Budget Explained: सरकार पैसा कहां से लाती है और कहां खर्च करती है, आसान शब्दों में समझिए सरकार की कमाई और खर्च
बजट सरकार की एक साल की आमदनी और खर्च का विस्तृत खाका होता है। इसमें टैक्स, उधार, विकास योजनाएं, सब्सिडी और रक्षा खर्च शामिल होते हैं। बजट अर्थव्यवस्था, महंगाई नियंत्रण और आम नागरिक की जिंदगी पर सीधा असर डालता है।
Budget Explained 2026: सरल शब्दों में कहा जाए तो बजट सरकार की एक साल की आमदनी और खर्च का पूरा लेखा-जोखा होता है। ठीक वैसे ही जैसे कोई परिवार महीने भर की कमाई और खर्च की योजना बनाता है, उसी तरह सरकार पूरे देश के विकास और संचालन के लिए सालाना वित्तीय खाका तैयार करती है।
बजट के दो मुख्य हिस्से
सरकारी बजट को मुख्य रूप से दो भागों में बांटा जाता है-
1. राजस्व बजट
इसमें सरकार की रोजमर्रा की आय और खर्च शामिल होते हैं। आय में टैक्स (जैसे आयकर, जीएसटी) आते हैं, जबकि खर्च में सरकारी कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, सब्सिडी और प्रशासनिक खर्च शामिल होता है।
2. पूंजीगत बजट
इस भाग में लंबे समय के निवेश और कर्ज से जुड़े लेन-देन शामिल होते हैं। सड़क, रेलवे, अस्पताल, स्कूल जैसे बुनियादी ढांचे के निर्माण पर होने वाला खर्च इसी श्रेणी में आता है।
बजट क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
बजट यह तय करता है कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा और सामाजिक कल्याण जैसे अहम क्षेत्रों पर कितना पैसा खर्च किया जाएगा। इसके जरिए सरकार टैक्स दरों में बदलाव, इनकम टैक्स छूट और नई योजनाओं की घोषणा करती है। साथ ही यह महंगाई नियंत्रण और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाता है।
जब खर्च ज्यादा हो, तो सरकार लेती है उधार
अगर सरकार का खर्च उसकी आमदनी से ज्यादा हो जाए, तो उसे उधार लेना पड़ता है। इसे दो हिस्सों में बांटा जाता है-
घरेलू स्रोत
सरकार अपना 95 प्रतिशत से अधिक कर्ज देश के भीतर से जुटाती है। इसमें सरकारी बॉन्ड, ट्रेजरी बिल, छोटी बचत योजनाएं और भारतीय रिजर्व बैंक की भूमिका अहम होती है।
विदेशी स्रोत
सरकार कुल जरूरत का सिर्फ 3 से 5 प्रतिशत कर्ज विदेशों से लेती है, जैसे विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अन्य देशों से द्विपक्षीय ऋण।
पैसा कहां से आता है?
वित्त वर्ष 2025-26 के अनुसार, सरकार की हर एक रुपये की प्राप्ति में सबसे बड़ा हिस्सा उधार का है। इसके बाद आयकर, जीएसटी, कॉरपोरेशन टैक्स और गैर-कर राजस्व आते हैं।
पैसा कहां खर्च होता है?
सरकार का सबसे बड़ा खर्च राज्यों को करों में हिस्सा देने और पुराने कर्जों के ब्याज भुगतान पर होता है। इसके अलावा रक्षा, केंद्र और राज्य की योजनाएं, सब्सिडी और पेंशन पर भी बड़ी राशि खर्च की जाती है।
कुल मिलाकर, बजट न केवल सरकार की नीतियों का आईना होता है, बल्कि आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी को भी सीधे तौर पर प्रभावित करता है।