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IAS पद से इस्तीफा देने के बाद दिव्या मित्तल की राजनीति में एंट्री, 9 मिनट के वीडियो जारी कर किया बड़ा ऐलान

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आईएएस पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने आखिरकार अपनी आगे की राह साफ कर दी है। करीब 9 मिनट के वीडियो संदेश के जरिए दिव्या मित्तल ने ऐलान किया कि वह राजनीति में कदम रखने जा रही हैं। पिछले कुछ दिनों से उनके इस्तीफे के बाद लगातार कयास लगाए जा रहे थे कि वह सक्रिय राजनीति का हिस्सा बन सकती हैं। अब वीडियो जारी कर उन्होंने इन अटकलों पर खुद विराम लगा दिया है।

अपने वीडियो की शुरुआत में दिव्या मित्तल ने कहा कि कुछ दिन पहले उन्होंने IAS की नौकरी से इस्तीफा दिया था और इसके बाद लोगों के मन में कई सवाल थे कि आखिर आगे क्या करेंगी, किसके साथ जाएंगी और कहां से राजनीति शुरू करेंगी। उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब देने में उन्हें कुछ समय लगा, क्योंकि वह खुद को इस नए कदम के लिए तैयार कर रही थीं।

दिव्या मित्तल ने साफ शब्दों में कहा कि वह राजनीति में आएंगी, लेकिन किसी राजनीतिक दल के साथ नहीं, बल्कि लोगों के साथ। उन्होंने कहा कि उनका मकसद उन लोगों की आवाज बनना है, जिनकी आवाज सरकारी दफ्तरों तक नहीं पहुंच पाती या पहुंचने के बाद भी सुनी नहीं जाती।

‘मुझे उन स्कूलों का हिसाब चाहिए’

दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक अनुभव का जिक्र करते हुए लहुरियादह की एक घटना सुनाई। उन्होंने बताया कि इलाके में पानी पहुंचाने के लिए निरीक्षण के दौरान एक महिला उनके पास आई। उन्हें लगा कि महिला शायद पेंशन या मकान जैसी किसी सरकारी सुविधा की मांग करेगी, लेकिन महिला ने गांव में पांचवीं कक्षा के बाद पढ़ाई की सुविधा नहीं होने की बात कही।

महिला ने उनसे आगे की पढ़ाई के लिए गांव में स्कूल बनवाने की मांग की। दिव्या मित्तल ने बताया कि उन्होंने नियमों की जांच कर स्कूल को मंजूरी दिलाई, लेकिन तीन साल बीतने के बाद भी स्कूल का निर्माण शुरू नहीं हो सका।

उन्होंने सवाल उठाया कि जब पैसा था, नियम थे और स्वीकृति भी थी तो काम क्यों नहीं हुआ? उनके मुताबिक कमी सिर्फ इच्छाशक्ति की थी। इसी अनुभव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह ऐसे स्कूलों का हिसाब मांगना चाहती हैं।

‘न्याय लोगों का अधिकार है, कृपा नहीं’

दिव्या मित्तल ने एक भूमिहीन व्यक्ति की कहानी भी साझा की, जो सरकारी जमीन पर पट्टे के बावजूद कब्जा नहीं मिलने की शिकायत लेकर उनके पास आया था। उन्होंने बताया कि जांच में संबंधित अधिकारी की रिपोर्ट गलत पाई गई और उसे वापस कराया गया, लेकिन इसके बाद भी व्यक्ति को जमीन पर कब्जा नहीं मिल सका।

दिव्या मित्तल ने सवाल उठाया कि जब सरकारी व्यवस्था किसी व्यक्ति को उसका अधिकार देती है तो उसे उस अधिकार के लिए बार-बार अधिकारियों के चक्कर क्यों लगाने पड़ते हैं। उन्होंने कहा कि किसी को उसका हक देना कृपा नहीं, बल्कि न्याय है।

सड़क, गड्ढों और हादसों का भी उठाया मुद्दा

पूर्व IAS अधिकारी ने गांवों की सड़क, पुल और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी हजारों गांव ऐसे हैं जहां सड़क नहीं है, नदियों पर पुल नहीं हैं और बारिश के मौसम में गांवों का संपर्क तक टूट जाता है।

उन्होंने कहा कि अधिकारियों को सड़कों के गड्ढों, फाइलों और हादसों के आंकड़ों की जानकारी होती है, लेकिन जरूरत है तो सिर्फ चिंता और इच्छाशक्ति की। दिव्या मित्तल ने कहा कि जब किसी समस्या की जानकारी होने के बावजूद उसे दूर नहीं किया जाता तो हादसा सिर्फ हादसा नहीं रह जाता।

