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Heatwave Alert: कितनी गर्मी सह सकती है आपकी बॅाडी? जानिए शरीर कब पहुंचता है खतरे के दायरे में?

 
देश के कई राज्यों में भीषण गर्मी और लू का असर लगातार बढ़ रहा है। India Meteorological Department (IMD) ने उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, हरियाणा और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में हीटवेव अलर्ट जारी किया है। कई शहरों में तापमान 40°C से ऊपर पहुंच चुका है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है, आखिर इंसान का शरीर कितनी गर्मी सह सकता है?

क्या होता है ‘वेट बल्ब तापमान’?

इंसानी शरीर केवल तापमान से प्रभावित नहीं होता, बल्कि गर्मी और नमी (Humidity) के मिश्रण से भी प्रभावित होता है। इसे वेट बल्ब तापमान (Wet Bulb Temperature) कहा जाता है।

पहले वैज्ञानिक मानते थे कि इंसान अधिकतम 35°C वेट बल्ब तापमान तक जीवित रह सकता है, लेकिन Pennsylvania State University के नए शोध के अनुसार असली सीमा लगभग 30°C से 31°C के बीच है। इसके बाद शरीर खुद को प्रभावी तरीके से ठंडा नहीं रख पाता।

नमी क्यों बनाती है गर्मी को ज्यादा खतरनाक?

सूखी गर्मी में शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी सूख जाता है और शरीर को ठंडा करता है। लेकिन नमी ज्यादा होने पर पसीना आसानी से नहीं सूखता, जिससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ने लगता है।

यही वजह है कि उमस भरी 40°C गर्मी कई बार 45°C सूखी गर्मी से भी ज्यादा खतरनाक महसूस होती है।

कब बढ़ जाता है हीट स्ट्रोक का खतरा?

जब शरीर का तापमान 40°C के पार पहुंच जाता है, तब हीट स्ट्रोक का खतरा गंभीर हो जाता है। इस स्थिति में शरीर का प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम काम करना बंद कर देता है।

हीट स्ट्रोक के लक्षण:
तेज चक्कर आना
घबराहट या भ्रम
अत्यधिक कमजोरी
बेहोशी
तेज सिरदर्द
सांस लेने में दिक्कत

अगर समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

शरीर के किन अंगों पर पड़ता है असर?

अत्यधिक गर्मी शरीर के कई जरूरी अंगों को प्रभावित करती है:

दिमाग: सूजन, भ्रम और दौरे का खतरा
दिल: हार्ट पर अतिरिक्त दबाव
किडनी: डिहाइड्रेशन के कारण नुकसान
फेफड़े: सांस लेने में परेशानी
गर्मी से बचने के लिए क्या करें?
दोपहर 12 से 3 बजे तक धूप में निकलने से बचें
ज्यादा से ज्यादा पानी पिएं
हल्के और सूती कपड़े पहनें
ORS, नींबू पानी और छाछ का सेवन करें
बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी में रखें
धूप में निकलते समय सिर ढकें

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में तापमान और बढ़ सकता है, इसलिए सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है।