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BRICS Summit: भारत के लिए क्यों अहम है ब्रिक्स सम्मेलन? जानें 4 बड़े फायदे

 विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिक्स के विस्तार से भारत को नए निर्यात बाजार मिल सकते हैं। वहीं खाड़ी देशों से निवेश बढ़ने की संभावना भी है।
 

BRICS Summit: राजधानी में हो रहा 18वां BRICS Summit भारत के लिए सिर्फ कूटनीतिक लिहाज से ही नहीं, बल्कि आर्थिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता और मंदी की चिंताओं के बीच ब्रिक्स देशों की यह बैठक भारत के लिए नए व्यापारिक अवसर, विदेशी निवेश और ऊर्जा सुरक्षा का रास्ता खोल सकती है।

आर्थिक मामलों के जानकारों सुनील शाह और पंकज जैसवाल के मुताबिक, ब्रिक्स के बढ़ते दायरे का भारत को कई स्तरों पर फायदा मिल सकता है। खासकर नए बाजारों तक पहुंच, लोकल करेंसी में व्यापार, खाड़ी देशों से निवेश और ऊर्जा सुरक्षा ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर भारत को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।

1. नए बाजारों में बढ़ सकता है भारतीय एक्सपोर्ट

ब्रिक्स समूह के विस्तार से भारत के सामने निर्यात के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। रूस, चीन, यूएई, सऊदी अरब और अफ्रीकी देशों में भारतीय वस्तुओं और सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की गुंजाइश है।

अमेरिका की ओर से लगाए गए टैरिफ के मामले में ब्रिक्स से भारत को सीधे राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। हालांकि, भारत दूसरे बड़े बाजारों में अपने निर्यात को बढ़ाकर अमेरिकी बाजार पर निर्भरता कम कर सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भारतीय कंपनियां ब्रिक्स देशों और इससे जुड़े नए बाजारों में अपनी मौजूदगी बढ़ाती हैं तो इससे देश के निर्यात को लंबे समय में मजबूती मिल सकती है।

2. लोकल करेंसी में व्यापार और डिजिटल पेमेंट पर जोर

ब्रिक्स देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका मकसद अंतरराष्ट्रीय कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है।

भारत और रूस के बीच लोकल करेंसी में बढ़ता व्यापार इस दिशा में एक उदाहरण है। इससे भुगतान से जुड़ी कुछ जटिलताओं को कम करने में मदद मिल सकती है। खासकर कच्चे तेल जैसे जरूरी सामान के आयात में इसका महत्व बढ़ जाता है।

इसके साथ ही ब्रिक्स देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल पेमेंट को आसान और तेज बनाने पर भी काम हो रहा है। CBDC यानी सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी और दूसरे डिजिटल पेमेंट मैकेनिज्म भविष्य में सीमा पार भुगतान को ज्यादा सुविधाजनक बनाने में भूमिका निभा सकते हैं।

3. खाड़ी देशों से भारत में बढ़ सकता है निवेश

ब्रिक्स में सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों की मौजूदगी भारत के लिए निवेश के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

आर्थिक जानकारों के मुताबिक, इन देशों के पास बड़े निवेश फंड हैं और भारत में इंफ्रास्ट्रक्चर, एनर्जी, लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में निवेश की अच्छी संभावनाएं हैं।

अगर इस दिशा में बड़े समझौते और निवेश होते हैं तो इसका फायदा भारत की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ रोजगार और औद्योगिक विकास को भी मिल सकता है।

4. ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी मजबूती

भारत के लिए ब्रिक्स का एक और बड़ा फायदा एनर्जी सिक्योरिटी से जुड़ा है। समूह में रूस, सऊदी अरब और यूएई जैसे बड़े तेल उत्पादक देश शामिल हैं।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में दुनिया के प्रमुख तेल उत्पादक देशों के साथ मजबूत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संबंध भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।

ब्रिक्स मंच के जरिए इन देशों के साथ सहयोग बढ़ने से भारत को लंबे समय में ऊर्जा आपूर्ति और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर फायदा मिल सकता है।

क्या BRICS की अपनी कॉमन करेंसी आएगी?

ब्रिक्स को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा इस सवाल पर होती है कि क्या समूह की अपनी कॉमन करेंसी लॉन्च होगी। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, फिलहाल ऐसी किसी साझा मुद्रा के तुरंत लॉन्च होने की संभावना काफी कम है।

अभी सदस्य देशों का ज्यादा जोर अपनी-अपनी स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और डिजिटल पेमेंट सिस्टम को मजबूत करने पर है।

यानी आने वाले समय में ब्रिक्स की आर्थिक रणनीति का फोकस सीधे एक नई साझा मुद्रा लाने के बजाय डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए वैकल्पिक भुगतान व्यवस्था और लोकल करेंसी में कारोबार को बढ़ावा देने पर रह सकता है।

भारत के लिए BRICS क्यों बन रहा है अहम?

ब्रिक्स का विस्तार ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक व्यापार और अर्थव्यवस्था कई तरह की अनिश्चितताओं से गुजर रही है। अमेरिका के टैरिफ, वैश्विक मंदी की आशंका और भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत के लिए नए व्यापारिक साझेदार और निवेश के स्रोत महत्वपूर्ण हो गए हैं।

ऐसे में BRICS भारत को नए निर्यात बाजार, विदेशी निवेश, डिजिटल पेमेंट सहयोग और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर नए अवसर दे सकता है। हालांकि, इन अवसरों का वास्तविक आर्थिक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि भारत ब्रिक्स देशों के साथ व्यापार, निवेश और भुगतान व्यवस्था को किस हद तक व्यावहारिक समझौतों में बदल पाता है।