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BRICS को लेकर कांग्रेस में मतभेद? चिदंबरम ने पूछा- भारत को क्या मिला, थरूर ने गिनवा दिए फायदे 

BRICS Summit 2026 से पहले कांग्रेस नेताओं के बयानों से अलग-अलग राय सामने आई है। पी. चिदंबरम ने समूह से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाए, जबकि शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ का अहम मंच बताया। थरूर ने भारत की कूटनीतिक भूमिका, चुनौतियों और व्यापार घाटे पर भी बात की।

 

नई दिल्ली: BRICS Summit 2026 से पहले कांग्रेस के भीतर ही इस समूह की उपयोगिता को लेकर अलग-अलग राय सामने आई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस फायदों पर सवाल उठाया था। वहीं, कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने BRICS को ग्लोबल साउथ के लिए महत्वपूर्ण मंच बताते हुए भारत के लिए इसके कई फायदे गिनाए हैं। हालांकि, थरूर ने समूह के सामने मौजूद चुनौतियों और भारत के बढ़ते व्यापार घाटे को लेकर भी चिंता जताई।

थरूर ने बताया, भारत के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण

दिल्ली में होने वाले BRICS सम्मेलन से पहले शशि थरूर ने कहा कि BRICS ग्लोबल साउथ यानी विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ में 100 से ज्यादा देश हैं, लेकिन BRICS के 11 प्रमुख सदस्य देश इन देशों की विविधता और अलग-अलग विचारों को काफी हद तक प्रतिनिधित्व देते हैं।

थरूर के मुताबिक, BRICS के 11 देश दुनिया की आबादी के एक बड़े हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं और वैश्विक GDP में उनकी हिस्सेदारी करीब 41 प्रतिशत है।

उन्होंने कहा कि यह कोई छोटी बात नहीं है और दुनिया के बाकी देशों को भी BRICS को गंभीरता से लेना पड़ता है।

भारत के लिए BRICS की मेजबानी क्यों अहम?

शशि थरूर ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी को भारत के लिए प्रतिष्ठा का विषय भी बताया। उन्होंने कहा कि सम्मेलन में BRICS देशों के अलावा कुछ पर्यवेक्षक देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री स्तर के नेता भी शामिल होंगे।

थरूर के अनुसार, इतने देशों के शीर्ष नेताओं का भारत आना देश की कूटनीतिक पहुंच को दिखाता है। साथ ही, अलग-अलग देशों को एक मंच पर लाने की भारत की क्षमता भी इससे सामने आती है। वैश्विक स्तर पर भारत की यह कूटनीतिक भूमिका अपने आप में महत्वपूर्ण है।

BRICS के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

थरूर ने BRICS के फायदों के साथ-साथ इसकी चुनौतियों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समूह के अलग-अलग सदस्य देशों के बीच महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर एक राय बनाना आसान नहीं है।

उन्होंने ईरान युद्ध और रूस-यूक्रेन संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि सदस्य देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद मौजूद हैं।

थरूर के मुताबिक, मई में नई दिल्ली में हुई BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और यूएई के बीच युद्ध को लेकर मतभेद सामने आए थे। इन मतभेदों के चलते सदस्य देश साझा बयान पर सहमत नहीं हो सके थे।

साझा बयान पर सहमति नहीं बनी तो भारत ने जारी की थी चेयर घोषणा

शशि थरूर ने कहा कि पिछली BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में सदस्य देशों के बीच साझा घोषणा पर सहमति नहीं बन सकी थी। इसके बाद भारत ने BRICS अध्यक्ष के तौर पर अपनी ओर से चेयर की घोषणा जारी की थी।

अब सवाल यह है कि आगामी BRICS सम्मेलन में भी क्या ऐसी स्थिति बन सकती है?

थरूर के मुताबिक, अगर इस बार भी सदस्य देश साझा बयान पर सहमत नहीं हो पाते हैं तो कुछ लोग इसे BRICS के लिए झटका और समूह के भीतर मौजूद बुनियादी असहमति का संकेत मान सकते हैं।

उन्होंने कहा कि अलग-अलग देशों के मतभेदों को संभालना और उनके बीच सहमति बनाने की कोशिश करना भारतीय राजनयिकों के सामने बड़ी चुनौती होगी।

BRICS देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा भी चिंता

थरूर ने BRICS देशों के साथ भारत के व्यापार को लेकर भी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि BRICS देशों के बीच व्यापार लगातार बढ़ रहा है, लेकिन भारत के नजरिए से इसकी तस्वीर पूरी तरह सकारात्मक नहीं है।

उनके अनुसार, BRICS देशों को भारत का निर्यात घटा है, जबकि इन देशों से भारत का आयात बढ़ा है। इसका मतलब है कि व्यापार बढ़ने के बावजूद भारत का व्यापार संतुलन नुकसान की दिशा में जा रहा है।

यानी BRICS के साथ बढ़ते व्यापार का फायदा भारत को मिल रहा है, लेकिन आयात और निर्यात के बीच बढ़ता अंतर एक बड़ी चिंता बना हुआ है।

चिदंबरम ने BRICS पर क्या सवाल उठाए थे?

थरूर के बयान से एक दिन पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने BRICS को लेकर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस नतीजों पर सवाल उठाते हुए कहा था कि उन्हें कोई खास या ठोस फायदा नजर नहीं आया।

चिदंबरम ने यह भी कहा था कि भारत BRICS के अलावा शंघाई सहयोग संगठन (SCO), G20 और QUAD जैसे कई बहुपक्षीय संगठनों का हिस्सा है। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि इन विभिन्न मंचों से भारत को वास्तव में क्या ठोस लाभ मिला है।

समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में चिदंबरम ने कहा था कि उन्हें नहीं लगता कि पिछले दो-तीन BRICS सम्मेलनों से भारत को कोई ठोस फायदा या ठोस परिणाम मिला है।

BJP ने चिदंबरम के बयान पर साधा था निशाना

चिदंबरम के बयान के बाद BJP ने भी कांग्रेस नेता पर निशाना साधा था। BJP ने उन्हें उन 'नाराज फूफा' लोगों में शामिल बताया था, जो भारत की प्रगति को पचा नहीं पा रहे हैं।

इस तरह BRICS को लेकर कांग्रेस के दो वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आए हैं। जहां पी. चिदंबरम ने पिछले सम्मेलनों से भारत को मिले ठोस परिणामों पर सवाल उठाया है, वहीं शशि थरूर ने BRICS की वैश्विक भूमिका, भारत की कूटनीतिक क्षमता और सम्मेलन की मेजबानी के महत्व को रेखांकित किया है।

बता दें कि भारत में 12 और 13 सितंबर को BRICS Summit 2026 होने वाला है। सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विभिन्न BRICS नेताओं के साथ होने वाली द्विपक्षीय बैठकों का शेड्यूल भी सामने आ चुका है।