गोदाम में लगी आग, बीमा कंपनी ने खारिज किया 8 करोड़ का क्लेम; अब कंज्यूमर कमीशन ने सुनाया बड़ा फैसला
Victorinox India Insurance Claim: बीमा क्लेम खारिज करने के एक मामले में मुंबई के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने बड़ा फैसला सुनाया है। आयोग ने New India Assurance Company को Victorinox India Pvt Ltd को 8.06 करोड़ रुपये से अधिक की रकम देने का आदेश दिया है। मामला 2019 में कंपनी के कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में लगी भीषण आग से हुए नुकसान और बीमा क्लेम से जुड़ा है। आयोग ने माना कि बीमा कंपनी ने तकनीकी आधार पर क्लेम को अनुचित तरीके से खारिज किया था।
2019 में गोदाम में लगी थी भीषण आग
मामला 16 फरवरी 2019 का है। Victorinox India के कस्टम बॉन्डेड वेयरहाउस में अचानक आग लग गई थी। यह एक सुरक्षित और सरकार द्वारा नियंत्रित स्टोरेज सुविधा थी, जहां आयातित सामान रखा जाता था।
आग लगने के बाद गोदाम में मौजूद कर्मचारियों ने उसे बुझाने की तत्काल कोशिश की। स्थिति बिगड़ने पर जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) की फायर सर्विस की मदद ली गई। इसके बावजूद आग की वजह से गोदाम में रखा सामान बड़े पैमाने पर क्षतिग्रस्त हो गया।
Victorinox India, स्विट्जरलैंड की कंपनी Victorinox AG की पूर्ण स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी है। कंपनी भारत में ट्रैवल बैग, चाकू, लग्जरी घड़ियां, कटलरी और अन्य उत्पादों के आयात, निर्यात और वितरण का काम करती है।
सर्वेयर ने 8.06 करोड़ रुपये का नुकसान आंका
Victorinox India ने इस नुकसान के लिए New India Assurance के पास बीमा क्लेम किया। कंपनी के पास Standard Fire & Special Perils Policy थी।
बीमा कंपनी की ओर से नियुक्त सर्वेयर ने मौके का निरीक्षण किया और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद कुल शुद्ध नुकसान 8,06,49,573 रुपये आंका। खास बात यह रही कि नुकसान के इस आकलन को दोनों पक्षों की ओर से विवादित नहीं किया गया।
2021 में बीमा कंपनी ने क्लेम कर दिया था खारिज
इसके बावजूद New India Assurance ने जनवरी 2021 में Victorinox India का क्लेम खारिज कर दिया। बीमा कंपनी ने पॉलिसी की कुछ शर्तों के उल्लंघन का हवाला दिया था।
कंपनी का कहना था कि कुछ आंतरिक समझौते और इनवॉयस समेत जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए गए थे। इसी आधार पर क्लेम को अस्वीकार किया गया था।
मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा तो वहां ई-मेल रिकॉर्ड और दूसरे दस्तावेजों की भी जांच की गई। आयोग ने पाया कि Victorinox India ने सर्वेयर की ओर से मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कई बार प्रयास किए थे। कंपनी ने सर्वेयर के सवालों का जवाब देने के लिए वर्चुअल बैठकों में भी हिस्सा लिया था।
कंज्यूमर कमीशन ने क्लेम खारिज करने को बताया अनुचित
जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (South Mumbai) ने 2 सितंबर को दिए अपने आदेश में कहा कि बीमा कंपनी ने क्लेम को केवल तकनीकी और प्रक्रियात्मक आधार पर खारिज किया।
आयोग के मुताबिक जब बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर नुकसान का आकलन कर चुका था और आग से हुए नुकसान को लेकर दोनों पक्षों के बीच कोई वास्तविक विवाद नहीं था, तब केवल प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर क्लेम खारिज करना उचित नहीं था।
आयोग ने माना कि इस तरह क्लेम को खारिज करना कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं है। आयोग ने इसे अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना।
बीमा कंपनी को 9 फीसदी ब्याज भी देना होगा
कंज्यूमर कमीशन ने New India Assurance को 8,06,49,573 रुपये का बीमा क्लेम भुगतान करने का आदेश दिया है। इसके अलावा इस रकम पर शिकायत दर्ज किए जाने की तारीख से 9 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा।
आयोग ने कंपनी को मानसिक परेशानी के लिए 50 हजार रुपये और मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में अलग से 50 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया है।
आदेश के मुताबिक बीमा कंपनी को यह भुगतान 45 दिनों के भीतर करना होगा।
सात साल बाद आया फैसला
इस मामले में आग लगने की घटना को करीब सात साल हो चुके हैं। लंबे समय तक चले विवाद के बाद अब उपभोक्ता आयोग ने Victorinox India के पक्ष में फैसला सुनाया है।
इस फैसले का एक अहम पहलू यह है कि आयोग ने केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधार पर वास्तविक नुकसान से जुड़े बीमा क्लेम को खारिज करने के तरीके पर सवाल उठाया है। मामले में सर्वेयर द्वारा नुकसान का आकलन किए जाने के बावजूद क्लेम खारिज किया गया था।
क्या है पूरे मामले का मतलब?
इस मामले में आयोग का फैसला यह संकेत देता है कि बीमा पॉलिसी की शर्तों का पालन जरूरी है, लेकिन केवल तकनीकी या प्रक्रियात्मक आधार को लेकर किसी वास्तविक नुकसान के क्लेम को खारिज करने से पहले पूरे मामले और उपलब्ध दस्तावेजों को देखना भी जरूरी है।
Victorinox India के मामले में आयोग ने माना कि बीमा कंपनी द्वारा नियुक्त सर्वेयर नुकसान का आकलन कर चुका था और कंपनी ने मांगे गए दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए प्रयास भी किए थे। ऐसे में केवल प्रक्रियात्मक आधार पर 8.06 करोड़ रुपये के क्लेम को खारिज करना उचित नहीं था।