{"vars":{"id": "130921:5012"}}

UP में आधार कार्ड जन्म प्रमाण के तौर पर अमान्य, आधार से बने जन्म प्रमाण पत्र भी होंगे रद्द

 

लखनऊ I उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र सरकारों ने आधार कार्ड को जन्म तिथि के प्रमाण पत्र के रूप में मान्यता देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। दोनों राज्यों में अब किसी भी सरकारी कामकाज, नौकरी, स्कॉलरशिप या अन्य योजना के लिए आधार कार्ड को जन्म तिथि के वैध दस्तावेज के तौर पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश में सख्त आदेश
  
यूपी सरकार के नियोजन विभाग ने सभी विभागों के अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों को स्पष्ट शासनादेश जारी कर दिया है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के 31 अक्टूबर 2025 के पत्र के आलोक में आधार कार्ड को जन्म तिथि का प्रमाण मानना पूरी तरह बंद किया जाए। विभाग के विशेष सचिव अमित सिंह द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि UIDAI ने साफ कर दिया है कि आधार कार्ड जन्म तिथि का प्रामाणिक दस्तावेज नहीं है। इसके बावजूद कई विभाग अभी भी इसे स्वीकार कर रहे थे, जिसे अब तत्काल प्रभाव से रोका जा रहा है।

महाराष्ट्र में हजारों जन्म प्रमाण पत्र रद्द
  
महाराष्ट्र में स्थिति और भी गंभीर है। राज्य के राजस्व विभाग ने आदेश जारी किया है कि जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) अधिनियम-2023 लागू होने के बाद केवल आधार कार्ड के आधार पर जारी किए गए सभी विलंबित जन्म प्रमाण पत्र तुरंत रद्द किए जाएंगे। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कहा कि आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाए जा रहे थे। इनके जरिए उम्र में हेरफेर कर सरकारी नौकरियों और योजनाओं का लाभ लिया जा रहा था। इसलिए सभी संदिग्ध प्रमाण पत्रों को रद्द करने के निर्देश दे दिए गए हैं। अब विलंबित जन्म प्रमाण पत्र के लिए आधार कार्ड को सहायक दस्तावेज के रूप में भी स्वीकार नहीं किया जाएगा।

फर्जीवाड़े पर लगाम लगाने का मकसद  

दोनों राज्य सरकारों का कहना है कि यह कदम फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्रों के जरिए हो रहे अवैध लाभ और उम्र संबंधी धांधली को रोकने के लिए उठाया गया है। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए जाने की संभावना है।