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डोनाल्ड ट्रंप: हर मोड़ पर "अमेरिका फर्स्ट" वाले राष्ट्रपति

 

डोनाल्ड ट्रंप की यह सोच उनके दोनों राष्ट्रपति कार्यकाल की राजनीति को काफी हद तक दर्शाती है। व्यापार, विदेश नीति या घरेलू मुद्दे—हर क्षेत्र में उन्होंने खुद को पारंपरिक नेताओं से अलग अंदाज में पेश किया। समर्थक उन्हें अपने वादों पर अमल करने वाला नेता मानते हैं, जबकि आलोचक उनकी नीतियों और शैली को विवादास्पद बताते हैं। बावजूद इसके, अमेरिकी राजनीति में उनका प्रभाव लगातार चर्चा का विषय बना रहा।

1. हर मोड़ पर "डील मेकर" की सोच

राजनीति में आने से पहले ट्रंप एक रियल एस्टेट कारोबारी और बिजनेसमैन थे। यही वजह है कि उनकी कार्यशैली में भी "डील" और "बिजनेस" की झलक साफ दिखाई देती है।

टैक्स और अर्थव्यवस्था

2017 में ट्रंप प्रशासन ने कॉरपोरेट टैक्स की दर 35% से घटाकर 21% कर दी। सरकार का तर्क था कि इससे कंपनियां अमेरिका में निवेश करेंगी, रोजगार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

नियमों में ढील

ट्रंप प्रशासन ने कई सरकारी नियमों और नियामकीय प्रक्रियाओं में कमी की। खासकर तेल, गैस और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को कारोबार आसान बनाने के उद्देश्य से राहत दी गई।

चीन के साथ ट्रेड वॉर

ट्रंप ने चीन से आने वाले कई उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाए। उनका कहना था कि इससे अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की रक्षा होगी। उनकी "अमेरिका फर्स्ट" नीति का सबसे बड़ा उदाहरण यही व्यापारिक रणनीति मानी गई।

2. विदेश नीति: सीधे संवाद और सख्त संदेश

विदेश नीति में भी ट्रंप ने पारंपरिक अमेरिकी कूटनीति से अलग रास्ता अपनाया।

उत्तर कोरिया से बातचीत

ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से सीधे मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच बातचीत को कोरियाई प्रायद्वीप में तनाव कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना गया।

मध्य पूर्व में अब्राहम समझौता

ट्रंप प्रशासन के दौरान इज़रायल, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन के बीच अब्राहम समझौते हुए, जिन्हें मध्य पूर्व में रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना गया।

नाटो सहयोगियों पर दबाव

ट्रंप ने नाटो सदस्य देशों से रक्षा खर्च बढ़ाने की मांग की। उनका कहना था कि अमेरिका अकेले सुरक्षा का बोझ नहीं उठा सकता और सहयोगी देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए।

उनका संदेश स्पष्ट था—"अमेरिका के हित सर्वोपरि हैं।"

3. घरेलू मोर्चे पर चुनावी वादों पर जोर

ट्रंप के समर्थकों के अनुसार, उनकी सबसे बड़ी पहचान चुनावी वादों को पूरा करने की कोशिश रही।

इमिग्रेशन

मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने की योजना उनके प्रमुख चुनावी वादों में शामिल थी। इसका उद्देश्य अवैध प्रवासन को रोकना बताया गया।

सुप्रीम कोर्ट में नियुक्तियां

अपने कार्यकाल के दौरान ट्रंप ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में तीन न्यायाधीश नियुक्त किए। इससे अदालत की वैचारिक दिशा लंबे समय तक अधिक रूढ़िवादी मानी जाने लगी।

सोशल मीडिया का उपयोग

ट्रंप ने सोशल मीडिया, विशेष रूप से ट्विटर (अब X), का व्यापक उपयोग किया। इसके जरिए वे सीधे जनता तक अपनी बात पहुंचाते रहे और पारंपरिक मीडिया की भूमिका को चुनौती देते दिखे।

4. समर्थन और आलोचना—दोनों साथ

समर्थकों की राय

समर्थकों का मानना है कि ट्रंप ने राजनीतिक परंपराओं को चुनौती दी, स्पष्ट भाषा में अपनी बात रखी और अमेरिका के आर्थिक एवं रणनीतिक हितों को प्राथमिकता दी।

आलोचकों की राय

आलोचकों का कहना है कि उनकी कार्यशैली टकरावपूर्ण रही, कई सहयोगी देशों के साथ संबंधों में तनाव बढ़ा और उनकी सार्वजनिक भाषा अक्सर विवादों का कारण बनी।

हालांकि, दोनों पक्ष इस बात से सहमत दिखते हैं कि अमेरिकी राजनीति पर ट्रंप का प्रभाव बेहद महत्वपूर्ण रहा है।

निष्कर्ष

डोनाल्ड ट्रंप को एक पारंपरिक राष्ट्रपति की बजाय एक ऐसे नेता के रूप में देखा जाता है, जिन्होंने स्थापित राजनीतिक व्यवस्था को चुनौती देने का प्रयास किया।

उनकी राजनीति की प्रमुख विशेषताएं रही—

  • बिजनेस आधारित सोच – नीतियों को आर्थिक लाभ और लागत के नजरिए से देखना।

  • सीधी और स्पष्ट शैली – भाषणों, रैलियों और सोशल मीडिया के जरिए बिना लाग-लपेट अपनी बात रखना।

  • "अमेरिका फर्स्ट" नीति – व्यापार, विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर अमेरिकी हितों को प्राथमिकता देना।

चाहे कोई उनके विचारों से सहमत हो या असहमत, 2016 से 2026 के बीच अमेरिकी राजनीति की लगभग हर बड़ी बहस में डोनाल्ड ट्रंप केंद्र में रहे। यही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक पहचान मानी जाती है।