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हरी हो या पीली, चमकदार किशमिश भी हो सकती है मिलावटी? जानें क्या रंग और गंध से पता चलता है पेस्टीसाइड

 

सुबह खाली पेट भीगी हुई किशमिश खाना हो, बच्चों को ड्राई फ्रूट्स देना हो या खीर और हलवे का स्वाद बढ़ाना हो, किशमिश का इस्तेमाल लगभग हर घर में होता है। इसे सेहत के लिए फायदेमंद भी माना जाता है। लेकिन हाल ही में किशमिश में पेस्टीसाइड यानी कीटनाशकों के अवशेष मिलने की खबर सामने आने के बाद इसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि किशमिश खरीदते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, क्या इसे पानी से धोने पर कीटनाशकों के अवशेष निकल जाते हैं और क्या घर पर ही इसकी पहचान की जा सकती है?

किशमिश में पेस्टीसाइड मिलने की खबर क्या है?

17 अक्टूबर 2026 को सामने आई एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने खाद्य उत्पादों में कथित गड़बड़ियों को लेकर तीन कंपनियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। इनमें प्रियागोल्ड बिस्किट बनाने वाली सूर्या फूड एंड एग्रो, डोडला डेयरी और UEIR ऑर्गेनिक फूड्स के नाम शामिल हैं।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि UEIR ऑर्गेनिक फूड्स की पीली किशमिश के नमूने की जांच में पेस्टीसाइड के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक पाए गए। इसके बाद कंपनी के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई।

इस खबर के बाद उपभोक्ताओं के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि बाजार से खरीदी जाने वाली किशमिश सुरक्षित है या नहीं और इसकी गुणवत्ता कैसे जांची जाए।

क्या घर पर किशमिश में पेस्टीसाइड की पहचान कर सकते हैं?

किशमिश खरीदते समय उसकी गंध, बनावट और साफ-सफाई पर ध्यान देना उपयोगी है। हालांकि, इन बातों से केवल उसकी बाहरी गुणवत्ता का अंदाजा लगाया जा सकता है। पेस्टीसाइड के अवशेष मौजूद हैं या नहीं, इसकी पुष्टि केवल देखकर या छूकर नहीं की जा सकती।

YouTube चैनल जीवन कोष (Jeevan Kosh) के एक वीडियो में किशमिश की गुणवत्ता परखने के कुछ घरेलू तरीके बताए गए हैं। लेकिन ध्यान रखें कि इन तरीकों को पेस्टीसाइड की वैज्ञानिक जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता।

1. रंग और चमक देखकर न करें फैसला

किशमिश हरी, भूरी, काली या पीली हो सकती है। उसका रंग अंगूर की किस्म और उसे सुखाने के तरीके पर निर्भर करता है। इसलिए सिर्फ ज्यादा चमकदार या पीले रंग की किशमिश को खराब मानना सही नहीं है। इसी तरह, सामान्य दिखने वाली किशमिश में भी कीटनाशकों के अवशेष हो सकते हैं।

2. गंध पर दें ध्यान

किशमिश खरीदते समय उसकी गंध पर ध्यान दें। अगर उसमें से असामान्य या बासी गंध आ रही है, तो उसे खरीदने से बचें। हालांकि, सामान्य गंध होने का मतलब यह नहीं है कि उसमें पेस्टीसाइड के अवशेष नहीं हैं।

3. ज्यादा नमी या चिपचिपाहट तो नहीं?

किशमिश का हल्का नरम होना सामान्य है, लेकिन अगर वह असामान्य रूप से गीली या चिपचिपी हो, तो उसकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। उस पर फफूंदी या किसी तरह की असामान्य परत दिखाई दे, तो उसे न खरीदें।

4. किशमिश तोड़कर देखें

किशमिश के दाने में फफूंदी, कीड़े या असामान्य सड़न दिखाई दे, तो उसे खाने से बचें। हालांकि, दाने को तोड़कर देखने से भी पेस्टीसाइड की मौजूदगी का पता नहीं लगाया जा सकता।

5. डंडी देखकर गुणवत्ता तय न करें

कुछ किशमिश के दानों पर अंगूर की छोटी डंडी लगी रह सकती है। डंडी छोटी या बड़ी होने से उसकी गुणवत्ता या पेस्टीसाइड की मात्रा का विश्वसनीय अनुमान नहीं लगाया जा सकता। इसलिए इस आधार पर किशमिश को अच्छा या खराब मानने से बचें।

क्या किशमिश को पानी से धोने पर निकल जाते हैं पेस्टीसाइड?

