ईरान के टैंकर हमलों के पीछे क्या है रणनीति? तेल कीमतों से लेकर होर्मुज पर नियंत्रण तक कई अटकलें
New Delhi : ईरान द्वारा हाल ही में तीन तेल और गैस टैंकरों को निशाना बनाए जाने के बाद इस कार्रवाई के पीछे की मंशा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह हमला केवल सैन्य रणनीति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि इसका संबंध वैश्विक ऊर्जा बाजार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण से भी हो सकता है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
तीन टैंकरों को बनाया गया निशाना
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जिन जहाजों को निशाना बनाया उनमें कतर का एलएनजी टैंकर Al Rekayyat, सऊदी अरब का क्रूड ऑयल टैंकर Wedyan और लाइबेरिया के ध्वज वाला एक अन्य टैंकर शामिल है। ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका संप्रभु अधिकार है और केवल उसके द्वारा निर्धारित समुद्री मार्ग ही सुरक्षित माने जाएंगे।
तेल की कीमतों को लेकर उठे सवाल
हमलों के बाद एक नई चर्चा यह भी शुरू हुई है कि कहीं ईरान का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों को ऊंचा बनाए रखना तो नहीं है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में तेल महंगा रहता है तो ईरान को अपनी तेल बिक्री से आर्थिक लाभ मिल सकता है। हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई आधिकारिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
सऊदी अरब के फैसले से जोड़ा जा रहा मामला
विशेषज्ञों का एक वर्ग इस हमले को सऊदी अरब के हालिया फैसले से भी जोड़कर देख रहा है। दरअसल, सऊदी अरब ने करीब 26 वर्षों बाद अपने कच्चे तेल की कीमतों में बड़ी कटौती की थी। ऐसे में कुछ विश्लेषकों का अनुमान है कि सऊदी टैंकर को निशाना बनाए जाने के पीछे यह भी एक संभावित कारण हो सकता है। हालांकि, इसकी भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
सीजफायर और होर्मुज पर नियंत्रण की अटकलें
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कट्टरपंथी धड़े युद्धविराम को लंबे समय तक कायम नहीं रहने देना चाहते। उनके अनुसार, इन समूहों का लक्ष्य होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रभाव और नियंत्रण मजबूत करना हो सकता है।
हालांकि, इन सभी संभावनाओं को फिलहाल केवल विश्लेषकों के आकलन के रूप में देखा जा रहा है। हमलों के वास्तविक उद्देश्य को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक या स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।