NEET UG पेपर सॉल्वर गैंग का बड़ा खुलासा: बायोमेट्रिक सिस्टम में सेंध, 30 गिरफ्तार, 10-12 लाख में होता था सौदा
लखीसराय। नीट यूजी परीक्षा में सॉल्वर गैंग के भंडाफोड़ के बाद जांच में लगातार चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह ने परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन व्यवस्था में ही सेंध लगाकर पूरी साजिश को अंजाम दिया था। बायोमेट्रिक जांच से जुड़े कर्मियों की मिलीभगत से फर्जी परीक्षार्थियों को असली अभ्यर्थियों के स्थान पर परीक्षा केंद्र के अंदर प्रवेश दिलाया गया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पावापुरी मेडिकल कॉलेज, राजगीर का छात्र रविशंकर इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था। उसने विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे छात्रों को सॉल्वर के रूप में तैयार कर परीक्षा में बैठाने की योजना बनाई थी। गिरोह ऐसे अभ्यर्थियों की तलाश करता था, जो मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पाने के लिए किसी भी कीमत पर सफल होना चाहते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि पटना मेडिकल कॉलेज के चतुर्थ वर्ष के छात्र एवं हाजीपुर निवासी मयंक कश्यप ने अंकित कुमार की पहचान पर बायोमेट्रिक स्टाफ के रूप में काम किया। आरोप है कि इसी माध्यम से गिरोह ने बायोमेट्रिक सत्यापन प्रक्रिया को प्रभावित किया और सॉल्वरों को परीक्षा केंद्र के भीतर प्रवेश दिलाने में सफलता हासिल की।
पुलिस ने अब तक नौ मेडिकल छात्रों समेत कुल 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लोगों में बायोमेट्रिक एजेंसी से जुड़े कर्मचारी, गिरोह के अन्य सदस्य और एक मूल परीक्षार्थी भी शामिल है। पुलिस कुछ अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ कर रही है।
लखीसराय के एसडीपीओ शिवम कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में प्रत्येक अभ्यर्थी से 10 से 12 लाख रुपये में सौदा तय होने की जानकारी मिली है। इसमें एक से दो लाख रुपये अग्रिम लिए जाते थे, जबकि शेष राशि परीक्षा में सफलता और मेडिकल कॉलेज में नामांकन के बाद ली जानी थी। पुलिस बैंक खातों, मोबाइल कॉल डिटेल और डिजिटल लेन-देन की भी जांच कर रही है।
वहीं, केंद्रीय विद्यालय लखीसराय के प्रभारी प्राचार्य सह सिटी कोऑर्डिनेटर दिनेश कुमार भगत के आवेदन पर प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और रैकेट से जुड़े हर व्यक्ति की भूमिका की पड़ताल की जा रही है।