उत्तरकाशी में फिर कांपी धरती, 4 दिन में दूसरी बार महसूस हुए भूकंप के झटके
उत्तरकाशी में चार दिन के भीतर दूसरी बार भूकंप के झटकों से लोग सहम गए। शनिवार देर शाम जिला मुख्यालय समेत जनपद के कई इलाकों में धरती हिलने से अफरा-तफरी मच गई। दहशत में लोग अपने घरों और दुकानों से बाहर निकल आए। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 4.2 दर्ज की गई। जिला आपदा प्रबंधन केंद्र के अनुसार, इसका केंद्र बसुंगा के जंगलों में जमीन से करीब 11 किलोमीटर नीचे था।
लगातार दूसरी बार भूकंप के झटके महसूस होने से स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले मंगलवार रात करीब 10:23 बजे भी जनपद में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। उस समय भूकंप की तीव्रता 4.9 दर्ज की गई थी और इसका केंद्र चमोली जनपद में बताया गया था। चार दिन के भीतर दो बार धरती हिलने से लोग किसी अनहोनी की आशंका को लेकर चिंतित हैं।
उत्तरकाशी भूकंप की दृष्टि से बेहद संवेदनशील क्षेत्र माना जाता है। जनपद के क्षेत्र भूकंपीय जोन चार और पांच में आते हैं। यहां 20 अक्टूबर 1991 को आए विनाशकारी भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। उस रात 6.1 तीव्रता के भूकंप से बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ था। इस त्रासदी की यादें आज भी स्थानीय लोगों के जेहन में ताजा हैं।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 1991 के भूकंप से उत्तरकाशी के 1,294 गांव प्रभावित हुए थे। इस आपदा में 700 से अधिक लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच हजार से ज्यादा लोग घायल हुए थे। इसके बाद भी जनपद में समय-समय पर भूकंप के झटके महसूस किए जाते रहे हैं।
शनिवार को एक बार फिर धरती हिलने से लोगों को उस भयावह त्रासदी की याद आ गई। हालांकि, भूकंप के झटके महसूस होने मात्र से किसी बड़े भूकंप की आशंका की पुष्टि नहीं होती। ऐसे में लोगों को घबराने के बजाय सतर्क रहने और आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की जरूरत है।