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क्यों भारत-EU FTA को कहा गया ‘Mother of All Deals’? क्यों ये बदल देगा ग्लोबल ट्रेड

भारत और यूरोपीय संघ के बीच ऐतिहासिक FTA पर सहमति बनी। उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ बताया। पीएम मोदी बोले—यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा व्यापार समझौता है।

 

India EU FTA 2026: भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर सहमति बन गई है। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन ने इस समझौते को “मदर ऑफ ऑल डील्स” करार देते हुए इसे भारत-EU साझेदारी के लिए एक नया अध्याय बताया। गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि के रूप में भारत आईं उर्सुला ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ संयुक्त बयान में यह घोषणा की।

उर्सुला वॉन डेर लेयन ने कहा कि यह समझौता दोनों पक्षों के लिए विन-विन साझेदारी का उदाहरण है और इससे करीब 4 अरब यूरो के टैरिफ खत्म होंगे, जिससे कारोबार, निवेश और सप्लाई चेन को बड़ा फायदा मिलेगा। उन्होंने कहा कि EU अगले सात वर्षों में भारत से आयात होने वाले 99.5 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क घटाएगा या समाप्त करेगा।

इस FTA के तहत भारतीय समुद्री उत्पाद, चमड़ा, टेक्सटाइल, केमिकल, रबर, बेस मेटल्स, जेम्स और ज्वेलरी पर यूरोपीय बाजार में शून्य शुल्क लागू होगा। उर्सुला ने कहा कि यह समझौता भारतीय कौशल, सेवाओं और पैमाने को यूरोपीय तकनीक, पूंजी और नवाचार से जोड़ता है, जिससे वह आर्थिक विकास संभव होगा जो अकेले संभव नहीं था।

रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह करार ऐसे समय में हुआ है, जब वैश्विक व्यापार को हथियार बनाया जा रहा है और इससे रणनीतिक निर्भरता कम होगी। साथ ही, उन्होंने गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि बनने को अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया और भारत की वैश्विक उभरती भूमिका की सराहना की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस समझौते को भारत के इतिहास का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड एग्रीमेंट बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल व्यापार समझौता नहीं, बल्कि साझा समृद्धि का ब्लूप्रिंट है, जो निवेश, नवाचार और वैश्विक सप्लाई चेन को मजबूती देगा। पीएम मोदी ने कहा कि यह समझौता वैश्विक GDP के लगभग 25 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के करीब एक-तिहाई हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत-EU द्विपक्षीय व्यापार 2024-25 में 190 अरब डॉलर को पार कर चुका है। हालांकि, कानूनी जांच के बाद इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होने में अभी कम से कम छह महीने का समय लग सकता है। भारत-EU FTA वार्ता 2007 में शुरू हुई थी, 2013 में रुकी और 2022 में दोबारा शुरू की गई थी।