खराब खाना बना जानलेवा! WHO की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा, हर साल 86 करोड़ लोग बीमार और 15 लाख मौतें
Jun 7, 2026, 15:13 IST
खराब और दूषित भोजन केवल पेट खराब होने की वजह नहीं बनता, बल्कि यह गंभीर बीमारियों और मौत का कारण भी बन सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की ओर से जारी नए वैश्विक अनुमान बताते हैं कि हर साल दुनिया भर में करीब 86 करोड़ लोग असुरक्षित भोजन खाने की वजह से बीमार पड़ जाते हैं, जबकि 15 लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।
रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इस आयु वर्ग के बच्चों में दूषित भोजन से बीमार होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक पाया गया है।
छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
WHO के अनुसार, दुनिया की कुल आबादी में छोटे बच्चों की हिस्सेदारी महज 9 प्रतिशत है, लेकिन खाद्य जनित बीमारियों के करीब एक-तिहाई मामलों का बोझ इन्हीं पर पड़ता है। विशेष रूप से डायरिया जैसी बीमारियां बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन में मौजूद मिथाइल मरकरी, लेड और अन्य जहरीले तत्व बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जीवनभर न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
हर साल 86 करोड़ लोग पड़ते हैं बीमार
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में दूषित भोजन के कारण लगभग 86.6 करोड़ लोग बीमार हुए। हालांकि स्वच्छ पानी, बेहतर साफ-सफाई, सुरक्षित खाद्य उत्पादन, पाश्चराइज्ड खाद्य पदार्थों के उपयोग और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के जरिए इन मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
हालांकि वर्ष 2000 के बाद से खाद्य जनित बीमारियों का कुल बोझ कुछ कम हुआ है, लेकिन अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में यह समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।
बैक्टीरिया ही नहीं, केमिकल भी बन रहे मौत की वजह
WHO के अध्ययन में पाया गया कि भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी संक्रमण अधिकांश बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन मौतों के मामलों में रासायनिक प्रदूषण कहीं ज्यादा घातक साबित हो रहा है।
साल 2021 में दूषित भोजन से हुई कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत मौतें केमिकल खतरों की वजह से हुईं। इनमें सबसे बड़ा योगदान इनऑर्गेनिक आर्सेनिक और लेड का रहा, जो हृदय रोग, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा भारी असर
दूषित भोजन का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। WHO के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2021 में खाद्य जनित बीमारियों की वजह से उत्पादकता में करीब 310 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए यह आंकड़ा बढ़कर 647 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है।
कैंसर और दिमागी कमजोरी का बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट में पहली बार यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि भोजन में मौजूद भारी धातुएं (Heavy Metals) लंबे समय में कैंसर, हृदय रोग और मानसिक विकास संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इनऑर्गेनिक आर्सेनिक और लेड हर साल 10 लाख से अधिक मौतों से जुड़े हैं।
मिथाइल मरकरी बच्चों के मस्तिष्क के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।
दूषित भोजन से न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारों से सख्त कदम उठाने की अपील
WHO ने सरकारों से अपील की है कि वे खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दें और बेहतर खेती, सख्त औद्योगिक नियंत्रण तथा मजबूत पर्यावरणीय नियमों के जरिए खाद्य प्रदूषण को स्रोत स्तर पर ही रोकें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल भोजन का मुद्दा नहीं, बल्कि हर परिवार और हर दिन से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा विषय है। उनका कहना है कि नए आंकड़े सरकारों को यह समझने में मदद करेंगे कि समस्या सबसे अधिक कहां है और लोगों की सुरक्षा के लिए किन क्षेत्रों में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में खाद्य जनित बीमारियों के लगभग तीन-चौथाई मामले और करीब 60 प्रतिशत मौतें अफ्रीका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दर्ज की जाती हैं। कम आय वाले और विकासशील देशों में रहने वाले लोग इस खतरे का सबसे ज्यादा सामना कर रहे हैं।
