DUSU चुनाव में हुड़दंग पर हाईकोर्ट सख्त, कहा- आप लोगों ने अपने तौर-तरीके नहीं सुधारे
DUSU Election 2026: दिल्ली हाईकोर्ट ने छात्रसंघ चुनाव में कथित हुड़दंग, बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों और शिक्षक से मारपीट को लेकर पुलिस व DU प्रशासन को फटकार लगाई। कोर्ट को 998 चालान, 30 गाड़ियां जब्त, 6 FIR और 4 गिरफ्तारियों की जानकारी दी गई। छात्र संगठनों पर सामूहिक हर्जाने की चेतावनी भी दी गई।
DUSU Election 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव के दौरान कथित हिंसा, हुड़दंग और चुनावी नियमों के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों के काफिले, उम्मीदवारों की तस्वीरों वाली कारों और शिक्षकों पर कथित हमले को लेकर सवाल उठाए। साथ ही छात्र संगठनों को चेतावनी दी कि चुनावी नियमों के उल्लंघन पर सामूहिक हर्जाना लगाया जा सकता है।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि छात्र संगठनों को अपने तौर-तरीके सुधारने होंगे। अदालत ने यह भी पूछा कि जब नियमों का उल्लंघन खुले तौर पर दिखाई दे रहा था, तब पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं की।
10-20 गाड़ियों के काफिले पर कोर्ट ने उठाए सवाल
दिल्ली हाईकोर्ट के सामने पेश की गई तस्वीरों में 10 से 20 गाड़ियों के काफिले दिखाई दिए। कुछ तस्वीरों में लोग वाहनों की बोनट और छतों पर खड़े नजर आए। अदालत ने इस तरह के काफिलों पर गंभीर चिंता जताई।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे काफिलों से उम्मीदवारों की दहशत और दबदबे का माहौल बनता है। अदालत ने पुलिस से पूछा कि इस तरह के मामलों में रोकथाम और कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए।
खास तौर पर बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियों को लेकर अदालत ने सवाल किया कि जब यह उल्लंघन पहली नजर में ही दिखाई दे रहा था, तो ऐसी गाड़ियां दिल्ली की सड़कों पर चलने कैसे दी गईं।
998 चालान, 30 गाड़ियां जब्त
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि अब तक 998 चालान किए जा चुके हैं और 30 गाड़ियां जब्त की गई हैं।
सुनवाई में बिना ड्राइविंग लाइसेंस वाहन चलाने के मामलों से जुड़े 547 चालान और 49 वाहनों को जब्त किए जाने का भी उल्लेख हुआ। पुलिस की कार्रवाई को लेकर कोर्ट ने यह जानने की कोशिश की कि चुनावी अभियान के दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पाई।
ASG ने यह भी बताया कि कुछ और वाहनों को जब्त किया गया है। इनमें कथित तौर पर 10 साल से ज्यादा पुराने वाहन और बिना नंबर प्लेट वाली गाड़ियां भी शामिल हैं।
6 FIR दर्ज, 4 गिरफ्तार और एक छात्र निष्कासित
अदालत को बताया गया कि मामले में अब तक 6 FIR दर्ज की गई हैं। पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक छात्र को विश्वविद्यालय की ओर से निष्कासित किया गया है।
तस्वीरों और वीडियो में दिखाई देने वाले कुछ अन्य लोगों को भी नोटिस जारी किए जा रहे हैं। अदालत ने पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से पूछा कि जिन लोगों की पहचान सामने आ रही है, उनके खिलाफ कार्रवाई किस स्तर तक पहुंची है।
शिक्षक से मारपीट पर भी कोर्ट ने मांगा जवाब
DUSU चुनाव के दौरान एक शिक्षक के साथ कथित मारपीट का मामला भी सुनवाई में उठा। कोर्ट ने पूछा कि शिक्षक पर हमला करने वाला व्यक्ति छात्र था या बाहरी।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि आरोपी छात्र था और उसे तीन अन्य लोगों के साथ गिरफ्तार किया गया है।
इस पर कोर्ट ने बार-बार 'बाहरी लोगों' का हवाला दिए जाने पर सवाल उठाया और पूछा कि अगर आरोपी छात्र है तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसके खिलाफ क्या कार्रवाई की है। दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से बताया गया कि संबंधित लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
ABVP, NSUI और ASPA पर सामूहिक हर्जाने की चेतावनी
अदालत ने चुनावी नियमों के उल्लंघन को लेकर छात्र संगठनों को भी चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा कि ABVP, NSUI और ASPA जैसे छात्र संगठनों पर चुनाव से जुड़े उल्लंघनों के लिए सामूहिक हर्जाना लगाया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान NSUI की ओर से कहा गया कि उम्मीदवारों से अंडरटेकिंग ली गई है और संगठन ने पैसे या बाहुबल के इस्तेमाल से इनकार किया है।
हालांकि कोर्ट ने केवल माफी या आश्वासन को पर्याप्त मानने से इनकार किया और सवाल किया कि क्या छात्र संगठनों ने अपने आचरण में वास्तव में कोई बदलाव किया है।
चुनाव के दिन पर्चे बांटने पर भी सवाल
सुनवाई में एक उम्मीदवार की ओर से मतदान के दिन पर्चे बांटने वाली तस्वीरों का भी जिक्र हुआ। कोर्ट ने छात्र संगठनों के वकीलों को पुलिस और विश्वविद्यालय की ओर से तैयार स्टेटस रिपोर्ट उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
इससे पहले हाईकोर्ट ने चुनाव प्रचार के दौरान हिंसा और नियमों के उल्लंघन को लेकर चेतावनी दी थी कि अगर अधिकारियों की कार्रवाई से अदालत संतुष्ट नहीं हुई तो वोटों की गिनती और नतीजों की घोषणा रोकने जैसे कड़े आदेश भी दिए जा सकते हैं।
‘छात्र संघ लोकतंत्र की नर्सरी हैं’
हाईकोर्ट ने कहा कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र संघों को लोकतंत्र की ‘नर्सरी’ माना जाता है। इसलिए छात्र चुनावों की प्रक्रिया को मजबूत करना जरूरी है।
अदालत ने साफ किया कि छात्र राजनीति के नाम पर हिंसा, दबदबा, नियमों की अनदेखी और कानून-व्यवस्था की स्थिति को स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पुलिस और दिल्ली विश्वविद्यालय से चुनाव संबंधी उल्लंघनों पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। फिलहाल अदालत की सख्ती का केंद्र चुनाव प्रचार के दौरान सामने आए कथित हिंसक घटनाक्रम और नियमों के उल्लंघन पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।