Hantavirus Outbreak: क्लाइमेट चेंज से बढ़ा हंतावायरस का खतरा, जानिए इसके लक्षण और बचाव के उपाय
Updated: May 16, 2026, 20:10 IST
दुनियाभर में बढ़ता Climate Change अब केवल मौसम तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसका असर इंसानों की सेहत पर भी साफ दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, बदलते मौसम और पर्यावरणीय असंतुलन के कारण कई संक्रामक बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक है Hantavirus, जिसके मामले अब दुनिया के कई देशों में बढ़ते नजर आ रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से चूहों और दूसरे कृंतक जीवों की संख्या और उनके रहने के स्थानों में बदलाव हो रहा है। यही जीव हंतावायरस के मुख्य वाहक माने जाते हैं। ऐसे में इंसानों के संपर्क में इनके आने का खतरा पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया है।
क्या है हंतावायरस?
हंतावायरस एक खतरनाक वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों और उनसे मिलती-जुलती प्रजातियों के जरिए फैलता है। यह वायरस संक्रमित जीवों के पेशाब, मल और लार के माध्यम से वातावरण में पहुंचता है। जब इंसान संक्रमित धूल या कणों को सांस के जरिए शरीर में लेते हैं, तब संक्रमण हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हंतावायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन एंडीज वायरस ऐसा स्ट्रेन माना जाता है, जो इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है।
क्लाइमेट चेंज से क्यों बढ़ रहा खतरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनियमित बारिश और मौसम में लगातार बदलाव हंतावायरस फैलाने वाले कृंतकों की संख्या को प्रभावित कर रहे हैं। भारी बारिश के बाद वनस्पतियां तेजी से बढ़ती हैं, जिससे चूहों को अधिक भोजन मिलता है और उनकी आबादी बढ़ने लगती है।
वहीं बाढ़ आने पर ये जीव अपने प्राकृतिक ठिकानों को छोड़कर इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं। दूसरी तरफ सूखे की स्थिति में भी भोजन और पानी की तलाश में ये मानव आबादी के करीब पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि मौसम में बदलाव के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
तापमान बढ़ने का भी असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान का असर चूहों के प्रजनन चक्र पर भी पड़ रहा है। पहले ठंड का मौसम उनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता था, लेकिन अब तापमान बढ़ने से ये जीव नए इलाकों में तेजी से फैल रहे हैं।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों और गंदगी से दूरी बनाए रखना, घर और आसपास साफ-सफाई रखना तथा बंद जगहों की सफाई करते समय मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी है। यदि तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से चूहों और दूसरे कृंतक जीवों की संख्या और उनके रहने के स्थानों में बदलाव हो रहा है। यही जीव हंतावायरस के मुख्य वाहक माने जाते हैं। ऐसे में इंसानों के संपर्क में इनके आने का खतरा पहले की तुलना में काफी ज्यादा बढ़ गया है।
क्या है हंतावायरस?
हंतावायरस एक खतरनाक वायरस है, जो मुख्य रूप से चूहों और उनसे मिलती-जुलती प्रजातियों के जरिए फैलता है। यह वायरस संक्रमित जीवों के पेशाब, मल और लार के माध्यम से वातावरण में पहुंचता है। जब इंसान संक्रमित धूल या कणों को सांस के जरिए शरीर में लेते हैं, तब संक्रमण हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हंतावायरस के कई प्रकार होते हैं, लेकिन एंडीज वायरस ऐसा स्ट्रेन माना जाता है, जो इंसानों से इंसानों में भी फैल सकता है। यह वायरस मुख्य रूप से दक्षिण अमेरिका में पाया जाता है।
क्लाइमेट चेंज से क्यों बढ़ रहा खतरा?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अनियमित बारिश और मौसम में लगातार बदलाव हंतावायरस फैलाने वाले कृंतकों की संख्या को प्रभावित कर रहे हैं। भारी बारिश के बाद वनस्पतियां तेजी से बढ़ती हैं, जिससे चूहों को अधिक भोजन मिलता है और उनकी आबादी बढ़ने लगती है।
वहीं बाढ़ आने पर ये जीव अपने प्राकृतिक ठिकानों को छोड़कर इंसानी बस्तियों की ओर आने लगते हैं। दूसरी तरफ सूखे की स्थिति में भी भोजन और पानी की तलाश में ये मानव आबादी के करीब पहुंच जाते हैं। यही कारण है कि मौसम में बदलाव के साथ संक्रमण का खतरा भी बढ़ रहा है।
तापमान बढ़ने का भी असर
विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान का असर चूहों के प्रजनन चक्र पर भी पड़ रहा है। पहले ठंड का मौसम उनकी संख्या को नियंत्रित करने में मदद करता था, लेकिन अब तापमान बढ़ने से ये जीव नए इलाकों में तेजी से फैल रहे हैं।
कैसे करें बचाव?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, चूहों और गंदगी से दूरी बनाए रखना, घर और आसपास साफ-सफाई रखना तथा बंद जगहों की सफाई करते समय मास्क का इस्तेमाल करना जरूरी है। यदि तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत या अचानक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।