विवादों के बीच मदनी अड़े: मेरे बयान में कुछ गलत नहीं, पीछे नहीं हटूंगा
New Delhi : जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने सुप्रीम कोर्ट और वंदे मातरम पर दिए विवादित बयानों का बचाव किया। उन्होंने जिहाद को अत्याचार के खिलाफ लड़ाई बताया और कहा कि किसी पर वंदे मातरम का दबाव नहीं बनाया जा सकता। अपनी कम्युनिटी की चिंता जताने को उन्होंने उचित ठहराया।
New Delhi : सुप्रीम कोर्ट पर टिप्पणी को लेकर विवादों में घिरे जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने एक बार फिर अपने बयान का बचाव किया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्होंने न तो कुछ गलत कहा है और न ही उनके बयान में ऐसा कोई शब्द है जिसे वापस लिया जाए।
जिहाद पर दिया स्पष्टीकरण
मौलाना मदनी ने मंगलवार को कहा कि जो फसाद करते हैं, जो बम धमाके करते हैं,हम पिछले 30 साल से उनके खिलाफ धर्म युद्ध कर रहे हैं। लोग यह नहीं देख रहे कि वे फसादी हैं और हम जिहादी हैं। हमारा जिहाद अत्याचार के खिलाफ बोलना है और हम आगे भी ऐसा करते रहेंगे। उन्होंने दोहराया कि उनके बयान में कोई अनुचित बात नहीं है और वे आगे भी इसी तरह अपनी बात रखते रहेंगे।
वंदे मातरम पर फिर दोहराया अपना रुख
राष्ट्रगीत वंदे मातरम को लेकर भी मौलाना मदनी ने अपना रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मैंने कहा था कि किसी पर भी वंदे मातरम बोलने का दबाव नहीं बनाया जा सकता। हमारा अपना अकीदा है। हम एक ईश्वरवादी हैं। आप हर चीज़ के आगे हमारा सिर झुकाना चाहते हैं,क्यों? हमें मुसलमान ही रहने दीजिए।
सुप्रीम कोर्ट पर फिर से टिप्पणी
मदनी ने सुप्रीम कोर्ट को लेकर अपने बयान का भी बचाव करते हुए कहा कि मैं एक ऐसी संस्था से आता हूं जो एक खास कम्युनिटी की नुमाइंदगी करती है। अगर मैं अपनी कम्युनिटी की चिंता व्यक्त नहीं करूंगा तो कौन करेगा? मैंने वही चिंता बताई है। उन्होंने जोड़ा कि लोग उनके बयान से असहमति जता सकते हैं या उसे गलत कह सकते हैं, लेकिन इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
मौलाना मदनी के इन ताज़ा बयानों ने चल रही राजनीतिक और सामाजिक बहस को और तेज कर दिया है।