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बंगाल में शुभेंदु सरकार आते ही कोलकाता पुलिस ने ममता-अभिषेक बनर्जी को किया अनफॅालो, मोदी-शाह बने नई पसंद

 

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब प्रशासनिक और डिजिटल दोनों स्तरों पर बदलाव साफ दिखाई देने लगे हैं। शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद कोलकाता पुलिस के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

अब तक तृणमूल कांग्रेस सरकार के करीबी माने जाने वाले कोलकाता पुलिस मुख्यालय ‘लाल बाजार’ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी को अनफॉलो कर दिया है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत भाजपा के कई बड़े नेताओं को फॉलो करना शुरू कर दिया गया है।

सत्ता बदलते ही बदला डिजिटल रुख

राजनीतिक गलियारों में इस बदलाव को नई सरकार के प्रभाव के तौर पर देखा जा रहा है। जैसे ही बंगाल में भाजपा सरकार का गठन हुआ, कोलकाता पुलिस ने अपने डिजिटल व्यवहार में भी बदलाव दिखाना शुरू कर दिया।

कोलकाता पुलिस के आधिकारिक हैंडल की नई फॉलोइंग लिस्ट में अब केंद्र सरकार के शीर्ष नेताओं के नाम शामिल हैं। इसे प्रशासनिक बदलाव और सत्ता परिवर्तन के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

KP के इस कदम के बाद सोशल मीडिया पर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कई लोग इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बता रहे हैं, जबकि कुछ इसे राजनीतिक संकेत मान रहे हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पुलिस और प्रशासनिक संस्थाएं आमतौर पर सत्ता में मौजूद सरकार के प्रोटोकॉल के अनुसार अपने आधिकारिक व्यवहार में बदलाव करती हैं। चूंकि अब राज्य में भाजपा की सरकार है, इसलिए केंद्र और भाजपा नेतृत्व को फॉलो करना प्रशासनिक दृष्टि से असामान्य नहीं माना जा रहा।

‘नबान्न’ से राइटर्स बिल्डिंग तक बदलाव की तैयारी

डिजिटल बदलाव के साथ-साथ प्रशासनिक ढांचे में भी बड़े परिवर्तन की तैयारी चल रही है। नई सरकार पहले ही यह संकेत दे चुकी है कि राज्य सचिवालय को ‘नबान्न’ से वापस ऐतिहासिक राइटर्स बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा।

ऐसे में कोलकाता पुलिस का सोशल मीडिया व्यवहार भी इस बड़े प्रशासनिक बदलाव का हिस्सा माना जा रहा है। माना जा रहा है कि नई सरकार केंद्र के साथ बेहतर तालमेल और नई कार्यशैली पर जोर देना चाहती है।

पुलिस पर पहले भी लगते रहे हैं आरोप

पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा और राजनीतिक संघर्षों के दौरान कोलकाता पुलिस और राज्य पुलिस पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। विपक्ष लंबे समय से पुलिस प्रशासन पर सत्ता के दबाव में काम करने का आरोप लगाता रहा है।

अब शुभेंदु अधिकारी सरकार के गठन के बाद यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बदलाव केवल डिजिटल स्तर तक सीमित रहेगा या फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली में भी पारदर्शिता और निष्पक्षता के नए संकेत देखने को मिलेंगे।