करोड़ों की टैक्स चोरी, 70 लाख की डील और दलालों का जाल, CGST डिप्टी कमिश्नर पर CBI की रेड
झांसी में CGST की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी रिश्वत कांड में CBI की बड़ी कार्रवाई, 1.60 करोड़ नकद बरामद, 7 पर केस दर्ज।
CGST Deputy Commissioner bribery case: केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST) विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने झांसी में तैनात सीजीएसटी की डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी समेत सात लोगों के खिलाफ रिश्वतखोरी और टैक्स चोरी में मिलीभगत के आरोप में मुकदमा दर्ज किया है। जांच में खुलासा हुआ है कि डिप्टी कमिश्नर ने दलालों के माध्यम से कारोबारियों से भारी रिश्वत लेकर करोड़ों रुपये के टैक्स चोरी मामलों में राहत दी।
सीबीआई सूत्रों के अनुसार, प्रभा भंडारी एक बड़े टैक्स चोरी मामले में कारोबारी को बचाने के बदले डेढ़ करोड़ रुपये की रिश्वत मांग रही थीं। अब तक 30 लाख रुपये की रकम दी जा चुकी थी और 70 लाख रुपये में सौदा तय हुआ था। यह रकम सीजीएसटी विभाग झांसी में तैनात कर अधीक्षक अनिल कुमार तिवारी और अजय शर्मा के माध्यम से ली गई।
वकील और कारोबारी भी शामिल
रिश्वतखोरी के इस नेटवर्क में सीजीएसटी के अधिवक्ता नरेश कुमार गुप्ता की भी भूमिका सामने आई है, जिसने कारोबारियों और कर अधिकारियों के बीच संपर्क स्थापित किया। सीबीआई ने इस मामले में जय अंबे प्लाईवुड के संचालक लोकेश तोलानी, जय दुर्गा हार्डवेयर के संचालक राजू मंगतानी और तेजपाल मंगतानी को भी आरोपी बनाया है।
बताया जा रहा है कि आठ दिन पहले जय दुर्गा हार्डवेयर पर सीजीएसटी की छापेमारी के बाद ही रिश्वत की मांग शुरू हुई थी। अफसरों और कारोबारियों के बीच सौदेबाजी चल रही थी, जिसकी भनक लगते ही सीबीआई ने कार्रवाई की।
1.60 करोड़ से अधिक नकदी और ज्वेलरी बरामद
सीबीआई ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डिप्टी कमिश्नर समेत पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इनके कब्जे से 1.60 करोड़ रुपये से अधिक की नकदी और आभूषण बरामद किए गए हैं। गिरफ्तार आरोपियों को लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
जमीन कारोबार में लगाई जाती थी काली कमाई
जांच के दौरान यह भी सामने आया है कि रिश्वत के पैसों को जमीन के कारोबार में निवेश किया जाता था। पूछताछ में 15 से अधिक प्रॉपर्टी डीलरों के नाम सामने आए हैं। सीबीआई के मुताबिक, कर अधीक्षक अनिल तिवारी इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाता था।
सूत्रों का कहना है कि यह मामला अब प्रवर्तन निदेशालय (ED) तक भी पहुंच सकता है, क्योंकि इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर संकेत मिले हैं। सीबीआई टीमें अब पूरे सिंडिकेट की जड़ें खंगालने में जुटी हैं।