ममता बनर्जी को बड़ा राजनीतिक झटका! 20 सांसदों ने लोकसभा स्पीकर को लिखी चिट्ठी, NDA को दिया समर्थन
Jun 8, 2026, 18:21 IST
पश्चिम बंगाल की राजनीति में उस समय हलचल मच गई जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ सांसदों द्वारा लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखकर एनडीए में शामिल होने की इच्छा जताने की खबर सामने आई। रिपोर्ट्स के अनुसार, सांसद काकोली दस्तीदार ने दावा किया है कि उनके सहित 20 सांसदों ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को समर्थन देने का फैसला किया है।
बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाओं को तेज कर दिया है।
चुनावी नतीजों का हवाला
काकोली दस्तीदार के अनुसार, संबंधित सांसद पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी परिणामों को स्वीकार करते हुए मानते हैं कि उनका राजनीतिक भविष्य एनडीए के साथ अधिक सुरक्षित हो सकता है। इससे पहले भी पार्टी में संभावित टूट की अटकलों के बीच कुछ सांसदों की भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की खबरें सामने आई थीं।
दल-बदल कानून पर भी चर्चा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं तो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून के कुछ प्रावधान लागू नहीं होते। इसी वजह से इस घटनाक्रम को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है।
पहले भी उठे थे असंतोष के स्वर
इससे पहले सुखेंदु रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उनके इस्तीफे के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें लगाई जा रही थीं।
कई सांसदों के नाम चर्चा में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने वाले सांसदों में काकोली दस्तीदार, शताब्दी रॉय, दीपक अधिकारी (देव), पार्थ भौमिक, प्रसुन बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, बापी हलदर समेत कई अन्य सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह एक बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा।
बताया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में अलग बैठने की व्यवस्था करने का भी अनुरोध किया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चाओं को तेज कर दिया है।
चुनावी नतीजों का हवाला
काकोली दस्तीदार के अनुसार, संबंधित सांसद पश्चिम बंगाल के हालिया चुनावी परिणामों को स्वीकार करते हुए मानते हैं कि उनका राजनीतिक भविष्य एनडीए के साथ अधिक सुरक्षित हो सकता है। इससे पहले भी पार्टी में संभावित टूट की अटकलों के बीच कुछ सांसदों की भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की खबरें सामने आई थीं।
दल-बदल कानून पर भी चर्चा
राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यदि किसी दल के दो-तिहाई सांसद एक साथ अलग होने का फैसला करते हैं तो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल कानून के कुछ प्रावधान लागू नहीं होते। इसी वजह से इस घटनाक्रम को लेकर कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा शुरू हो गई है।
पहले भी उठे थे असंतोष के स्वर
इससे पहले सुखेंदु रॉय ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा देते हुए पार्टी नेतृत्व और राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार तथा महिलाओं के खिलाफ अत्याचार जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। उनके इस्तीफे के बाद से ही पार्टी के भीतर असंतोष की अटकलें लगाई जा रही थीं।
कई सांसदों के नाम चर्चा में
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात करने वाले सांसदों में काकोली दस्तीदार, शताब्दी रॉय, दीपक अधिकारी (देव), पार्थ भौमिक, प्रसुन बनर्जी, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, बापी हलदर समेत कई अन्य सांसदों के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर तृणमूल कांग्रेस की ओर से आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह एक बड़ा घटनाक्रम माना जाएगा।