क्या ज्यादा खुशी भी बन सकती है हार्ट अटैक की वजह? ऑक्सफोर्ड स्टडी के रिसर्च में सामने आई चौंकाने वाली बात
Happy Heart Syndrome: क्या आपने कभी सोचा है कि जरूरत से ज्यादा खुशी भी आपके दिल के लिए खतरा बन सकती है? अब तक यह माना जाता रहा है कि तनाव, दुख या गहरा सदमा दिल की बीमारी का कारण बन सकता है, लेकिन हाल ही में प्रकाशित एक मेडिकल रिसर्च ने इस धारणा को नया आयाम दिया है। अध्ययन के मुताबिक, अत्यधिक खुशी भी कुछ लोगों में हार्ट अटैक जैसे गंभीर लक्षण पैदा कर सकती है। चिकित्सक इस स्थिति को 'हैप्पी हार्ट सिंड्रोम' (Happy Heart Syndrome) या टाकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी (Takotsubo Cardiomyopathy) के नाम से जानते हैं।
ऑक्सफोर्ड की रिसर्च में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा
हाल ही में ऑक्सफोर्ड मेडिकल केस रिपोर्ट में प्रकाशित अध्ययन में बताया गया है कि जब कोई व्यक्ति अचानक बेहद खुश होता है या किसी बड़े भावनात्मक पल का अनुभव करता है, तो शरीर में स्ट्रेस हार्मोन—विशेष रूप से कैटेकोलामाइन का स्तर तेजी से बढ़ जाता है। इन हार्मोन का अचानक बढ़ना दिल की मांसपेशियों पर असर डालता है और कुछ समय के लिए उनकी कार्यक्षमता कमजोर हो सकती है। ऐसी स्थिति में मरीज को हार्ट अटैक जैसे लक्षण महसूस होने लगते हैं।
क्या है 'Happy Heart Syndrome'?
डॉक्टरों के अनुसार, जब किसी व्यक्ति को गहरे दुख, सदमे या किसी प्रियजन को खोने जैसी स्थिति के कारण यह समस्या होती है, तो उसे 'ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम' कहा जाता है। वहीं, यदि यही स्थिति शादी, जन्मदिन, किसी बड़ी सफलता, वर्षों बाद अपनों से मुलाकात या किसी बड़ी खुशखबरी जैसे अवसर पर पैदा हो, तो इसे 'हैप्पी हार्ट सिंड्रोम' कहा जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों स्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया लगभग समान होती है। फर्क केवल इतना है कि एक का कारण गहरा दुख होता है, जबकि दूसरे का कारण अत्यधिक खुशी होती है।
हार्ट अटैक जैसे ही दिखाई देते हैं इसके लक्षण
इस बीमारी के लक्षण सामान्य हार्ट अटैक से काफी मिलते-जुलते होते हैं। मरीज को अचानक सीने में तेज दर्द, सांस लेने में तकलीफ, बेचैनी, घबराहट और सीने में दबाव महसूस हो सकता है। यही वजह है कि डॉक्टर ऐसे लक्षणों को कभी नजरअंदाज न करने की सलाह देते हैं। बिना जांच के यह तय कर पाना मुश्किल होता है कि मरीज को हार्ट अटैक हुआ है या हैप्पी हार्ट सिंड्रोम।
क्या यह बीमारी जानलेवा हो सकती है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में समय पर इलाज मिलने पर मरीज पूरी तरह स्वस्थ हो जाते हैं। अध्ययन में शामिल मरीज भी उचित उपचार के बाद सामान्य जीवन में लौट आए। हालांकि, यदि समय पर चिकित्सा सहायता न मिले तो यह स्थिति गंभीर रूप ले सकती है और जान का खतरा भी पैदा हो सकता है। इसलिए किसी भी तरह के हार्ट अटैक जैसे लक्षणों को हल्के में नहीं लेना चाहिए।
ऐसे रखें अपने दिल का ख्याल
डॉक्टरों का कहना है कि यदि लगातार सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ या अचानक घबराहट महसूस हो तो तुरंत नजदीकी अस्पताल जाकर ईसीजी और जरूरी जांच करानी चाहिए। अत्यधिक खुशी या गहरे दुख के क्षणों में खुद को शांत रखने की कोशिश करें। नियमित योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और संतुलित जीवनशैली न केवल मानसिक तनाव को नियंत्रित करती है, बल्कि दिल को भी स्वस्थ रखने में मदद करती है। साथ ही समय-समय पर हार्ट हेल्थ की जांच कराते रहना भी जरूरी है।
भावनाओं के साथ सेहत का संतुलन भी है जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि खुशी जीवन का सबसे सुंदर एहसास है, लेकिन शरीर की अपनी सीमाएं होती हैं। अगर किसी बड़े जश्न या भावनात्मक क्षण के बाद सीने में दर्द, घबराहट या सांस लेने में परेशानी महसूस हो तो इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज न करें। समय पर चिकित्सकीय सलाह और इलाज गंभीर खतरे से बचा सकता है।