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SIR विवाद के बीच राहुल गांधी का मोदी सरकार पर हमला, बोले- ‘एंटी-इनकम्बेंसी किसी को नहीं छोड़ती’, किया ये बड़ा दावा

 

नई दिल्ली। चुनाव आयोग के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी पर निशाना साधा। राहुल गांधी ने एंटी-इनकम्बेंसी का जिक्र करते हुए कहा कि भारत की राजनीति में सत्ता के खिलाफ माहौल तेजी से बनता है और लंबे समय तक कोई भी सरकार इससे अछूती नहीं रहती।

राहुल गांधी ने कहा कि वह राजनीतिक परिवार से आते हैं और करीब 50 साल से देश की राजनीति को करीब से देखते रहे हैं। अपनी बात को समझाने के लिए उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उदाहरण दिया। राहुल के मुताबिक, बांग्लादेश युद्ध में जीत के बाद इंदिरा गांधी की लोकप्रियता काफी ऊंचाई पर थी, लेकिन इसके एक-दो साल के भीतर ही उनके सामने बड़े स्तर पर एंटी-इनकम्बेंसी और राजनीतिक दबाव देखने को मिला।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और क्षेत्रीय दलों के कई नेताओं को भी समय-समय पर इसका सामना करना पड़ा है, लेकिन उनके अनुसार नरेंद्र मोदी और अमित शाह के मामले में यह स्थिति अलग दिखाई देती है।


SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल

राहुल गांधी की टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब SIR को लेकर चुनाव आयोग के भीतर भी सवाल उठने की खबर सामने आई है। द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग की कुछ कार्रवाइयों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज कीं। रिपोर्ट में मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने, Form 6 में बदलाव और वोटर डेटाबेस के केंद्रीकरण समेत कई मुद्दों का उल्लेख किया गया है।

हालांकि, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि ये टिप्पणियां ‘सुझाव’ थीं और पिछले एक साल के दौरान आयोग के सभी फैसले सर्वसम्मति से लिए गए।


‘वोट की सुरक्षा सबसे अहम’

राहुल गांधी ने वोट को लोकतांत्रिक व्यवस्था की बुनियाद बताते हुए कहा कि चुनाव में वोट की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि वोट के अधिकार से जुड़े किसी भी हस्तक्षेप का असर सिर्फ चुनाव पर नहीं, बल्कि संविधान, कानून और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पूरी व्यवस्था पर पड़ता है।

राहुल गांधी ने SIR के संदर्भ में ‘वोट चोरी’ का आरोप भी लगाया और कहा कि लोकतंत्र में वोट की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वोट से संविधान को ताकत मिलती है, संविधान से कानून बनते हैं और इन्हीं कानूनों के आधार पर संस्थाएं काम करती हैं।


दो चुनाव आयुक्तों की तारीफ

राहुल गांधी ने चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी द्वारा दर्ज की गई आपत्तियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने अपनी बात रिकॉर्ड पर रखकर समझदारी भरा कदम उठाया है।

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से भी अपनी स्थिति पर गंभीरता से विचार करने की बात कही और उन्हें ‘सरकारी गवाह’ बनने की सलाह दी। यह राहुल गांधी का राजनीतिक बयान और उनकी राय है।


‘आने वाले महीनों में दिखेगा चुनावों का सच’

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लंबे समय तक सत्ता में रहने से जुड़े दावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कोई भी नेता यह निश्चित रूप से नहीं कह सकता कि आने वाले कई वर्षों तक उसकी सरकार बनी रहेगी। उनके मुताबिक, भारतीय राजनीति में एंटी-इनकम्बेंसी एक बड़ी ताकत रही है।

राहुल गांधी ने आगे दावा किया कि अगले तीन से चार महीनों में 2024 और उससे पहले हुए चुनावों तथा विधानसभा चुनावों को लेकर कथित तौर पर ‘सच’ सामने आएगा। उन्होंने चुनाव, वोट, संविधान और संस्थाओं के बीच संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर यह कड़ी कमजोर होती है तो चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

हालांकि, राहुल गांधी के इन दावों और आरोपों को राजनीतिक बयान के रूप में देखा जाना चाहिए। SIR और चुनावों को लेकर उठे विभिन्न सवालों पर चुनाव आयोग तथा अन्य संवैधानिक संस्थाओं की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक स्पष्टीकरण भी महत्वपूर्ण होंगे।