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दिल्ली में अवैध निर्माण पर चला बुलडोजर, CM रेखा गुप्ता ने MCD को दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
 

 

नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने नगर निगम दिल्ली (MCD) को शहर के कई इलाकों में बुलडोजर अभियान चलाने को कहा। यह निर्देश सत्य निकेतन में PG भवन गिरने से सात लोगों की मौत के कुछ दिनों बाद आया है।

मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के दौरान MCD के सभी वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर मौजूद रहने के निर्देश भी दिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अवैध निर्माण से जुड़े भवन रिकॉर्ड की जांच की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि निर्माण कब कराया गया था और संबंधित भवन किस क्षेत्रीय अधिकार क्षेत्र में आता है।

सत्य निकेतन PG हादसे के बाद बढ़ी सख्ती

दरअसल, 6 सितंबर को दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत ढह गई थी, जिसमें सात लोगों की मौत हो गई। यह इमारत लड़कों के PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही थी। दर्ज FIR में कथित तौर पर चार मंजिलों के अवैध निर्माण का भी उल्लेख किया गया है।

हादसे के बाद 7 सितंबर को दिल्ली सरकार ने PG accommodations का स्ट्रक्चरल ऑडिट और सुरक्षा जांच कराने के निर्देश दिए थे। खासतौर पर मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर, लक्ष्मी नगर, सत्य निकेतन और साकेत जैसे छात्र बहुल इलाकों में PG भवनों की जांच के निर्देश दिए गए।

जांच के दौरान निर्माण की अनुमति, भवन की संरचनात्मक मजबूती, फायर सेफ्टी NOC और बिल्डिंग नियमों के अनुपालन की जांच की जानी है।

जर्जर PG भवन पर भी कार्रवाई

MCD ने सत्य निकेतन में हादसे वाली इमारत के पास स्थित एक जर्जर PG भवन को भी असुरक्षित घोषित कर दिया है। इसके बाद उसे गिराने का आदेश दिया गया और बुधवार से ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई।

PG के लिए नया कानून लाने की तैयारी

दिल्ली सरकार PG आवासों को लेकर एक नया कानून लाने की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित ‘Paying Guest Accommodation Regulation and Safety Bill, 2026’ के तहत PG संचालकों के लिए लाइसेंस अनिवार्य किए जाने की संभावना है।

प्रस्तावित कानून में स्ट्रक्चरल और फायर सेफ्टी ऑडिट, जोन के हिसाब से किराये की सीमा और PG accommodations की जानकारी वाला केंद्रीकृत पोर्टल शामिल किए जाने की बात सामने आई है।

दिल्ली मास्टर प्लान-2047 के लिए तैयार बेसलाइन रिपोर्ट में भी राजधानी में किराये के आवासों की कमी का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट में हॉस्टल, डॉर्मिटरी, छात्र आवास, को-लिविंग स्पेस और PG जैसी वैकल्पिक आवास सुविधाओं को बढ़ावा देने की जरूरत बताई गई थी।