WHO का मानना है कि सुरक्षित भोजन केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए खाद्य सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बनाने की जरूरत है।
रिपोर्ट के अनुसार, पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ता है। इस आयु वर्ग के बच्चों में दूषित भोजन से बीमार होने का खतरा अन्य लोगों की तुलना में लगभग तीन गुना अधिक पाया गया है।
छोटे बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा
WHO के अनुसार, दुनिया की कुल आबादी में छोटे बच्चों की हिस्सेदारी महज 9 प्रतिशत है, लेकिन खाद्य जनित बीमारियों के करीब एक-तिहाई मामलों का बोझ इन्हीं पर पड़ता है। विशेष रूप से डायरिया जैसी बीमारियां बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन में मौजूद मिथाइल मरकरी, लेड और अन्य जहरीले तत्व बच्चों के मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे जीवनभर न्यूरोलॉजिकल और विकास संबंधी समस्याएं बनी रह सकती हैं।
हर साल 86 करोड़ लोग पड़ते हैं बीमार
रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2021 में दूषित भोजन के कारण लगभग 86.6 करोड़ लोग बीमार हुए। हालांकि स्वच्छ पानी, बेहतर साफ-सफाई, सुरक्षित खाद्य उत्पादन, पाश्चराइज्ड खाद्य पदार्थों के उपयोग और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच के जरिए इन मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
हालांकि वर्ष 2000 के बाद से खाद्य जनित बीमारियों का कुल बोझ कुछ कम हुआ है, लेकिन अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया जैसे क्षेत्रों में यह समस्या अब भी गंभीर बनी हुई है।
बैक्टीरिया ही नहीं, केमिकल भी बन रहे मौत की वजह
WHO के अध्ययन में पाया गया कि भोजन में मौजूद बैक्टीरिया, वायरस और परजीवी संक्रमण अधिकांश बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं। लेकिन मौतों के मामलों में रासायनिक प्रदूषण कहीं ज्यादा घातक साबित हो रहा है।
साल 2021 में दूषित भोजन से हुई कुल मौतों में लगभग 73 प्रतिशत मौतें केमिकल खतरों की वजह से हुईं। इनमें सबसे बड़ा योगदान इनऑर्गेनिक आर्सेनिक और लेड का रहा, जो हृदय रोग, कैंसर और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाते हैं।
अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा भारी असर
दूषित भोजन का असर केवल स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। WHO के अनुमान के अनुसार, वर्ष 2021 में खाद्य जनित बीमारियों की वजह से उत्पादकता में करीब 310 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। जीवनयापन की लागत को ध्यान में रखते हुए यह आंकड़ा बढ़कर 647 अरब डॉलर तक पहुंच जाता है।
कैंसर और दिमागी कमजोरी का बढ़ रहा खतरा
रिपोर्ट में पहली बार यह स्पष्ट रूप से सामने आया है कि भोजन में मौजूद भारी धातुएं (Heavy Metals) लंबे समय में कैंसर, हृदय रोग और मानसिक विकास संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इनऑर्गेनिक आर्सेनिक और लेड हर साल 10 लाख से अधिक मौतों से जुड़े हैं।
मिथाइल मरकरी बच्चों के मस्तिष्क के विकास को नुकसान पहुंचा सकता है।
दूषित भोजन से न्यूरोलॉजिकल और डेवलपमेंटल डिसऑर्डर का खतरा बढ़ जाता है।
सरकारों से सख्त कदम उठाने की अपील
WHO ने सरकारों से अपील की है कि वे खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता दें और बेहतर खेती, सख्त औद्योगिक नियंत्रण तथा मजबूत पर्यावरणीय नियमों के जरिए खाद्य प्रदूषण को स्रोत स्तर पर ही रोकें।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने कहा कि खाद्य सुरक्षा केवल भोजन का मुद्दा नहीं, बल्कि हर परिवार और हर दिन से जुड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य का बड़ा विषय है। उनका कहना है कि नए आंकड़े सरकारों को यह समझने में मदद करेंगे कि समस्या सबसे अधिक कहां है और लोगों की सुरक्षा के लिए किन क्षेत्रों में तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।
अफ्रीका और दक्षिण-पूर्व एशिया सबसे ज्यादा प्रभावित
रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में खाद्य जनित बीमारियों के लगभग तीन-चौथाई मामले और करीब 60 प्रतिशत मौतें अफ्रीका तथा दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में दर्ज की जाती हैं। कम आय वाले और विकासशील देशों में रहने वाले लोग इस खतरे का सबसे ज्यादा सामना कर रहे हैं।
WHO का मानना है कि सुरक्षित भोजन केवल स्वास्थ्य का नहीं बल्कि आर्थिक विकास और सामाजिक सुरक्षा का भी महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए खाद्य सुरक्षा को वैश्विक प्राथमिकता बनाने की जरूरत है।