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गिग वर्कर्स के लिए बड़ी राहत: सरकार ने जारी किए सोशल सिक्योरिटी के ड्राफ्ट नियम, हड़ताल के बीच आया अहम फैसला

 

नई दिल्ली I केंद्र सरकार ने गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए सोशल सिक्योरिटी कोड 2020 के तहत ड्राफ्ट नियम नोटिफाई कर दिए हैं। ये नियम 30 दिसंबर 2025 को जारी किए गए, ठीक उसी समय जब देशभर में डिलीवरी वर्कर्स हड़ताल की तैयारी कर रहे थे। इन नियमों से स्विगी, जोमैटो, उबर, ब्लिंकिट जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले लाखों डिलीवरी बॉयज, ड्राइवर्स और फ्रीलांसर्स को स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और दुर्घटना बीमा जैसे लाभ मिल सकेंगे।

रजिस्ट्रेशन और आईडी की व्यवस्था
- 16 साल से अधिक उम्र के सभी गिग वर्कर्स का आधार से अनिवार्य रजिस्ट्रेशन होगा।
- एग्रीगेटर्स (जैसे स्विगी-जोमैटो) को वर्कर्स की डिटेल्स सेंट्रल पोर्टल पर शेयर करनी होंगी, जिससे यूनिक आईडी या यूनिवर्सल अकाउंट नंबर जनरेट होगा।
- रजिस्टर्ड वर्कर्स को डिजिटल या फिजिकल आईडेंटिटी कार्ड मिलेगा, जिसे पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकेगा।
- पता, मोबाइल नंबर या स्किल में बदलाव होने पर तुरंत अपडेट करना जरूरी, वरना लाभ रुक सकते हैं।

एलिजिबिलिटी की शर्तें
- लाभ लेने के लिए पिछले वित्त वर्ष में एक एग्रीगेटर के साथ कम से कम 90 दिन या कई एग्रीगेटर्स के साथ 120 दिन काम करना अनिवार्य।
- हर दिन कमाई होने पर (चाहे कितनी कम हो) एक दिन काउंट होगा।
- अगर एक दिन कई प्लेटफॉर्म्स पर काम किया तो अलग-अलग काउंट होगा (उदाहरण: तीन प्लेटफॉर्म्स पर काम तो तीन दिन)।
- 60 साल की उम्र पूरी होने या लगातार तय दिनों तक काम न करने पर एलिजिबिलिटी खत्म हो जाएगी।

मिलने वाले लाभ
- स्वास्थ्य बीमा, जीवन बीमा और पर्सनल एक्सीडेंट इंश्योरेंस।
- एग्रीगेटर्स के योगदान से अलग सोशल सिक्योरिटी फंड बनेगा।
- भविष्य में पेंशन जैसी अतिरिक्त योजनाएं भी आ सकती हैं।
- नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड में गिग वर्कर्स के 5 प्रतिनिधि शामिल होंगे, जो नई स्कीम्स सुझाएंगे।

ड्राफ्ट नियमों पर स्टेकहोल्डर्स से 30-45 दिनों में फीडबैक मांगा गया है। फाइनल नियम आने के बाद ये लागू होंगे।

हड़ताल का बैकग्राउंड

इन नियमों के जारी होने से ठीक पहले गिग वर्कर्स ने बड़ा आंदोलन किया। 25 दिसंबर को सांकेतिक हड़ताल में करीब 40,000 वर्कर्स शामिल हुए। 31 दिसंबर को देशव्यापी हड़ताल की योजना थी, जिसमें 1 लाख से अधिक वर्कर्स के शामिल होने की उम्मीद थी। मुख्य मांगें थीं:
1. सोशल सिक्योरिटी और वेलफेयर फंड की कमी।
2. कमाई और इंसेंटिव में कटौती (पहले ₹40-60 प्रति ऑर्डर, अब ₹15-25)।
3. 10 मिनट डिलीवरी का दबाव, जिससे एक्सीडेंट का खतरा बढ़ा।
4. मनमाने तरीके से आईडी ब्लॉक करना।
5. गिग वर्कर्स को 'कर्मचारी' का दर्जा देना।

हड़ताल की धमकी के बाद स्विगी और जोमैटो ने इंसेंटिव बढ़ाए। जोमैटो ने पीक ऑवर्स में ₹120-150 प्रति ऑर्डर और दिन में ₹3,000 तक कमाई का वादा किया। स्विगी ने 31 दिसंबर-1 जनवरी के लिए ₹10,000 तक कमाई का ऐलान किया। इसके बाद बड़े पैमाने पर हड़ताल टल गई, हालांकि कुछ स्थानीय असर रहा।

ये ड्राफ्ट नियम गिग इकोनॉमी के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं, जो अनऑर्गनाइज्ड वर्कर्स को सुरक्षा देने की दिशा में हैं। वर्कर्स को सलाह है कि जल्द रजिस्ट्रेशन कराएं और डिटेल्स अपडेट रखें।