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कैबिनेट मंत्री के दामाद बनने से पहले ही फंसे दरोगा: रिश्वत लेते रंगेहाथ हुए गिरफ्तार, टूटी शादी 

मेरठ में रिश्वत लेते पकड़े गए दारोगा छत्रपाल की शादी मंत्री धर्मपाल सिंह की भतीजी से तय थी, जो अब टूट गई है। 5 मई को होने वाली शादी से पहले एंटी करप्शन टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया। मामले के बाद पुलिस विभाग में भी सख्त कार्रवाई शुरू हुई है।

 

Meerut News: मेरठ के पल्लवपुरम थाने में तैनात 2023 बैच के दारोगा छत्रपाल की जिंदगी एक झटके में बदल गई। जो दारोगा कुछ ही दिनों में प्रदेश सरकार के एक बड़े मंत्री के परिवार का दामाद बनने वाला था, वही अब रिश्वतखोरी के आरोप में जेल पहुंच गया है। गिरफ्तारी के बाद लड़की पक्ष ने तुरंत शादी से इनकार कर दिया, जिससे 5 मई को होने वाली शादी टूट गई।

मंत्री के परिवार से तय था रिश्ता, तैयारियां भी लगभग पूरी

दारोगा छत्रपाल का रिश्ता प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह की भतीजी से तय हुआ था। शादी की तारीख भी तय हो चुकी थी और परिवार में तैयारियां अंतिम चरण में थीं। लेकिन रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़े जाने की खबर सामने आते ही लड़की पक्ष ने रिश्ता खत्म करने का फैसला ले लिया।
खुद मंत्री धर्मपाल सिंह ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि ऐसे मामले के बाद रिश्ता बनाए रखना संभव नहीं है। क्लीनचिट के नाम पर वसूली, एंटी करप्शन टीम ने किया गिरफ्तार

पूरा मामला पल्लवपुरम क्षेत्र का है, जहां पहले गांजा तस्करी के एक केस की जांच दारोगा छत्रपाल को सौंपी गई थी। आरोप है कि उन्होंने एक आरोपी को क्लीनचिट देने के नाम पर पहले एक लाख रुपये लिए और बाद में फिर से पैसे की मांग की।

शनिवार को एंटी करप्शन टीम ने इंस्पेक्टर दुर्गेश कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए दारोगा को 10 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ लिया। इसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया गया।

जेल में टूट गया हौसला, रोते हुए मांगी माफी

गिरफ्तारी के बाद दारोगा छत्रपाल का भावुक पक्ष भी सामने आया। बताया जा रहा है कि जेल में वह फूट-फूटकर रो पड़े और अपनी गलती स्वीकार करते हुए माफी मांगते रहे। उन्होंने खाना तक नहीं खाया और लगातार अपने साथियों से मदद की गुहार लगाते रहे।


इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। पल्लवपुरम थाना प्रभारी को लाइन हाजिर कर दिया गया है, जबकि संबंधित क्षेत्राधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है। साथ ही 2023 बैच के दारोगाओं की जांच प्रक्रिया पर अब कड़ी निगरानी रखने का फैसला लिया गया है, ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों पर रोक लगाई जा सके।