तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को भी परिवार पेंशन का हक, मंत्री जितेंद्र सिंह बोले- बदलती जरूरतों के अनुसार सुधर रहे नियम
पेंशन व्यवस्था को ज्यादा संवेदनशील और सुविधाजनक बनाने के लिए केंद्र सरकार लगातार नियमों में बदलाव कर रही है। केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को कहा कि समाज की बदलती जरूरतों के मुताबिक पेंशन नियमों और प्रक्रियाओं को लगातार अपडेट किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में जारी कई आदेशों के जरिए परिवार पेंशन से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं। इनमें तलाकशुदा और अलग रह रही बेटियों को परिवार पेंशन का लाभ देने का प्रावधान भी शामिल है। वहीं, महिला सरकारी कर्मचारियों को अब अपने पति के बजाय अपने बेटे या बेटी को परिवार पेंशन के लिए नामित करने की अधिक स्वतंत्रता दी गई है।
बुजुर्गों के लिए आसान हो रही व्यवस्था
जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की आबादी का बड़ा हिस्सा भले ही युवा है, लेकिन बुजुर्गों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सरकार का प्रयास है कि वरिष्ठ नागरिकों को पेंशन और दूसरी सेवाएं लेने में कम से कम परेशानी हो। साथ ही उनके अनुभव और क्षमता का भी बेहतर इस्तेमाल किया जा सके।
मौत के बाद परिवार को बढ़ी हुई पेंशन
सरकारी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक राहत देने के लिए बढ़ी हुई दर पर परिवार पेंशन का प्रावधान है। अंतिम वेतन के 50 प्रतिशत तक की दर से यह पेंशन 10 साल की अवधि तक दी जा सकती है।
इसके साथ ही बढ़ी हुई परिवार पेंशन के लिए पहले लागू 7 साल की न्यूनतम सेवा की शर्त को हटा दिया गया है। सरकार के मुताबिक, कम उम्र में कर्मचारी की मृत्यु होने पर परिवार को आर्थिक सहायता की सबसे ज्यादा जरूरत होती है।
डिजिटल सेवाओं से कम हुई परेशानी
पेंशन प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए फॉर्म और प्रक्रियाओं को सरल किया गया है। डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट और फेस ऑथेंटिकेशन जैसी सुविधाओं के जरिए पेंशनभोगियों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर लगाने और कागजी प्रक्रिया से राहत मिल रही है।
सरकार का कहना है कि पेंशन नियमों में सुधार का यह सिलसिला आगे भी जारी रहेगा, ताकि बदलती सामाजिक जरूरतों के हिसाब से पेंशन व्यवस्था को ज्यादा सुविधाजनक और लाभार्थी-केंद्रित बनाया जा सके।