राहुल गांधी के BJP-RSS वाले बयान पर FIR की मांग खारिज, बोला हाईकोर्ट- ‘सरकार की आलोचना अपराध नहीं’
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीजेपी और आरएसएस को लेकर दिए गए बयान पर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई थी। शुक्रवार को जस्टिस विक्रम डी. चौहान की सिंगल बेंच ने फैसला सुनाते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में सरकार की नीतियों की आलोचना करना न केवल स्वीकार्य है, बल्कि लोकतंत्र के लिए आवश्यक भी है।
कोर्ट ने क्या कहा?
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरकार की आलोचना करना या वैचारिक मतभेद रखना अपने आप में कोई अपराध नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी विचारधारा या नीति के खिलाफ संघर्ष की बात करता है, तो उसे देशद्रोह या बगावत भड़काने से नहीं जोड़ा जा सकता।
चंदौसी कोर्ट के आदेश को दी गई थी चुनौती
यह याचिका सिमरन गुप्ता की ओर से दाखिल की गई थी। याचिका में चंदौसी की अदालत के 7 नवंबर 2025 के आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल शिकायत को कमजोर बताते हुए खारिज कर दिया गया था।
बाद में मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा, जहां 9 अप्रैल को सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।
राहुल गांधी ने क्या कहा था?
दरअसल, जनवरी 2025 में दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय के उद्घाटन कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा था कि उनकी विचारधारा हजारों साल पुरानी है और वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की विचारधारा से लड़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा था कि बीजेपी और आरएसएस ने देश के संस्थानों पर कब्जा कर लिया है और अब उनकी लड़ाई भारतीय सरकार से भी है। इसी बयान को आधार बनाकर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की गई थी।