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ट्रंप-शी जिनपिंग के बीच ईरान, ताइवान और व्यापार पर बात, भारत के लिए क्यों अहम है यह बैठक?

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर हैं, जहां उनकी डोनाल्ड ट्रंप से अहम मुलाकात होगी। बातचीत में व्यापार, टैरिफ, ताइवान, तकनीक और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे शामिल हो सकते हैं। BRICS सम्मेलन में पीएम मोदी से मुलाकात के बाद शी का अमेरिका दौरा भारत के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

 

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस समय तीन दिवसीय अमेरिका दौरे पर हैं और गुरुवार को उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ अहम मुलाकात होनी है। इस बैठक पर सिर्फ अमेरिका-चीन संबंधों की वजह से ही नहीं, बल्कि भारत के साथ चीन के हालिया संपर्क और नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के बाद बने समीकरणों के कारण भी नजर है।

शी जिनपिंग करीब दो सप्ताह पहले ही भारत आए थे। 12 सितंबर को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात हुई थी। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों की तल्खी के बाद यह संपर्क दोनों देशों के रिश्तों में सावधानी से बढ़ती नजदीकी का संकेत माना गया। अब शी का वॉशिंगटन दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापार से लेकर तकनीक और ताइवान तक कई मुद्दे लंबित हैं।

ट्रंप-शी मुलाकात में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

अमेरिका और चीन के दोनों राष्ट्राध्यक्षों की बातचीत में व्यापार, टैरिफ, तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ताइवान और ईरान युद्ध जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। दोनों देश अपने रिश्तों में तनाव कम करने और आर्थिक संबंधों को स्थिर रखने की कोशिश कर रहे हैं।

व्यापार के मोर्चे पर दोनों देशों के बीच बनी अस्थायी समझ को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है। चीन के लिए अमेरिकी बाजार और निर्यात अहम हैं, जबकि अमेरिका चीन के साथ व्यापार असंतुलन और तकनीकी प्रतिस्पर्धा को लेकर दबाव बनाए हुए है।

भारत का जिक्र क्यों हो रहा है?

शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा ऐसे समय हो रहा है जब भारत और चीन के रिश्तों में भी कुछ सुधार के संकेत दिखे हैं। सितंबर में शी जिनपिंग ने नई दिल्ली में BRICS सम्मेलन में हिस्सा लिया और प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। यह सात साल बाद उनकी भारत यात्रा थी। दोनों देशों ने सीमा विवाद के बाद संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

यही वजह है कि ट्रंप-शी बातचीत को भारत के नजरिए से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमेरिका लंबे समय से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है। अगर अमेरिका और चीन के रिश्तों में कोई बड़ा बदलाव आता है, तो उसका असर भारत की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी पड़ सकता है।

BRICS के बाद बदला है चीन का कूटनीतिक संदेश

नई दिल्ली में हुए BRICS सम्मेलन में ईरान युद्ध, व्यापार और वैश्विक व्यवस्था जैसे मुद्दे प्रमुख रहे। हालांकि सदस्य देशों के बीच ईरान युद्ध को लेकर पूरी तरह एक जैसी स्थिति नहीं बनी। BRICS के संयुक्त रुख में मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई गई और संयम बरतने की अपील की गई।

चीन ने भी ईरान युद्ध को लेकर राजनीतिक समाधान और व्यापक युद्धविराम की जरूरत पर जोर दिया है। ऐसे में ट्रंप और शी के बीच बातचीत में ईरान का मुद्दा भी अहम हो सकता है।

ईरान पर चीन और अमेरिका आमने-सामने

ईरान को लेकर अमेरिका और चीन के हित कई मामलों में अलग हैं। अमेरिका ईरान पर दबाव और प्रतिबंधों की नीति अपना रहा है, जबकि चीन ने राजनीतिक समाधान का समर्थन किया है। चीन की ईरान के साथ आर्थिक और ऊर्जा संबंध भी हैं।

इसी वजह से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच ईरान पर बातचीत सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगी। इसका असर तेल बाजार, वैश्विक व्यापार और दोनों देशों की प्रतिबंध नीति पर भी पड़ सकता है।

ताइवान भी होगी बड़ी चुनौती

ट्रंप और शी के बीच बातचीत में ताइवान सबसे संवेदनशील मुद्दों में से एक रहेगा। चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका ताइवान की सुरक्षा को लेकर रणनीतिक भूमिका निभाता रहा है।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर, AI और दूसरी उन्नत तकनीकों को लेकर भी प्रतिस्पर्धा जारी है। ऐसे में किसी समझौते या तनाव कम करने की कोशिश का वैश्विक टेक्नोलॉजी सेक्टर पर भी असर पड़ सकता है।

भारत के लिए क्या मायने रखती है ट्रंप-शी बैठक?

भारत के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि अमेरिका और चीन के रिश्तों का अगला चरण कैसा होगा। पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका-चीन रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने भारत के लिए कई अवसर पैदा किए हैं। खासतौर पर वैश्विक कंपनियों की चीन से बाहर सप्लाई चेन बनाने की कोशिश से भारत को 'China+1' रणनीति में फायदा मिला है।

अगर वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव कम होता है, तो चीन से बाहर निवेश और सप्लाई चेन में विविधता लाने की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है। वहीं, अगर दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा जारी रहती है तो भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।

अभी क्यों अहम है शी जिनपिंग का अमेरिका दौरा?

शी जिनपिंग का यह तीन दिवसीय अमेरिका दौरा 23 से 25 सितंबर तक है। यह ऐसे समय हो रहा है जब अमेरिका और चीन दोनों अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित रखने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अपनी रणनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।