20 साल की सेवा को मिला सबसे बड़ा सम्मान! NDRF को मिला राष्ट्रपति ध्वज का गौरव
गाजियाबाद में आयोजित भव्य समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने NDRF को राष्ट्रपति ध्वज प्रदान किया। 20 वर्षों में 12 हजार से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन करने वाले बल को यह सर्वोच्च सम्मान मिला। समारोह में नए रिजनल रिस्पॉन्स सेंटर और बहादुर जवानों को भी सम्मानित किया गया।
NDRF President Flag: गाजियाबाद में आयोजित भव्य परेड समारोह में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) को प्रतिष्ठित “राष्ट्रपति ध्वज” प्रदान किया। यह सम्मान किसी भी सुरक्षा बल को मिलने वाला सर्वोच्च गौरव माना जाता है। समारोह में अमित शाह ने NDRF की आपदा प्रबंधन क्षमता, अनुशासन और मानवीय सेवा भावना की जमकर सराहना की।
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित 8वीं वाहिनी NDRF परिसर में आयोजित इस विशेष समारोह में बल के महानिदेशक पीयूष आनंद, गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख, SDRF अधिकारी और बड़ी संख्या में बचावकर्मी एवं उनके परिवारजन मौजूद रहे।
20 साल में बनाई देशभर में अलग पहचान
19 जनवरी 2006 को गठन के बाद से NDRF ने “आपदा सेवा सदैव सर्वत्र” के अपने ध्येय वाक्य को जमीन पर साबित किया है। महज दो दशकों में बल ने देशभर में आपदा राहत और बचाव कार्यों के जरिए करोड़ों लोगों का भरोसा जीता है। वर्तमान में NDRF की 16 बटालियनें देश के 69 अलग-अलग स्थानों पर तैनात हैं।
आपदा राहत अभियानों में अपनी तेज प्रतिक्रिया और आधुनिक तकनीकी क्षमता के कारण NDRF को “एंजेल्स इन ऑरेंज” के नाम से भी पहचान मिली है।
12 हजार से ज्यादा ऑपरेशन, लाखों लोगों की बचाई जान
समारोह के दौरान साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार NDRF अब तक लगभग 12 हजार बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन कर चुका है। इन अभियानों में 1.5 लाख से ज्यादा लोगों को जीवित बचाया गया, जबकि 9 लाख से अधिक लोगों को बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, शहरी आपदाओं और CBRN जैसी आपात स्थितियों से सुरक्षित निकाला गया।
बल ने सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। जापान (2011), नेपाल (2015), तुर्किए (2023), म्यांमार और श्रीलंका (2025) जैसे देशों में राहत अभियानों के जरिए NDRF ने भारत की वैश्विक आपदा राहत शक्ति को मजबूत पहचान दिलाई।
अमित शाह बोले- राष्ट्रपति ध्वज सर्वोच्च सम्मान
परेड का निरीक्षण करने के बाद अमित शाह ने NDRF को राष्ट्रपति ध्वज सौंपा और बल के अधिकारियों एवं जवानों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ध्वज किसी भी बल के लिए सर्वोच्च सम्मान होता है, जो उसकी उत्कृष्ट सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है।
गृह मंत्री ने कहा कि NDRF ने अपनी तेज कार्रवाई, पेशेवर दक्षता और मानवीय सोच के दम पर खुद को विश्वस्तरीय आपदा प्रतिक्रिया बल के रूप में स्थापित किया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “आपदा जोखिम न्यूनीकरण के दस सूत्रीय एजेंडा” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की मानवीय सहायता और राहत क्षमता लगातार मजबूत हो रही है।
शहीद बचावकर्मियों को श्रद्धांजलि
अमित शाह ने ड्यूटी के दौरान सर्वोच्च बलिदान देने वाले NDRF के 17 बहादुर बचावकर्मियों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। समारोह के दौरान कई वीर जवानों और अधिकारियों को विशिष्ट एवं सराहनीय सेवा पदक से सम्मानित किया गया।
इसके अलावा तीन बचावकर्मियों को “उत्तम जीवन रक्षा पदक” प्रदान किया गया। खेल, फिटनेस और नवाचार से जुड़ी विभिन्न प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मियों को भी ट्रॉफियां दी गईं।
नए रिजनल रिस्पॉन्स सेंटर का उद्घाटन
कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने देहरादून स्थित NDRF क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्र का वर्चुअल उद्घाटन किया। साथ ही अगरतला, अर्नाकुलम, नूरपुर, लखनऊ, गंगटोक और गांधीनगर में छह नए क्षेत्रीय प्रतिक्रिया केंद्रों की आधारशिला भी रखी गई।
सरकार का मानना है कि इन नए केंद्रों से आपदा के समय राहत और बचाव कार्यों की गति और क्षमता दोनों में बड़ा सुधार होगा।
2025 में रिकॉर्ड ऑपरेशन
NDRF महानिदेशक पीयूष आनंद ने अपने संबोधन में कहा कि यह पल बल के इतिहास में बेहद गौरवपूर्ण है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में NDRF ने 1400 से अधिक रेस्क्यू ऑपरेशन किए, जो अब तक किसी एक वर्ष में सबसे ज्यादा हैं।
उन्होंने कहा कि बल लगातार अपनी तकनीकी क्षमता, प्रशिक्षण व्यवस्था और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रमों को मजबूत कर रहा है। SDRF और अन्य एजेंसियों को प्रशिक्षित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
रोप रेस्क्यू प्रदर्शन ने जीता दिल
समारोह के दौरान ITBP ब्रास एवं पाइप बैंड की प्रस्तुति और NDRF जवानों के रोप रेस्क्यू डेमो ने सभी का ध्यान आकर्षित किया। आधुनिक तकनीक और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।