राम मंदिर चढ़ावा चोरी केस: 500 के नोट से शुरू हुआ खेल, जेब में छिपाए नोट- SIT जांच में सामने आई करोड़ों के गबन की पूरी कहानी
Ayodhya Ram Mandir Donation Scam: राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे की कथित चोरी से जुड़े मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआती जांच के अनुसार दान गिनने वाले कुछ कर्मचारियों ने पहले ₹500 के एक-दो नोट छिपाकर बाहर ले जाने से शुरुआत की, लेकिन समय के साथ यही सिलसिला करोड़ों रुपये के कथित गबन में बदल गया। जांच एजेंसियों का अनुमान है कि चढ़ावे से करीब 2 से 3 करोड़ रुपये की रकम का दुरुपयोग किया गया।
₹500 के नोट से शुरू हुई चोरी, फिर बढ़ता गया हौसला
SIT की जांच में सामने आया कि दान गिनने वाले छह कर्मचारियों ने नौकरी शुरू करने के दो-तीन महीने बाद ही छोटी रकम निकालनी शुरू कर दी थी। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि शुरुआत में वे कपड़ों में एक-दो ₹500 के नोट छिपाकर बाहर ले जाते थे। जब यह तरीका लंबे समय तक पकड़ में नहीं आया तो उनका हौसला बढ़ता गया और बाद में नकदी की गड्डियां तक बाहर ले जाई जाने लगीं।
जांच में आरोपियों ने स्वीकार किया कि समय के साथ उन्होंने मिलकर लगभग 2 से 3 करोड़ रुपये की रकम चढ़ावे से निकाल ली।
CCTV निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में मिली बड़ी चूक
SIT की रिपोर्ट के अनुसार चोरी केवल कर्मचारियों की हरकतों का नतीजा नहीं थी, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था के पालन में भी गंभीर लापरवाही सामने आई।
जांच में पाया गया कि दान गिनने वाले कक्ष में लगे CCTV कैमरों की नियमित निगरानी नहीं हो रही थी। कई बार कंट्रोल रूम खाली रहने के कारण कर्मचारियों को बिना रोक-टोक नकदी बाहर ले जाने का मौका मिला।
नियम बने थे, लेकिन पालन नहीं हुआ
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के बीच दान संग्रह, गिनती और बैंक में जमा करने के लिए विस्तृत SOP और व्यवस्था पहले से लागू थी।
इन नियमों के तहत- दान पेटियां ट्रस्ट और SBI प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोली जानी थीं। हर पेटी की रकम अलग-अलग गिनी जानी थी। बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य थी। कर्मचारियों के लिए यूनिफॉर्म जरूरी थी। निजी सामान अंदर ले जाने पर रोक थी। प्रवेश और निकास दोनों जगह तलाशी अनिवार्य थी। CCTV निगरानी और दैनिक रिपोर्टिंग का प्रावधान था।
SIT के अनुसार इन नियमों का कई जगह पालन नहीं किया गया। खासकर कर्मचारियों की नियमित और आकस्मिक तलाशी नहीं होने से चोरी का सिलसिला लंबे समय तक चलता रहा।
भर्ती प्रक्रिया भी जांच के दायरे में
प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय और रामाशंकर मिश्रा के नाम सामने आए हैं। ये सभी SBI की आउटसोर्स एजेंसी सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज (SSS) के माध्यम से दान गिनने के कार्य में लगे थे।
SIT का दावा है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति ट्रस्ट से जुड़े लोगों की सिफारिश पर हुई थी। जांच में मनीष कुमार यादव की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनके चाचा रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की सिफारिश पर उन्हें अप्रैल 2026 में दान गिनने के कार्य में लगाया गया था।
CCTV फुटेज में चोरी के संकेत
जांच एजेंसियों के अनुसार मई 2026 से मिले CCTV फुटेज में आरोपी मनीष कुमार यादव को कई बार दान की रकम निकालते हुए देखा गया है। यही फुटेज जांच का अहम आधार बना है।
नकदी, जेवर और संपत्तियों की खरीद की जांच
SIT ने आरोपियों की संपत्तियों की भी जांच शुरू कर दी है। जांच के मुताबिक सात आरोपियों ने कथित तौर पर चोरी की रकम से अयोध्या और अन्य स्थानों पर संपत्तियां खरीदीं।
जून की शुरुआत में आरोपियों से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करीब 79 लाख रुपये नकद और जेवर बरामद किए गए। बरामद आभूषणों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है। जिन वस्तुओं का वैध रिकॉर्ड मिलेगा, उन्हें परिवार को लौटाया जा सकता है, जबकि बिना प्रमाण वाले सामान को केस का हिस्सा बनाया जाएगा।
पूर्व ट्रस्ट सदस्य की भूमिका भी जांच के घेरे में
सूत्रों के अनुसार SIT की रिपोर्ट के आधार पर पूर्व ट्रस्ट सदस्य अनिल मिश्रा की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। जांच एजेंसियां आरोप लगा रही हैं कि कथित अनियमितताओं की जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में उनके खिलाफ साजिश में शामिल होने की धाराएं जोड़े जाने की तैयारी की जा रही है।