पेपर लीक से लेकर AI तक, युवाओं के भविष्य पर चिंता

दिव्या मित्तल ने युवाओं और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि उन्होंने एक सामान्य परिवार से निकलकर पढ़ाई की और इस देश ने उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया। लेकिन आज उन बच्चों के भविष्य को लेकर सवाल हैं जो वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं और फिर पेपर लीक जैसी घटनाओं से उनका इंतजार लंबा हो जाता है।

उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते प्रभाव का भी जिक्र किया। उनका कहना था कि आने वाले समय में AI कई तरह के कामों को प्रभावित करेगा और युवाओं के सामने रोजगार को लेकर नई चुनौतियां होंगी। उन्होंने कहा कि दो बेटियों की मां होने के नाते उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की भी चिंता है।

दिव्या मित्तल ने कहा कि राजनीति में सत्ता और शोर तो है, लेकिन भविष्य को लेकर गंभीर सोच और चर्चा की जरूरत है।

‘सिर्फ राजनेता नहीं, राजनीति बदलनी होगी’

दिव्या मित्तल ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल किसी एक राजनेता को बदलना नहीं, बल्कि राजनीति के तरीके में बदलाव लाना है। उन्होंने ऐसी राजनीति की बात कही जिसमें इरादा, न्याय, चिंता और भविष्य को लेकर सोच हो।

उन्होंने कहा कि वह किसी झंडे के नीचे खड़े होकर राजनीति नहीं करना चाहतीं। उनका कहना था कि अगर लोगों की समस्याओं का हिसाब मांगना है तो उन्हें किसी राजनीतिक दल का हिस्सा बनने के बजाय सीधे जनता के साथ खड़ा होना होगा।

‘डरूंगी नहीं, सवाल पूछती रहूंगी’

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में यह भी कहा कि राजनीति में आने के फैसले के बाद उन्हें लेकर सोशल मीडिया पर कुछ दावे किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि एक राजनीतिक दल के प्रदेश प्रवक्ता ने उनके बारे में ऐसी मुलाकात का दावा किया जो उनके मुताबिक हुई ही नहीं थी।

दिव्या मित्तल ने कहा कि उन्हें डराने या दबाने की कोशिशों से वह पीछे नहीं हटेंगी। उन्होंने कहा कि वह सवाल पूछती रहेंगी, ताकि आम लोगों और खासकर लड़कियों को अपनी बात रखने में डर न लगे।

‘न पैसा है, न बाहुबल, लेकिन जनता की ताकत है’

दिव्या मित्तल ने माना कि उनके पास चुनावी राजनीति में इस्तेमाल होने वाला पैसा, बाहुबल या जातीय समीकरण नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि वह इसी तरीके की राजनीति से अलग रास्ता अपनाना चाहती हैं।

उन्होंने सवाल उठाया कि चुनावों में खर्च होने वाला पैसा आखिर कहां से आता है और कहा कि वह उस पैसे को चुनाव में बहाने के बजाय सड़क, स्कूल और पुल जैसी जरूरी सुविधाओं में देखना चाहती हैं।

उन्होंने जाति और धर्म के आधार पर राजनीति करने से भी दूरी बनाने की बात कही। दिव्या मित्तल ने कहा कि अधिकारी रहते हुए उन्होंने किसी व्यक्ति के साथ न्याय करने से पहले उसका नाम, जाति या पहचान नहीं देखी और राजनीति में भी वह इसी सोच के साथ आगे बढ़ेंगी।

उत्तर प्रदेश से शुरू होगी राजनीतिक पारी

दिव्या मित्तल ने अपने वीडियो में स्पष्ट किया कि उनकी राजनीतिक यात्रा उत्तर प्रदेश से शुरू होगी। उन्होंने कहा कि वह अधिकारी बनकर उत्तर प्रदेश आई थीं, लेकिन यहां के लोगों ने उन्हें अपनी बेटी की तरह अपनाया।

उन्होंने उत्तर प्रदेश की मिट्टी को अपनी कर्मभूमि बताते हुए कहा कि इसी प्रदेश से वह अपनी राजनीतिक शुरुआत करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्हें भरोसा है कि आम लोग सही मुद्दों और सही सोच के साथ खड़े हो सकते हैं।

कुछ दिन पहले IAS से त्यागपत्र दिया था और आपके मन में कई सवाल छोड़ दिए थे। अपनी बात इस वीडियो में कह दी है। अगर आपको लगे कि ये आपकी भी बात है, तो 9198956957 पर whatsapp मैसेज करिए। pic.twitter.com/mtS6gzBzRw

— Divya Mittal (@divyamittal_IAS) September 29, 2026


 

अपने संदेश के अंत में दिव्या मित्तल ने कहा कि राजनीति में उनका मंच कैसे बनेगा, कैसे चलेगा और उसकी दिशा क्या होगी, यह वह लोगों के साथ मिलकर तय करेंगी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य ऐसी राजनीति की शुरुआत करना है जिसमें जनता सिर्फ वोट या संख्या नहीं, बल्कि मंजिल हो।