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ATF की मार से उड़ानें कम: एयर इंडिया ने जून-जुलाई में इंटरनेशनल उड़ानों में कटौती का लिया फैसला

एटीएफ कीमतों में तेज बढ़ोतरी और एयरस्पेस प्रतिबंधों के चलते एयर इंडिया ने जून-जुलाई में अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती का फैसला लिया है। कई रूट घाटे में पहुंच गए हैं। बढ़ते खर्च और मिडिल ईस्ट तनाव के बीच एयरलाइन को संचालन में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

 

Air India International Flight Cuts: एयर इंडिया ने जून और जुलाई के दौरान अपनी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कटौती करने का फैसला लिया है। बढ़ती परिचालन लागत, महंगे एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) और एयरस्पेस प्रतिबंधों ने कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स को घाटे में पहुंचा दिया है, जिससे यह कदम उठाना पड़ा।

शेड्यूल घटाना मजबूरी

एयरलाइन के सीईओ और प्रबंध निदेशक कैंपबेल विल्सन ने आंतरिक संदेश में कर्मचारियों को बताया कि मौजूदा हालात में जून और जुलाई के लिए उड़ानों का शेड्यूल कम करना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि अप्रैल और मई में भी कुछ उड़ानों में कटौती की जा चुकी है।

ईंधन की लागत ने बढ़ाया दबाव

एविएशन इंडस्ट्री के अनुसार, एयरलाइन की कुल लागत में ईंधन का हिस्सा आमतौर पर 30-40% होता है, लेकिन हाल के महीनों में यह बढ़कर 55-60% तक पहुंच गया है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल आया है, जिसने एयरलाइनों की लागत संरचना को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है।

एयरस्पेस प्रतिबंध से बढ़ा रूट और खर्च

पश्चिम एशिया में संघर्ष के चलते कई देशों के एयरस्पेस प्रतिबंधित हो गए हैं। इससे एयर इंडिया को कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और ऑपरेशनल लागत दोनों बढ़ गई हैं।

एविएशन सेक्टर ‘अत्यधिक दबाव’ में

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस ने नागरिक उड्डयन मंत्रालय को पत्र लिखकर बताया है कि एटीएफ कीमतों में तेज बढ़ोतरी के कारण पूरा एविएशन सेक्टर “अत्यधिक दबाव” में है। संगठन ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग भी की है।

घाटे में पहुंचे कई अंतरराष्ट्रीय रूट

महंगे ईंधन, कमजोर मुद्रा विनिमय दर और सीमित एयरस्पेस के कारण कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स अब लाभदायक नहीं रह गए हैं। यही वजह है कि एयर इंडिया को अपने नेटवर्क में कटौती करनी पड़ रही है।

डोमेस्टिक ऑपरेशन भी प्रभावित, लेकिन राहत भी

हालांकि घरेलू उड़ानों की लाभप्रदता भी प्रभावित हुई है, लेकिन सरकारी हस्तक्षेप के चलते इसका असर कुछ हद तक कम रहा है।

कर्मचारियों से एकजुटता की अपील

कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों से इस चुनौतीपूर्ण दौर में सहयोग बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मध्य पूर्व की स्थिति जल्द सामान्य होगी और प्रमुख मार्ग जैसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुलेंगे।

22,000 करोड़ से ज्यादा का अनुमानित नुकसान

एयर इंडिया समूह को वित्त वर्ष 2025-26 में 22,000 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान होने का अनुमान है। विल्सन ने यह भी संकेत दिया है कि वे इस साल के अंत तक पद छोड़ सकते हैं, जबकि कंपनी भविष्य में हालात सुधरने पर सामान्य संचालन बहाल करने की योजना बना रही है।