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न्यूयॉर्क में मोहन भागवत के कार्यक्रम पर विवाद, 2018 का ‘शेर-कुत्ते’ वाला बयान फिर चर्चा में
 

 

न्यूयॉर्क। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत आज न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में आयोजित होने वाले ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। आयोजकों के मुताबिक कार्यक्रम में करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। हालांकि, भागवत के कार्यक्रम को लेकर अमेरिका में विरोध भी देखने को मिला है।

न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी ने कार्यक्रम का विरोध करते हुए आरएसएस की विचारधारा पर सवाल उठाए हैं। इसके अलावा कई इंटरफेथ और सिविल राइट्स संगठनों ने भी कार्यक्रम के खिलाफ प्रदर्शन किया है और इसे रद्द करने की मांग की है।

इसी विवाद के बीच मोहन भागवत का 2018 में दिया गया एक पुराना बयान एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भागवत ने 7 से 9 सितंबर 2018 के बीच अमेरिका के शिकागो में आयोजित दूसरे वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस को संबोधित करते हुए हिंदू समाज की एकता और उसके मूल सिद्धांतों पर बात की थी।

भागवत ने कहा था कि हिंदू समाज ने हजारों वर्षों तक कठिनाइयों का सामना किया, क्योंकि वह अपने मूल सिद्धांतों और आध्यात्मिकता को भूल गया। उन्होंने कहा था कि हिंदू समाज के पास ज्ञान और समझ की कमी नहीं है, लेकिन वह साथ मिलकर काम करना भूल गया है। उनके मुताबिक, आज भी हिंदू समाज में बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली लोग हैं, लेकिन वे एक साथ नहीं आते।

‘शेर और जंगली कुत्तों’ वाला बयान

करीब 2,500 लोगों को संबोधित करते हुए भागवत ने हिंदू समाज में एकजुटता की जरूरत पर जोर दिया था। इसी दौरान उन्होंने कहा था कि कुछ लोग कह सकते हैं कि शेर कभी साथ नहीं चलते, लेकिन यह भूलना नहीं चाहिए कि जंगली कुत्ते एकजुट होकर हमला कर सकते हैं और नुकसान पहुंचा सकते हैं।

हालांकि, अपने संबोधन में भागवत ने यह स्पष्ट नहीं किया था कि ‘शेर’ और ‘जंगली कुत्तों’ से उनका इशारा किन लोगों या समूहों की ओर था।

हिंदू समाज को एकजुट होने पर दिया था जोर

भागवत ने कहा था कि हिंदू समाज तभी आगे बढ़ेगा और खुशहाल होगा, जब वह एकजुट होगा। उन्होंने हिंदू समाज को गुलाम या दबा-कुचला समाज मानने से इनकार करते हुए कहा था कि हिंदू समाज के लोग हमेशा जरूरतमंदों की मदद करते रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा था कि हिंदुओं के बीच एक साथ आना ही एक बड़ी चुनौती है और हर काम में आध्यात्मिकता का समावेश होना चाहिए।

2018 वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस की क्या थी थीम?

दूसरे World Hindu Congress का आयोजन 1893 में शिकागो में स्वामी विवेकानंद के ऐतिहासिक भाषण के 125 वर्ष पूरे होने के अवसर पर किया गया था। इसका उद्देश्य दुनिया भर के हिंदुओं को एक मंच पर लाना और समाज से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम की थीम ‘Sumantrite Suvikrante’ थी, जिसका अर्थ सामूहिक रूप से विचार करना और साहस के साथ आगे बढ़ना था। सम्मेलन में अर्थव्यवस्था, शिक्षा, मीडिया, राजनीति, महिला भागीदारी, युवा और हिंदू संगठनों के बीच सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

इस कार्यक्रम में मोहन भागवत के अलावा दलाई लामा, श्री श्री रविशंकर समेत कई धार्मिक और सामाजिक नेता शामिल हुए थे। भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और अभिनेता अनुपम खेर ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया था।