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ज्ञानेश कुमार कब तक रहेंगे मुख्य चुनाव आयुक्त? 2027-29 में होंगे ये बड़े चुनाव, जानें हटाने का संवैधानिक नियम

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार विपक्ष के निशाने पर हैं और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई है। ऐसे में सवाल है कि उनका कार्यकाल कब तक है और CEC को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है। जानिए ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल, महाभियोग प्रक्रिया और 2027 से 2029 तक होने वाले चुनावों की पूरी जानकारी।

 

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्ष के विरोध और उनके इस्तीफे की मांग के बीच अब उनके कार्यकाल और पद से हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) समेत चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। हालांकि, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी पद से अलग और बेहद कड़ी है।

2029 तक रहेगा ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल

ज्ञानेश कुमार ने 19 फरवरी 2025 को भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में कार्यभार संभाला था। इससे पहले वह चुनाव आयुक्त के रूप में काम कर चुके थे। भारतीय निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार वह 1988 बैच के केरल कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं और 31 जनवरी 2024 को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए थे।

मौजूदा कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों का कार्यकाल छह वर्ष या 65 वर्ष की आयु तक, जो पहले हो, होता है। दोबारा नियुक्ति का प्रावधान नहीं है।

क्या विपक्ष अकेले ज्ञानेश कुमार को हटा सकता है?

नहीं। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए सामान्य प्रशासनिक आदेश पर्याप्त नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 324(5) के अनुसार CEC को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन पर सुप्रीम कोर्ट के किसी जज को हटाया जाता है।

इसका मतलब यह है कि केवल सरकार की इच्छा या विपक्ष की मांग से CEC को पद से नहीं हटाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट भी अपनी ओर से CEC को पद से हटाने का आदेश नहीं देता।

महाभियोग की प्रक्रिया क्या है?

CEC को हटाने की प्रक्रिया संसद से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह CEC को हटाने के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष प्रक्रिया पूरी करनी होती है। प्रस्ताव को संबंधित सदन में निर्धारित बहुमत हासिल करना जरूरी होता है और इसके बाद संसद के दोनों सदनों से प्रस्ताव पारित होने पर राष्ट्रपति को संबोधित किया जाता है।

इसलिए यह कहना सही नहीं है कि सिर्फ दो-तिहाई सांसदों की सहमति से CEC को हटाया जा सकता है। मामला विशेष संवैधानिक प्रक्रिया और संसद के दोनों सदनों के बहुमत से जुड़ा है।

इस्तीफा देना अलग विकल्प

मुख्य चुनाव आयुक्त चाहें तो खुद अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। लेकिन यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं, तो केवल राजनीतिक दबाव या विरोध प्रदर्शन के आधार पर उनका कार्यकाल समाप्त नहीं होता।

वर्तमान विवाद में विपक्षी दल ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 6 अक्टूबर को INDIA ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग की ओर मार्च किया था, जिसे पुलिस ने रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR को लेकर विपक्षी दलों ने अपनी मांगें उठाईं।

2027 में इन राज्यों के चुनाव होंगे

ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के दौरान 2027 में कई महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव प्रस्तावित हैं। इनमें:

उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड
पंजाब
गोवा
मणिपुर
गुजरात
हिमाचल प्रदेश

शामिल हैं। इन राज्यों की मौजूदा विधानसभा अवधि के आधार पर चुनाव 2027 में होने हैं। इसके अलावा 2027 में राष्ट्रपति चुनाव भी होना है। निर्वाचन आयोग संविधान के तहत राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों का संचालन करता है।

2028 में 9 राज्यों में विधानसभा चुनाव

2028 में भी चुनावी कैलेंडर काफी व्यस्त रहेगा। मौजूदा विधानसभा कार्यकाल के आधार पर इन नौ राज्यों में चुनाव प्रस्तावित हैं:

मध्य प्रदेश
राजस्थान
छत्तीसगढ़
तेलंगाना
कर्नाटक
मिजोरम
त्रिपुरा
मेघालय
नगालैंड

इनमें कुछ राज्यों की विधानसभा अवधि वर्ष की शुरुआत में और कुछ की वर्ष के अंत में पूरी होगी।

2029 में लोकसभा के साथ इन राज्यों में चुनाव

2029 में लोकसभा चुनाव के अलावा कई राज्यों में विधानसभा चुनाव भी प्रस्तावित हैं। इनमें अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, झारखंड और महाराष्ट्र शामिल हैं। इन चुनावों की सटीक तारीखें बाद में निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित की जाएंगी।

36 साल से अधिक का प्रशासनिक अनुभव

ज्ञानेश कुमार 1988 बैच के IAS अधिकारी हैं और केंद्र तथा राज्य सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। निर्वाचन आयोग के अनुसार उन्होंने केरल सरकार में विभिन्न जिम्मेदारियां संभालने के अलावा केंद्र में रक्षा मंत्रालय, गृह मंत्रालय, संसदीय कार्य मंत्रालय और सहकारिता मंत्रालय में भी काम किया है।

फिलहाल SIR को लेकर विपक्ष के साथ उनका टकराव राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। दूसरी ओर निर्वाचन आयोग चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपनी भूमिका का बचाव कर रहा है। ऐसे में ज्ञानेश कुमार के भविष्य को लेकर सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यही है कि उनका पद संवैधानिक सुरक्षा के दायरे में आता है और उन्हें हटाने की प्रक्रिया सामान्य सरकारी नियुक्तियों से अलग है।