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कर्तव्य पथ पर गरजे भैरव कमांडो, 77वें गणतंत्र दिवस पर दिखी हाइब्रिड वॉर ताकत

 

New Delhi : 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर आयोजित परेड के दौरान भारतीय सेना की नवगठित भैरव लाइट कमांडो बटालियन ने अपने साहस, शौर्य और अत्याधुनिक युद्ध कौशल का भव्य प्रदर्शन कर पूरी दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। यह विशेष बटालियन पारंपरिक युद्ध क्षमता के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और उन्नत उपकरणों के जरिए युद्ध संचालन में पूरी तरह सक्षम है।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन को विशेष रूप से हाइब्रिड वॉरफेयर के लिए तैयार किया गया है। इस युद्ध प्रणाली में पारंपरिक लड़ाई के साथ ड्रोन निगरानी, इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान (Electronic Warfare) और छोटी-छोटी टीमों के सटीक एक्शन का समन्वय शामिल होता है। सेना के अनुसार, यह इकाई आधुनिक युद्ध की बदलती चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए गठित की गई है।

यह बटालियन भारतीय सेना में पारंपरिक पैदल सैनिकों और पैरा स्पेशल फोर्सेज (SF) के बीच की एक विशेष इकाई मानी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में छिपे दुश्मनों के सुरक्षा घेरे, ड्रोन निगरानी और एआई-आधारित सेंसरों को चकमा देते हुए उनके ठिकानों तक पहुंचकर रणनीतिक ऑपरेशनों को अंजाम देना है।

चेहरे पर काला या लाल रंग क्यों लगाते हैं कमांडो?

इस सवाल पर रक्षा विशेषज्ञ ब्रिगेडियर अरुण सहगल ने बताया कि भैरव लाइट कमांडो बटालियन के फेस रिचुअल्स उनके रणनीतिक अभियानों का अहम हिस्सा हैं। ऑपरेशन के दौरान जवान अपने चेहरे पर काले या लाल रंग का ऑयल पेंट लगाते हैं, ताकि वे प्राकृतिक वातावरण में खुद को बेहतर तरीके से कैमोफ्लाज कर सकें।

उन्होंने बताया कि मौजूदा दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सेंसर चेहरे ढके होने के बावजूद पहचान करने में सक्षम हैं। ऐसे में चेहरे पर काले या लाल रंग की परत चढ़ाने से AI-सेंसर को पहचान करने में कठिनाई होती है। इसके साथ ही यह तकनीक दुश्मन के ठिकानों पर तैनात स्नाइपर्स को भ्रमित करने में भी मददगार साबित होती है।

भैरव लाइट कमांडो बटालियन का यह प्रदर्शन न सिर्फ भारतीय सेना की बढ़ती तकनीकी और रणनीतिक क्षमता को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि भारत भविष्य के युद्धों के लिए पूरी तरह तैयार है।