किशमिश खाने से पहले उसे साफ बहते पानी में धोना अच्छी आदत है। इससे उस पर लगी धूल-मिट्टी और कुछ सतही अवशेष कम हो सकते हैं। लेकिन पानी से धोने पर सभी प्रकार के कीटनाशक पूरी तरह निकल जाएं, इसकी गारंटी नहीं है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, कीटनाशकों का स्वास्थ्य पर असर उनकी प्रकृति, शरीर में पहुंची मात्रा और संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है। इसलिए किशमिश को धोना साफ-सफाई के लिहाज से जरूरी है, लेकिन इसे पेस्टीसाइड से पूरी तरह मुक्त करने का तरीका नहीं माना जा सकता। यदि किसी उत्पाद में कीटनाशकों के अवशेष निर्धारित सीमा से अधिक हैं, तो केवल धोने के भरोसे उसे सुरक्षित मानना उचित नहीं है।

पेस्टीसाइड के संपर्क में आने से क्या हो सकता है नुकसान?

कीटनाशकों के संभावित स्वास्थ्य प्रभाव इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन-सा रसायन मौजूद है और उसकी कितनी मात्रा शरीर में पहुंची है। निर्धारित सीमा से अधिक अवशेष मिलने का मतलब यह नहीं है कि उस उत्पाद को खाने वाले हर व्यक्ति को तुरंत बीमारी हो जाएगी, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।

1. पेट दर्द और उल्टी: कुछ कीटनाशकों के अधिक संपर्क में आने पर पेट दर्द, उल्टी, चक्कर या अन्य लक्षण हो सकते हैं।

2. दिमाग और नसों पर असर: कुछ प्रकार के कीटनाशक तंत्रिका तंत्र को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर रसायन और शरीर में पहुंची मात्रा पर निर्भर करता है।

3. लंबे समय में स्वास्थ्य संबंधी जोखिम: कुछ कीटनाशकों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, हर कीटनाशक के प्रभाव और जोखिम अलग-अलग होते हैं।

ध्यान रखें कि सिर्फ पेस्टीसाइड की खबर सामने आने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि बाजार में मिलने वाली सभी किशमिश नुकसानदायक हैं।

बाजार से किशमिश खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

किशमिश की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खरीदारी के समय कुछ सावधानियां बरतना जरूरी है।

- पैकिंग जांचें: पैकेट की सील टूटी हुई हो या उसमें नमी दिखाई दे, तो उसे न खरीदें।

- लेबल पढ़ें: निर्माता का नाम, बैच नंबर, पैकिंग और एक्सपायरी से जुड़ी जानकारी देखें।

- FSSAI लाइसेंस नंबर देखें: पैकेट पर दिए गए लाइसेंस नंबर और उत्पाद की जानकारी की जांच करें।

- साफ जगह से खरीदें: खुली किशमिश लेते समय देखें कि उसे साफ-सुथरी और सूखी जगह पर रखा गया है।

- ऑर्गेनिक के दावे को समझें: सिर्फ ऑर्गेनिक लिखा होने से यह गारंटी नहीं मिलती कि उत्पाद में कीटनाशकों के अवशेष बिल्कुल नहीं हैं।

- सही तरीके से स्टोर करें: किशमिश को साफ, सूखे और एयरटाइट डिब्बे में रखें। नमी, फफूंदी या असामान्य गंध दिखाई देने पर उसे न खाएं।

किशमिश की गुणवत्ता पर शक हो तो क्या करें?

अगर खरीदी गई किशमिश की गुणवत्ता संदिग्ध लगती है, तो उसे खाना बंद कर दें। पैकेट, बैच नंबर और खरीदारी की रसीद संभालकर रखें। जरूरत पड़ने पर FSSAI के Food Safety Connect पोर्टल या ऐप के माध्यम से शिकायत की जा सकती है।

अगर किशमिश खाने के बाद उल्टी, चक्कर या अन्य परेशानी हो, तो चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता प्राप्त करें।

निष्कर्ष: धोना जरूरी, लेकिन जांच का विकल्प नहीं

किशमिश पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थ है और इसे संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है। लेकिन खरीदते समय पैकिंग, साफ-सफाई और भंडारण पर ध्यान देना जरूरी है। खाने से पहले इसे साफ पानी से धोएं और फफूंदी या खराब होने के संकेत वाले दानों को न खाएं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किशमिश का रंग, गंध, स्वाद या बनावट देखकर उसमें पेस्टीसाइड की मौजूदगी की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसकी सही पहचान के लिए प्रयोगशाला में जांच जरूरी है। इसलिए किसी भी घरेलू तरीके को पेस्टीसाइड की जांच का पक्का उपाय न मानें।