World Thyroid Day 2026: तेजी से बढ़ रही थायरॉइड की बीमारी, जानिए इसके कारण, लक्षण और बचाव के उपाय
नई दिल्ली। क्या आप अचानक वजन बढ़ने या घटने, दिल की धड़कन तेज रहने, घबराहट, ज्यादा पसीना आने या लगातार थकान जैसी समस्याओं से परेशान हैं? ये लक्षण थायरॉइड बीमारी का संकेत हो सकते हैं। दुनियाभर में थायरॉइड के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है और महिलाएं पुरुषों की तुलना में इससे ज्यादा प्रभावित हो रही हैं।
हर साल 25 मई को विश्व थायरॉइड दिवस मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना है।
क्या है थायरॉइड?
थायरॉइड गर्दन के सामने मौजूद तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि होती है, जो शरीर के लिए जरूरी हार्मोन्स बनाती है। ये हार्मोन्स शरीर के तापमान, मेटाबॉलिज्म, मूड, नींद, ऊर्जा स्तर और प्रजनन क्षमता को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तो कई स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
थायरॉइड के दो प्रमुख प्रकार
हाइपोथायरायडिज्म:
इस स्थिति में शरीर में थायरॉइड हार्मोन्स कम बनने लगते हैं। इसके कारण वजन बढ़ना, थकान, सुस्ती, बाल झड़ना और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हाइपरथायरॉइडिज्म:
इसमें शरीर जरूरत से ज्यादा हार्मोन्स बनाने लगता है, जिससे तेजी से वजन घटना, घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना, हाथ कांपना और ज्यादा पसीना आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
क्यों होती है थायरॉइड की बीमारी?
विशेषज्ञों के अनुसार लोग अक्सर इसके शुरुआती लक्षणों को सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन समय पर इलाज न होने पर यह बीमारी हृदय, मस्तिष्क, हड्डियों और प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकती है। बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास में भी थायरॉइड हार्मोन्स की अहम भूमिका होती है।
थायरॉइड के प्रमुख कारण
- ऑटोइम्यून डिसऑर्डर: थायरॉइड रोग का सबसे बड़ा कारण माना जाता है। इसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से थायरॉइड ग्रंथि पर हमला करने लगता है।
- आयोडीन की कमी: भोजन में आयोडीन की कमी थायरॉइड रोग का खतरा बढ़ा सकती है।
- हार्मोनल बदलाव: महिलाओं में गर्भावस्था, पीरियड्स और मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव जोखिम बढ़ा सकते हैं।
- आनुवंशिक कारण: परिवार में किसी सदस्य को थायरॉइड होने पर अन्य लोगों में भी इसका खतरा बढ़ सकता है।
- खराब खान-पान और लाइफस्टाइल: असंतुलित जीवनशैली भी इस बीमारी के जोखिम को बढ़ा सकती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि लंबे समय तक थकान, वजन में बदलाव, घबराहट या दिल की धड़कन से जुड़ी समस्याएं बनी रहें, तो डॉक्टर से जांच जरूर करानी चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से थायरॉइड को नियंत्रित किया जा सकता है।