H1N1 के बढ़ते मामलों के बीच जानें स्वाइन फ्लू के लक्षण, बच्चों में दिखते हैं ये Symptoms
Swine Flu Symptoms: दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। दिल्ली में इस साल अब तक 1,777 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। वहीं केरल और कर्नाटक में भी बड़ी संख्या में संक्रमण के मामले सामने आए हैं। ऐसे में लक्षणों को समय रहते पहचानना और गंभीर स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
दिल्ली में इस साल स्वाइन फ्लू के मामले पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक बताए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक राजधानी में H1N1 संक्रमण से मौत की पुष्टि नहीं हुई है। कर्नाटक में 22 अगस्त 2026 तक 32 जिलों में प्रयोगशाला जांच में 4,212 इन्फ्लूएंजा-पॉजिटिव मामले दर्ज किए गए हैं। केरल में भी अगस्त के दौरान स्वाइन फ्लू से 20 से अधिक मौतों की बात सामने आई है।
स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण क्या हैं?
प्रोफेसर डॉ. संजीव बगाई के मुताबिक, तेज बुखार के साथ ठंड लगना, खांसी और गले में दर्द H1N1 संक्रमण के प्रमुख लक्षणों में शामिल हो सकते हैं। अगर बुखार 48 घंटे के भीतर कम नहीं हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बच्चों में इन लक्षणों पर रहें खास सतर्क
बच्चों में वायरल संक्रमण के लक्षणों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत होती है। डॉ. संजीव बगाई के अनुसार, बच्चों में बुखार, खांसी, सांस लेने में परेशानी, सुस्ती या खाना-पीना कम करने जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
बच्चों में सांस से जुड़ी समस्या बढ़ने का खतरा होने के कारण ऐसे लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्थिति को देखते हुए डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
कौन से संकेत गंभीर माने जाएं?
मणिपाल अस्पताल की इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. स्वाति माहेश्वरी के मुताबिक, अगर दो-तीन दिन से ज्यादा समय तक बुखार बना रहता है और दवा लेने के बाद भी कम नहीं होता, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत हो सकता है। ऐसे में अस्पताल जाने में देरी नहीं करनी चाहिए। बच्चों में उल्टी-दस्त, लगातार कमजोरी या ठीक से खाना-पीना न कर पाने जैसी स्थिति सामने आए तो भी तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू से बचाव कैसे करें?
डॉ. संजीव बगाई के अनुसार, अगर किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी, गले में दर्द या तेज बुखार है, तो उसे घर से बाहर निकलने से बचना चाहिए। बच्चों में ऐसे लक्षण होने पर उन्हें स्कूल न भेजने और घर पर आराम कराने की सलाह दी गई है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क का इस्तेमाल करना, हाथों को साफ रखना और आंख, नाक व मुंह को बार-बार छूने से बचना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
इन स्थितियों में लापरवाही नहीं करनी चाहिए
- तेज बुखार दो-तीन दिन से ज्यादा बना रहे।
- दवा लेने के बावजूद बुखार कम न हो।
- खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी हो।
- बच्चे को सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक सुस्ती या कमजोरी हो।
- बच्चा ठीक से खाना-पीना न कर पा रहा हो।
- बच्चों में उल्टी-दस्त के साथ कमजोरी बढ़ रही हो।
जरूरी बात
H1N1 के लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे भी हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से बीमारी की पुष्टि या इलाज शुरू करने के बजाय जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है।