Budget 2026 से पहले मिडिल क्लास को बड़ी उम्मीद – 80C लिमिट होगी डबल?
New Delhi : जैसे-जैसे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट 2026 नजदीक आ रहा है, मिडिल क्लास टैक्सपेयर्स में उम्मीदों और बेचैनी का माहौल बढ़ता जा रहा है। इन उम्मीदों में सबसे प्रमुख है इनकम टैक्स एक्ट की सेक्शन 80C के तहत मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाने की मांग। वर्तमान में यह सीमा 1.5 लाख रुपये प्रति वित्तीय वर्ष है, जिसे कई रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बजट में बढ़ाकर 3 लाख रुपये तक किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो पुरानी टैक्स व्यवस्था (ओल्ड टैक्स रिजीम) चुनने वाले लाखों मिडिल क्लास परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।
सेक्शन 80C क्या है और यह क्यों इतना महत्वपूर्ण है?
सेक्शन 80C पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनने वाले टैक्सपेयर्स को विभिन्न बचत योजनाओं में निवेश कर टैक्स बचाने की सुविधा देती है। इसमें शामिल प्रमुख निवेश विकल्प हैं:
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS)
- जीवन बीमा प्रीमियम
- नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)
- 5 साल की फिक्स्ड डिपॉजिट
- सुकन्या समृद्धि योजना
- होम लोन का मूलधन चुकाना
- बच्चों की ट्यूशन फीस
फिलहाल इस सेक्शन के तहत अधिकतम 1.5 लाख रुपये की कटौती हर वित्तीय वर्ष में मिलती है। यह सीमा आखिरी बार बजट 2014 में बढ़ाई गई थी। यानी पिछले 12 साल से यह 1.5 लाख पर अटकी हुई है। इस दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य, बीमा और रिटायरमेंट प्लानिंग से जुड़े खर्चों में 2-3 गुना बढ़ोतरी हो चुकी है, लेकिन टैक्स छूट की सीमा नहीं बढ़ी।
सीमा बढ़ाने की मांग क्यों जोर पकड़ रही है?
- महंगाई का दबाव: पिछले 10 सालों में शिक्षा, मेडिकल और जीवन बीमा के खर्च में 150-200% तक वृद्धि हुई है।
- रिटायरमेंट प्लानिंग: 1.5 लाख में PPF + ELSS + इंश्योरेंस प्रीमियम भरना मुश्किल हो गया है।
- टैक्स बचत में कमी: नई टैक्स व्यवस्था चुनने वाले लोग 80C का लाभ नहीं ले पाते, इसलिए पुरानी व्यवस्था चुनने वाले मिडिल क्लास परिवारों की संख्या बढ़ रही है।
- उद्योग की मांग: AMCHAM (अमेरिकन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स इन इंडिया) ने औपचारिक रूप से 3.5 लाख रुपये तक सीमा बढ़ाने की सिफारिश की है।
बजट में क्या संभावना है?
रिपोर्ट्स और टैक्स विशेषज्ञों के अनुसार, इस बजट में 80C की सीमा को 2.5 लाख से 3 लाख रुपये तक बढ़ाने की संभावना है। यदि यह होता है तो:
- 30% टैक्स ब्रैकेट वाले व्यक्ति को सालाना 45,000 से 54,000 रुपये तक टैक्स बचत हो सकती है।
- 20% ब्रैकेट में 30,000 से 36,000 रुपये तक की बचत।
- कुल मिलाकर मिडिल क्लास परिवारों के हाथ में 40-50 हजार रुपये सालाना अतिरिक्त बचेंगे।
विपक्ष और विशेषज्ञों की मांग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और अन्य विपक्षी नेताओं ने कई बार संसद में इस मुद्दे को उठाया है। उनका कहना है कि 12 साल में महंगाई तीन गुना बढ़ गई, लेकिन टैक्स छूट की सीमा नहीं। टैक्स एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि 3 लाख रुपये की सीमा कम से कम तर्कसंगत होगी।
बजट से पहले क्या करें?
यदि आप पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनते हैं तो:
- 80C में 1.5 लाख तक निवेश जल्द पूरा करें।
- ELSS में निवेश करके मार्केट रिटर्न के साथ टैक्स बचत करें।
- PPF, NSC, 5 साल की FD और जीवन बीमा में निवेश करें।
- बच्चों की ट्यूशन फीस और होम लोन मूलधन पर भी 80C का लाभ लें।
बजट 2026 मिडिल क्लास के लिए राहत पैकेज लाने का मौका है। सेक्शन 80C की सीमा बढ़ना न केवल टैक्स बचत देगा, बल्कि लंबी अवधि की बचत और निवेश को भी प्रोत्साहन देगा। सभी की निगाहें अब 1 फरवरी 2026 को प्रस्तुत होने वाले बजट पर टिकी हैं, जिसमें यह देखना होगा कि सरकार महंगाई से जूझ रहे मिडिल क्लास को कितनी राहत देती है।