एनकाउंटर की धमकी मिली… रिहाई के बाद छलका राज सिंह का दर्द, बंगाल पुलिस पर गंभीर आरोप
पश्चिम बंगाल के चर्चित शुभेंदु अधिकारी PA मर्डर केस में बड़ा मोड़ आया है। गलत पहचान में गिरफ्तार किए गए बलिया निवासी राज सिंह को CBI जांच के बाद कोर्ट ने बरी कर दिया। रिहाई के बाद राज सिंह ने बंगाल पुलिस पर धमकी और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए।
पश्चिम बंगाल के चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में उस वक्त बड़ा मोड़ आ गया, जब गलत पहचान के आधार पर गिरफ्तार किए गए बलिया निवासी राज सिंह को अदालत ने बरी कर दिया। CBI जांच में खुलासा हुआ कि बंगाल पुलिस ने नाम और पहचान की समानता के कारण एक बेगुनाह व्यक्ति को आरोपी बना दिया था। कोर्ट में CBI की रिपोर्ट सामने आने के बाद बारासात अदालत ने राज सिंह को राहत दे दी।
इस फैसले के बाद अब बंगाल पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं, रिहा होकर घर पहुंचे राज सिंह ने पुलिस पर मानसिक प्रताड़ना, धमकी और फर्जी तरीके से फंसाने के आरोप लगाए हैं।
रथ हत्याकांड में आया बड़ा मोड़
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या के मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही थी। इसी दौरान अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के प्रदेश महासचिव राज सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया गया था।
बारासात कोर्ट ने पहले तीनों आरोपियों को 24 मई तक पुलिस हिरासत में भेजा था। लेकिन जांच आगे बढ़ने पर मामला पूरी तरह बदल गया। मुजफ्फरपुर से गिरफ्तार किए गए राजकुमार सिंह राज से पूछताछ के बाद CBI को अहम सुराग मिले। इसके बाद जांच एजेंसी ने कोर्ट को स्पष्ट बताया कि बंगाल पुलिस ने गलत पहचान के आधार पर बेगुनाह व्यक्ति को आरोपी बना दिया था।
CBI रिपोर्ट के बाद कोर्ट ने दी राहत
CBI की ओर से अदालत में पेश रिपोर्ट में कहा गया कि नाम और पहचान में भ्रम के चलते गलत व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अदालत ने राज सिंह को बरी कर दिया। रिहाई के बाद जब राज सिंह अपने गृह जनपद बलिया पहुंचे तो परिवार में खुशी का माहौल दिखा। परिजन भावुक हो उठे और पूरे गांव में इस मामले की चर्चा शुरू हो गई।
झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे — राज सिंह का बड़ा आरोप
रिहा होने के बाद राज सिंह ने मीडिया से बातचीत में कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि बंगाल पुलिस और अयोध्या एसओजी की कार्रवाई ने उन्हें मानसिक रूप से तोड़ दिया था।
राज सिंह के मुताबिक, पूछताछ के दौरान उन्हें डराया-धमकाया गया। यहां तक कि एनकाउंटर की धमकी भी दी गई। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों ने पिस्टल दिखाते हुए कहा था कि “अगर झूठ बोलोगे तो गोली मार देंगे।” बावजूद इसके उन्होंने लगातार खुद को निर्दोष बताया।
CBI नहीं होती तो शायद जिंदा नहीं लौटता
राज सिंह ने अपनी रिहाई का पूरा श्रेय CBI को दिया। उन्होंने कहा कि अगर CBI निष्पक्ष जांच नहीं करती तो शायद बंगाल पुलिस उनका एनकाउंटर कर देती।
उन्होंने यह भी कहा कि CBI ने बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष तरीके से जांच की और कस्टडी के दौरान उनके साथ किसी प्रकार की बदसलूकी नहीं हुई।
राज सिंह ने मीडिया का भी धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि परिजनों द्वारा उपलब्ध कराए गए CCTV फुटेज को मीडिया ने प्रमुखता से दिखाया, जिसके बाद CBI की टीम बलिया पहुंची और पूरे मामले की दोबारा जांच हुई।
परिवार बोला- सच्चाई की जीत हुई
घर लौटने के बाद राज सिंह और उनकी मां जामवंती देवी दोनों ने हाथ जोड़कर CBI और मीडिया का आभार जताया।
राज सिंह की मां ने कहा कि परिवार कई दिनों से भय और तनाव में था, लेकिन अब न्याय मिलने से राहत मिली है।
संगठन पर भी जताई नाराजगी
राज सिंह ने यह भी कहा कि मुश्किल वक्त में संगठन के लोग उनके साथ खड़े नहीं हुए। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस संगठन के लिए वे काम करते थे, उसके लोगों ने परिवार का हाल तक नहीं पूछा। उन्होंने कहा कि संकट के समय केवल परिवार ही साथ देता है।
योगी सरकार से जांच की मांग
राज सिंह ने अयोध्या एसओजी की भूमिका पर भी सवाल उठाए और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मामले की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि पुलिस की एक गलती ने न सिर्फ उनकी बल्कि पूरे परिवार की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया।
बेगुनाह हों तो CBI जांच की मांग करें
मामले के अंत में राज सिंह ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि अगर कोई निर्दोष है और उसे गलत तरीके से फंसाया जा रहा है तो उसे सीधे CBI जांच की मांग करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि CBI ने साबित कर दिया कि निष्पक्ष जांच अभी भी संभव है और सच आखिरकार सामने आ ही जाता है।