पूर्णिमा से भी ज्यादा चमकदार! आज रात दिखेगा 2026 का पहला वुल्फ सुपरमून
नए साल 2026 की शुरुआत प्रकृति एक खास तोहफे के साथ करने जा रही है। 3 जनवरी की रात आसमान में वुल्फ सुपरमून (Wolf Supermoon) दिखाई देगा, जो पूरे आकाश को अपनी चमक से रोशन कर देगा। यह साल का पहला पूर्ण चंद्रमा होगा और सामान्य पूर्णिमा की तुलना में थोड़ा बड़ा और अधिक चमकीला नजर आएगा। यह चंद्रमा मिथुन राशि के तारामंडल में सूर्य के ठीक विपरीत दिशा में उदय करेगा, जिससे इसका दृश्य और भी मनमोहक बन जाएगा।
क्या होता है सुपरमून
सुपरमून तब बनता है जब पूर्णिमा का चांद धरती के सबसे नजदीकी बिंदु, जिसे पेरिजी कहा जाता है, के आसपास होता है। चंद्रमा की कक्षा पूरी तरह गोल न होकर अंडाकार होती है, इसी कारण उसकी धरती से दूरी घटती-बढ़ती रहती है। जब चांद धरती के करीब होता है तो वह आकार में बड़ा और रोशनी में ज्यादा तेज दिखाई देता है।
3 जनवरी को चंद्रमा धरती से लगभग 3 लाख 62 हजार किलोमीटर की दूरी पर रहेगा। इस वजह से यह सामान्य पूर्णिमा की तुलना में करीब 6 से 14 प्रतिशत बड़ा और 13 से 30 प्रतिशत अधिक चमकीला दिखाई दे सकता है। भले ही आकार का अंतर आंखों से बहुत ज्यादा न लगे, लेकिन इसकी चमक साफ महसूस की जा सकेगी।
वुल्फ सुपरमून क्यों कहा जाता है
जनवरी महीने की पूर्णिमा को पारंपरिक रूप से “वुल्फ मून” कहा जाता है। इसका संबंध उत्तरी गोलार्ध की प्राचीन लोककथाओं से है, जहां सर्दियों की लंबी और ठंडी रातों में भेड़ियों की आवाजें सुनाई देने की कहानियां प्रचलित थीं। समय के साथ यह नाम एक सांस्कृतिक पहचान बन गया। इस बार का वुल्फ मून इसलिए भी खास है क्योंकि यह सुपरमून है और इसी दौरान धरती सूर्य के अपेक्षाकृत करीब होती है। इससे चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की रोशनी और बढ़ जाती है, जो इसे 2026 के सबसे चमकीले चंद्र दृश्यों में शामिल करता है।
भारत में कब दिखेगा यह नज़ारा
भारत में वुल्फ सुपरमून 3 जनवरी की शाम सूर्यास्त के तुरंत बाद दिखाई देगा। अनुमान है कि शाम करीब 5:45 से 6:00 बजे के बीच चंद्रमा पूर्वी क्षितिज पर उगता हुआ नजर आएगा। क्षितिज के पास होने के कारण चांद हल्का पीला या नारंगी रंग का दिखाई दे सकता है, जो इसकी खूबसूरती को और बढ़ा देगा। यह चंद्रमा पूरी रात आकाश में रहेगा और सुबह होते-होते पश्चिम दिशा में अस्त हो जाएगा। इस दौरान चंद्रमा के पास चमकता हुआ बृहस्पति (ज्यूपिटर) ग्रह भी दिखाई दे सकता है, जो इस खगोलीय दृश्य को और खास बना देगा।
देखने के लिए नहीं चाहिए कोई खास उपकरण
इस अद्भुत खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की जरूरत नहीं है। इसे नंगी आंखों से आसानी से देखा जा सकता है। हालांकि, अगर आपके पास कैमरा, दूरबीन या टेलीस्कोप है तो आप इसकी शानदार तस्वीरें भी कैद कर सकते हैं। साफ और खुले आसमान में यह नज़ारा और भी ज्यादा प्रभावशाली दिखाई देगा।