रील्स की लत बन रही खतरा, बच्चों से लेकर बड़े तक हो रहे प्रभावित
नई दिल्ली। आजकल सोशल मीडिया पर रील्स देखने की आदत तेजी से बढ़ रही है। खासकर बच्चों और युवाओं में यह लत आम होती जा रही है, लेकिन बड़े-बुजुर्ग भी इससे अछूते नहीं हैं। लोग खुद अपना स्क्रीन टाइम कम नहीं कर पा रहे और बच्चों के लिए गलत उदाहरण बन रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, रील्स स्क्रॉल करने के कई दुष्प्रभाव हैं, जिनमें याद्दाश्त कमजोर होना और ध्यान भटकना प्रमुख हैं।
स्क्रीन टाइम से ज्यादा महत्वपूर्ण है कंटेंट की क्वालिटी
स्क्रीन टाइम अकेले फोन एडिक्शन का फैसला नहीं करता। इंस्टाग्राम, यूट्यूब शॉर्ट्स जैसी प्लेटफॉर्म्स पर रैंडम रील्स स्क्रॉल करना ‘जंक फूड’ खाने जैसा है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी, न्यूयॉर्क की एक अध्ययन के अनुसार, इस तरह के कंटेंट की लगातार आदत याददाश्त (मेमोरी) और फोकस दोनों को नुकसान पहुंचाती है। इसलिए मात्र समय सीमा तय करने की बजाय इन एप्स से दूरी बनाना ज्यादा जरूरी है।
परिवार स्तर पर बनाएं मीडिया प्लान
प्रोफेसर जेसन नागाटा के अनुसार, माता-पिता का ज्यादा स्क्रीन टाइम सीधे बच्चों की फोन लत से जुड़ा होता है। इसे रोकने के लिए परिवार को एक ‘फैमिली मीडिया प्लान’ बनाना चाहिए। इसमें कुछ सख्त नियम तय किए जा सकते हैं, जैसे:
- खाने के समय और सोने से पहले फोन का इस्तेमाल न करना
- बेडरूम और डाइनिंग टेबल से फोन को दूर रखना
- पूरे परिवार के साथ स्क्रीन-फ्री समय बिताना
कब बन जाती है आदत लत में?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को के एसोसिएट प्रोफेसर जेसन नागाटा फोन लत की तुलना नशे की लत से करते हैं। अगर कोई व्यक्ति:
- ज्यादा समय सोशल मीडिया पर बिताने लगा है
- दोस्तों और परिवार से दूरी बनाने लगा है
- पढ़ाई, काम या रोजमर्रा की जिम्मेदारियों पर इसका असर पड़ रहा है
तो यह स्पष्ट संकेत है कि फोन की आदत अब लत में बदल रही है। ऐसे में तुरंत सतर्क होने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने की सलाह दी जाती है।
बचाव के उपाय
- फोन पर ऐप लिमिट सेट करें
- रील्स की बजाय उपयोगी कंटेंट पढ़ने या देखने की आदत डालें
- रोजाना व्यायाम और ऑफलाइन शौक अपनाएं
- परिवार के साथ ज्यादा समय बिताएं
विशेषज्ञ चेताते हैं कि डिजिटल लत को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह मानसिक स्वास्थ्य, नींद और रिश्तों दोनों को प्रभावित कर रही है। समय रहते आदतों में बदलाव लाना जरूरी है।