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Black Day on April 1: ट्रेड यूनियंस 1 अप्रैल को मनाएंगे काला दिवस, नए लेबर कोड्स के खिलाफ करेंगे देशव्यापी प्रदर्शन

 
नई दिल्ली। केंद्रीय श्रमिक संगठनों के संयुक्त मंच (Joint Platform of Central Trade Unions) ने 1 अप्रैल 2026 को देशभर में ‘काला दिवस’ मनाने का ऐलान किया है। यह विरोध प्रदर्शन केंद्र सरकार द्वारा लागू की गई चार नई श्रम संहिताओं के खिलाफ किया जा रहा है, जिन्हें श्रमिक संगठन मजदूर विरोधी बता रहे हैं।

श्रम संहिताओं को लेकर विवाद

दरअसल, सरकार ने 21 नवंबर 2025 से वेतन, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा से जुड़ी चार नई श्रम संहिताएं लागू की हैं।
श्रमिक संगठनों का आरोप है कि ये कानून पूरी तरह नियोक्ता समर्थक हैं और इन्हें बनाते समय मजदूरों के हितों की अनदेखी की गई है।

ट्रेड यूनियनों का कहना है कि इन कोड्स से श्रमिकों के संगठन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकार कमजोर होंगे, जिससे कामगारों की स्थिति और खराब हो सकती है।

कैसे मनाया जाएगा ‘काला दिवस’

1 अप्रैल को देशभर के कार्यस्थलों पर विरोध के अलग-अलग रूप देखने को मिलेंगे। श्रमिक काले बैज लगाकर या बांह व माथे पर काली पट्टी बांधकर विरोध जताएंगे।

इसके अलावा- लंच ब्रेक के दौरान प्रदर्शन और नारेबाजी
कई जगह धरना और जुलूस
साइकिल और मोटरसाइकिल रैलियां

जैसी गतिविधियों के जरिए सरकार के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी।

कई बड़े संगठनों का समर्थन

इस विरोध प्रदर्शन को देश के कई प्रमुख श्रमिक संगठनों का समर्थन मिला है, जिनमेंAITUC, HMS, CITU, AIUTUC, SEVA, AICCTU, LPF और UTUC शामिल हैं।

इतना ही नहीं, संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) ने भी इस ‘काला दिवस’ को अपना समर्थन देने की घोषणा की है, जिससे आंदोलन को और ताकत मिलने की संभावना है।

सरकार का पक्ष

वहीं, सरकार का कहना है कि इन श्रम सुधारों का उद्देश्य 29 जटिल कानूनों को सरल बनाना है, जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी। हालांकि, 12 फरवरी 2026 को हुई आम हड़ताल के बाद भी सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।