक्रिया पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस फैसले से ट्रंप प्रशासन के लिए नई चुनौती खड़ी हो गई है। कई कंपनियों ने पहले ही रिफंड के लिए मुकदमे दायर कर दिए हैं।

लॉजिस्टिक्स कंपनी FedEx सहित कई बड़ी कंपनियां पूरे टैरिफ रिफंड की मांग कर रही हैं। वहीं छोटे कारोबारियों के संगठन We Pay the Tariffs Coalition के प्रतिनिधि Dan Anthony ने इस फैसले को छोटे कारोबारियों की “बड़ी जीत” बताया है। उनका कहना है कि अमेरिकी छोटे व्यापार लंबे समय से रिफंड का इंतजार कर रहे थे और उन्हें जल्द तथा स्वचालित तरीके से भुगतान मिलना चाहिए।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि सभी दावों को मंजूरी मिलती है तो सरकार को करीब 175 अरब डॉलर तक की रकम वापस करनी पड़ सकती है।

क्या ट्रंप फिर लगाएंगे नए टैरिफ?

इसी बीच ट्रंप प्रशासन नए टैरिफ लगाने की तैयारी में भी जुटा हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी Scott Bessent ने संकेत दिया है कि वैश्विक टैरिफ को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत किया जा सकता है। यह नया शुल्क सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए IEEPA टैरिफ की जगह ले सकता है।

सरकार का कहना है कि 150 दिनों के अध्ययन के बाद Section 301 और Section 232 जैसे कानूनों के जरिए टैरिफ फिर से लागू किए जा सकते हैं।

भारत पर भी पड़ा था असर

ट्रंप प्रशासन के टैरिफ का असर India पर भी पड़ा था। पहले “लिबरेशन डे” के तहत भारत पर 25 प्रतिशत शुल्क लगाया गया और बाद में रूसी तेल खरीद को लेकर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैक्स लगाया गया, जिससे कुल शुल्क 50 प्रतिशत तक पहुंच गया।

हालांकि हाल ही में अमेरिका और भारत के बीच एक व्यापार ढांचा समझौता हुआ है, जिसके बाद टैरिफ घटाकर लगभग 18 प्रतिशत करने की बात सामने आई है।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद अमेरिका की आयात नीति को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यह फैसला ट्रंप की आर्थिक नीतियों और वैश्विक व्यापार व्यवस्था पर बड़ा प्रभाव डाल सकता है।