आशुतोष और सौरव को लेकर भावुक हुए अभिजीत दीपके, बोले- अच्छी नौकरी और आरामदायक जिंदगी छोड़कर...
New Delhi : कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका और सौरव दास को लेकर सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया है। इसमें उन्होंने दोनों के पेशेवर जीवन और सामाजिक मुद्दों से जुड़ने के फैसले का जिक्र किया। दीपके ने कहा कि आशुतोष और सौरव के पास अच्छी नौकरी, आर्थिक सुरक्षा और आरामदायक जिंदगी थी, लेकिन उन्होंने दूसरों के अधिकारों के लिए संघर्ष करने का रास्ता चुना।
लंदन में लाखों की नौकरी करते थे आशुतोष रांका—दीपके
अभिजीत दीपके ने अपनी पोस्ट में बताया कि कुछ साल पहले आशुतोष रांका लंदन में एक अच्छी तनख्वाह वाली कॉर्पोरेट नौकरी कर रहे थे। वहीं, सौरव दास देश की कानूनी व्यवस्था से जुड़े विषयों पर लिखते थे और अपने पेशेवर जीवन में स्थापित थे।
दीपके के मुताबिक, दोनों आर्थिक रूप से सुरक्षित थे और उनके सामने अपने करियर को आगे बढ़ाने के अवसर मौजूद थे। इसके बावजूद उन्होंने सामाजिक और लोकतांत्रिक मुद्दों से जुड़ने का फैसला किया।
'उनके पास सड़कों पर उतरने की कोई मजबूरी नहीं थी'
सीजेपी संस्थापक ने लिखा कि आशुतोष और सौरव ने देश को बेहतर बनाने की उम्मीद में अपनी आरामदायक जिंदगी छोड़ दी। उन्होंने कहा कि दोनों के सामने अनिश्चितताओं और कानूनी मुश्किलों का सामना करने की कोई व्यक्तिगत मजबूरी नहीं थी, फिर भी उन्होंने सार्वजनिक मुद्दों पर आवाज उठाने का रास्ता चुना।
दीपके ने अपने पोस्ट में दोनों के जेल जाने का भी उल्लेख किया और उनके इस फैसले को व्यक्तिगत त्याग से जोड़कर देखा।
'उन लोगों के लिए खड़े हुए, जिन्हें जानते तक नहीं थे'
अभिजीत दीपके ने कहा कि आशुतोष और सौरव के प्रति उनके सम्मान की सबसे बड़ी वजह यह है कि उन्होंने अपेक्षाकृत संपन्न पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन लोगों के मुद्दे उठाने का फैसला किया, जिनके पास समान अवसर और संसाधन नहीं हैं।
उन्होंने लिखा कि दोनों चाहते तो अपनी निजी जिंदगी और करियर पर ध्यान केंद्रित कर सकते थे, लेकिन उन्होंने ऐसे लोगों के संघर्षों में भागीदारी चुनी, जिनसे उनका कोई व्यक्तिगत संबंध भी नहीं था।
'दूसरों के लिए खड़ा होना इंसान का सबसे बड़ा गुण'
पोस्ट के अंत में अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी नजर में किसी व्यक्ति का सबसे बड़ा गुण उन लोगों के लिए खड़ा होना है, जिन्हें वह व्यक्तिगत रूप से नहीं जानता। उन्होंने कहा कि आशुतोष और सौरव ने ऐसे मुद्दों के लिए संघर्ष करने का फैसला किया, जिनका उनके निजी जीवन से सीधा संबंध नहीं था।
दीपके की यह पोस्ट दोनों के प्रति उनके सम्मान और व्यक्तिगत भावनाओं को व्यक्त करती है। हालांकि, उनके करियर, आर्थिक स्थिति और अन्य व्यक्तिगत विवरण दीपके के बयान पर आधारित हैं।
19 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, आशुतोष रांका और सौरव दास की न्यायिक हिरासत जारी रहने के बीच दीपके ने उन्हें जल्द लौटने की अपील करते हुए भावुक संदेश लिखा। दोनों को 13 अक्टूबर के जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था।