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सोशल मीडिया पर छाया ‘Bean Tok ट्रेंड’, क्या सच में दो कप बीन्स खाने से बेहतर होती है मूड और गट हेल्थ?

 

Bean Tok  Trend : सोशल मीडिया पर आए दिन कोई न कोई नया हेल्थ ट्रेंड वायरल होता रहता है। कुछ ट्रेंड दिलचस्प होते हैं, तो कुछ सुनने में ही अजीब लगते हैं। इन्हीं में से एक नया ट्रेंड है Bean Tok, जो टिक-टॉक से शुरू होकर अब पूरे इंटरनेट पर तेजी से फैल रहा है। इस ट्रेंड में दावा किया जा रहा है कि रोज दो कप बीन्स खाने से गट हेल्थ बेहतर होती है। कुछ लोग तो यह तक कह रहे हैं कि इससे नींद, मूड और तनाव पर भी सकारात्मक असर पड़ता है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या यह ट्रेंड वाकई उतना ही कारगर है, जितना इसे बताया जा रहा है? आइए जानते हैं कि आखिर यह Bean Tok ट्रेंड है क्या, और क्या इसके दावे वैज्ञानिक रूप से सही हैं।

क्या है Bean Tok ट्रेंड?

Bean Tok कोई कठिन या जटिल ट्रेंड नहीं है। इसमें बस इतना कहा जा रहा है कि रोज़ाना दो कप बीन्स खाने से—

  • गट माइक्रोबायोटा सुधरता है

  • पेट अधिक समय तक भरा रहता है

  • पाचन और कोलेस्ट्रॉल बेहतर होते हैं

यह बात इसलिए कही जा रही है क्योंकि बीन्स में भरपूर मात्रा में पौधों से मिलने वाला प्रोटीन, फाइबर, कॉम्प्लेक्स कार्ब्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। ये सभी तत्व पाचन तंत्र और संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं।

हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि हर व्यक्ति को दो कप बीन्स खाना जरूरी नहीं। आधा या एक कप बीन्स रोज लेने से भी पर्याप्त लाभ मिल सकता है। साथ ही, बीन्स ज्यादा मात्रा में लेने पर कई लोगों को गैस, ब्लोटिंग और अन्य पाचन समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार डाइट में विविधता जरूरी है, इसलिए बीन्स के साथ दही, अंडे, दालें, पनीर और टोफू जैसे अन्य प्रोटीन स्रोत भी शामिल करना चाहिए।

क्या बीन्स से सच में बेहतर होता है मूड और नींद?

कुछ सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि रोज़ दो कप बीन्स खाने से:

  • मूड बेहतर होता है

  • तनाव कम होता है

  • नींद सुधरती है

लेकिन एक्सपर्ट्स इन दावों को पूरी तरह से वैज्ञानिक रूप से साबित नहीं मानते।

हालांकि गट-ब्रेन कनेक्शन जरूर होता है यानी अगर गट हेल्थ बेहतर होगी तो मूड पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ सकता है, लेकिन यह दावा कि दो कप बीन्स प्रतिदिन खाने से ही मूड और नींद में सुधार होगा, केवल इंटरनेट आधारित है और इस पर अभी कोई ठोस वैज्ञानिक रिसर्च उपलब्ध नहीं है।

भारतीय डाइट में यह ट्रेंड नया क्यों नहीं है?

भारतीय भोजन में दालें, बीन्स और लेग्यूम्स हमेशा से ही बड़े पैमाने पर शामिल होते आए हैं, जैसे- राजमा-चावल, छोले, दालें, अंकुरित अनाज

डॉक्टर बताते हैं कि भारतीय खाने में दालों को भिगोकर, उबालकर और कई बार फर्मेंट करके खाने की परंपरा है, जिससे पाचन और गट हेल्थ बेहतर रहती है।

भारत में लोग पहले से ही भरपूर मात्रा में बीन्स, दालें और अंकुरित अनाज का सेवन करते हैं, इसलिए अचानक किसी ट्रेंड को देखकर दो कप बीन्स रोज खाने की जरूरत नहीं है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बीन्स फाइबर का अच्छा स्रोत हैं और इन्हें डाइट में शामिल करना फायदेमंद है, लेकिन मॉडरेशन बहुत जरूरी है।

एकदम से अधिक मात्रा लेने पर गैस और पेट फूलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।