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रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न से टूटा छात्र, तीसरी मंजिल से लगाई छलांग; 4 डॉक्टरों समेत कॉलेज प्रशासन पर केस
 

 

बरेली। भोजीपुरा स्थित एक निजी मेडिकल कॉलेज में एमडी मेडिसिन के छात्र डॉ. आशु पाराशर की आत्महत्या के प्रयास के मामले में कॉलेज प्रशासन और चार प्रशिक्षु डॉक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न और अत्यधिक कार्यभार से परेशान होकर डॉ. आशु ने 2 मई को कॉलेज की तीसरी मंजिल से छलांग लगाकर जान देने की कोशिश की थी। गंभीर रूप से घायल आशु की हालत अब भी नाजुक बनी हुई है।

बिजनौर के कीरतपुर निवासी सुधीर पाराशर ने भोजीपुरा थाने में दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनके बेटे डॉ. आशु पाराशर को एमडी में प्रवेश लेने के कुछ समय बाद से ही वरिष्ठ छात्रों द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा था। आरोप है कि उससे अभद्र व्यवहार किया जाता था, गाली-गलौज की जाती थी, भोजन करने से रोका जाता था और ड्यूटी समाप्त होने के बाद भी जबरन रोका जाता था। इसके अलावा उससे निजी कार्य कराए जाते थे और कई बार लगातार 40 घंटे तक ड्यूटी कराई जाती थी।

परिजनों के अनुसार, डॉ. आशु ने अपनी परेशानी विभागाध्यक्ष डॉ. स्मिता गुप्ता को बताई थी। उन्होंने उसे रोहित शर्मा के पास भेजा, लेकिन मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। घटना के बाद होश में आने पर आशु ने अपने पिता को पूरी आपबीती बताई। इसके बाद 5 मई को कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य को भी शिकायत भेजी गई, लेकिन कोई कदम नहीं उठाया गया।

चार प्रशिक्षु डॉक्टर नामजद

एफआईआर में रितेश गोयल, कुशाग्र शर्मा, मानस खंडेलवाल और लतिका को नामजद किया गया है। ये सभी एमडी द्वितीय और तृतीय वर्ष के छात्र बताए गए हैं। इनके अलावा कुछ अन्य छात्रों और कॉलेज प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं।

जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने एडीएम प्रशासन पूर्णिमा सिंह की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच समिति गठित की थी। समिति में एसपी सिटी मानुष पारीक, एसडीएम सदर प्रमोद कुमार और तहसीलदार सदर को शामिल किया गया था।

जांच के दौरान सामने आया कि डॉ. आशु लंबे समय से छुट्टी नहीं मिलने और अत्यधिक कार्यभार के कारण तनाव में थे। उन्होंने कई बार अस्पताल प्रशासन से लिखित और मौखिक शिकायत भी की थी, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। जांच समिति ने माना कि इसी तनाव के चलते उन्होंने आत्महत्या का प्रयास किया।

हालांकि समिति को रैगिंग के आरोपों की प्रत्यक्ष पुष्टि नहीं मिली, लेकिन छात्र, उसके परिजनों और दोस्तों के बयान दर्ज किए गए। समिति की संस्तुति के आधार पर भोजीपुरा पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है।

कॉलेज प्रशासन ने साधी चुप्पी

मामले में मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। कॉलेज अधिकारियों का कहना है कि विवेचना पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

वहीं, एसएसपी अनुराग आर्य ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान मिली शिकायत के आधार पर संयुक्त जांच कराई गई थी। जांच में प्रथम दृष्टया आरोप सही पाए जाने के बाद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। मामले की विवेचना जारी है और जांच में जो तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।