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CM शुभेंदु अधिकारी का बड़ा फैसला: BSF को मिली सिलीगुड़ी कॉरिडोर की जमीन, चीन-बांग्लादेश की बढ़ी टेंशन

पश्चिम बंगाल सरकार ने सिलीगुड़ी कॉरिडोर की रणनीतिक जमीन केंद्र सरकार और BSF को सौंप दी है। ‘चिकन नेक’ कहे जाने वाले इस इलाके में अब हाईवे, अंडरग्राउंड रेलवे और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जाएगा, जिससे नॉर्थ ईस्ट राज्यों की कनेक्टिविटी और भारत की सामरिक ताकत बढ़ेगी।

 

Siliguri Corridor: 'पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सिलीगुड़ी कॉरिडोर को लेकर बड़ा रणनीतिक फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शपथ लेने के महज 10 दिन के भीतर केंद्र सरकार की लंबे समय से लंबित मांग पूरी करते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर की अहम जमीन BSF और केंद्रीय एजेंसियों को सौंपने का फैसला कर दिया।

बुधवार को शुभेंदु अधिकारी खुद सिलिगुड़ी पहुंचकर इस जमीन के दस्तावेज BSF को सौंपेंगे। इस फैसले को सिर्फ प्रशासनिक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और नॉर्थ ईस्ट कनेक्टिविटी के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है सिलीगुड़ी कॉरिडोर?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर पश्चिम बंगाल का वह बेहद संवेदनशील इलाका है, जिसे भारत की “चिकन नेक” कहा जाता है। करीब 22 किलोमीटर चौड़ा यह कॉरिडोर भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्से से जोड़ता है।

अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड और त्रिपुरा समेत सिक्किम तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता इसी कॉरिडोर से होकर गुजरता है। इसके पश्चिम में नेपाल और पूर्व में बांग्लादेश की सीमा लगती है, जिससे इसका सामरिक महत्व और बढ़ जाता है।

120 एकड़ जमीन क्यों बनी केंद्र की प्राथमिकता?

जिस इलाके को अब केंद्र सरकार को सौंपा गया है, वह करीब 120 एकड़ का रणनीतिक क्षेत्र है। लंबे समय से यहां हाईवे चौड़ीकरण, रेलवे विस्तार और सैन्य ढांचे से जुड़े कई प्रोजेक्ट अटके हुए थे।

केंद्र सरकार का मानना है कि इस कॉरिडोर में मजबूत सड़क और रेल नेटवर्क तैयार होने से सेना और भारी सैन्य उपकरणों की आवाजाही काफी तेज और आसान हो जाएगी। खासतौर पर चीन और बांग्लादेश की सीमा के करीब होने के कारण यह इलाका राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम माना जाता है।

अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बनेगी गेमचेंजर

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव पहले ही ऐलान कर चुके हैं कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर में लगभग 40 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बिछाई जाएगी।

इस परियोजना का उद्देश्य किसी भी आपातकालीन स्थिति में उत्तर-पूर्वी राज्यों से संपर्क बनाए रखना है। रणनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर भविष्य में किसी संकट या युद्ध जैसी स्थिति में बाहरी खतरा पैदा होता है, तो यह अंडरग्राउंड नेटवर्क भारत के लिए बड़ी सुरक्षा ढाल साबित हो सकता है।

हाईवे और इंफ्रास्ट्रक्चर होगा मजबूत

शुभेंदु सरकार ने नेशनल हाईवे के सात हिस्सों को NHAI और NHIDCL को सौंपने की मंजूरी दे दी है। इससे सड़क निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार तेज होगी। बेहतर हाईवे बनने से न सिर्फ सेना की मूवमेंट आसान होगी, बल्कि नॉर्थ ईस्ट राज्यों में व्यापार, पर्यटन और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

क्यों अटका हुआ था मामला?

केंद्र सरकार काफी समय से इस इलाके में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जमीन की मांग कर रही थी। लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मुद्दे को संघीय अधिकारों और राज्य नियंत्रण से जोड़कर टालती रही थीं। अब नई सरकार के फैसले के बाद लंबे समय से रुकी परियोजनाओं के तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

भारत की ‘कमजोर नस’ अब बनेगी सबसे मजबूत सुरक्षा कवच

रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि जिसे भारत की “कमजोर नस” कहा जाता था, वही इलाका अब देश की सबसे मजबूत सामरिक ढाल बन सकता है। 1971 के बांग्लादेश युद्ध से लेकर आज तक यह इलाका भारत की सुरक्षा नीति में अहम भूमिका निभाता रहा है। चीन और बांग्लादेश से जुड़े संभावित खतरों को देखते हुए केंद्र सरकार इस पूरे कॉरिडोर को हाईटेक सुरक्षा और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर से लैस करने की तैयारी में है।