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पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये की कटौती, लेकिन क्या सस्ता होगा तेल? जानिए पूरी सच्चाई

भारत सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपये तक की कटौती की है। हालांकि, तेल कंपनियों के फैसले पर निर्भर करेगा कि इसका फायदा आम जनता को मिलेगा या नहीं। अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के चलते कीमतों में तुरंत राहत की संभावना कम मानी जा रही है।

 

Petrol Diesel Excise Duty Cut : केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी में बड़ी कटौती का फैसला किया है। इस फैसले के तहत पेट्रोल पर ड्यूटी 13 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 3 रुपये और डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर से घटाकर शून्य कर दी गई है।

कटौती के बाद भी कीमतों में राहत तय नहीं

हालांकि, एक्साइज ड्यूटी घटने के बावजूद आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तुरंत राहत मिलेगी या नहीं, यह अभी स्पष्ट नहीं है। भारत में खुदरा ईंधन कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करती, बल्कि तेल मार्केटिंग कंपनियां अपने स्तर पर दाम तय करती हैं।

तेल कंपनियां तय करती हैं रिटेल कीमतें

Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation और Hindustan Petroleum Corporation जैसी कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमत, डॉलर-रुपया विनिमय दर और अपने मार्जिन को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल-डीजल के दाम तय करती हैं।


तुरंत राहत की संभावना कम

विशेषज्ञों के मुताबिक, ड्यूटी में कटौती का पूरा फायदा आम लोगों तक तुरंत पहुंचने की संभावना कम है। हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के कारण तेल कंपनियां पहले से ही दबाव में हैं और नुकसान झेल रही हैं।

पश्चिम एशिया तनाव का असर

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। इसी वजह से तेल कंपनियां कीमतें घटाने के बजाय पहले अपने घाटे की भरपाई करने पर ध्यान दे सकती हैं।

कच्चे तेल की कीमत 70 से 122 डॉलर तक पहुंची

पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri के अनुसार, पिछले एक महीने में कच्चे तेल की कीमतें करीब 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। इसका असर वैश्विक और घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ा है।

सरकार का कदम क्या संकेत देता है

ड्यूटी में कटौती का यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब तेल कंपनियों पर लागत का दबाव बढ़ा हुआ है। इससे संकेत मिलता है कि सरकार कीमतों को संतुलित रखने और कंपनियों को राहत देने की कोशिश कर रही है।