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भरत तिवारी एनकाउंटर केस में बड़ा एक्शन: पुलिसकर्मियों पर दर्ज हुई FIR, 5 पहले ही हो चुके हैं सस्पेंड

 

 पटना। भोजपुर के चर्चित भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बड़ा प्रशासनिक और कानूनी कदम उठाया गया है। भरत तिवारी की मां आशा देवी की शिकायत के आधार पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। इस मामले की पुष्टि भोजपुर के पुलिस अधीक्षक राज ने मंगलवार को की।

जानकारी के अनुसार, भरत तिवारी की मौत के बाद उनकी मां आशा देवी ने पुलिस अधीक्षक को एक आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। आवेदन के आधार पर शाहपुर थाने में जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष और अन्य सहयोगी पुलिसकर्मियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पांच पुलिसकर्मी पहले ही हो चुके हैं निलंबित

इस मामले में अब तक पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित किया जा चुका है। इनमें तत्कालीन शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मालाकार, पुलिस अवर निरीक्षक अंकित आर्यन, पुलिस अवर निरीक्षक हर्षचंद्र कुमार, सहायक अवर निरीक्षक रामाशंकर यादव और महिला सिपाही मीरा कुमारी शामिल हैं।

मां ने लगाए गंभीर आरोप

अपने आवेदन में आशा देवी ने आरोप लगाया है कि उनका बेटा भरत भूषण तिवारी बाढ़ प्रभावित और विस्थापित परिवारों की समस्याओं को लेकर लगातार प्रशासन के खिलाफ आवाज उठा रहा था।

उन्होंने बताया कि घटना वाले दिन कई पुलिस अधिकारी और जवान उनके घर पहुंचे और भरत तिवारी को अपने साथ चलने के लिए कहा। आरोप है कि फेसबुक लाइव के दौरान भरत तिवारी ने अपने पास मौजूद हथियार फेंक दिया था और पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था।

आशा देवी का दावा है कि इसके बावजूद पुलिसकर्मियों ने उनके बेटे को पकड़कर जमीन पर गिराया और उस पर कई गोलियां चलाईं। आवेदन में उन्होंने आरोप लगाया है कि भरत तिवारी को पांच गोलियां मारी गईं और यह कार्रवाई जगदीशपुर के पुलिस उपाधीक्षक के आदेश पर की गई।

परिजनों को देर से दी गई जानकारी

आशा देवी ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई और कई घंटों तक परिवार को सही जानकारी नहीं दी गई। बाद में शाम को परिजनों को भरत तिवारी की मौत की सूचना दी गई।

अब शिकायत के आधार पर संबंधित पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आने की उम्मीद जताई जा रही है।

फिलहाल यह मामला बिहार की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है। सभी की निगाहें अब जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हैं।