नए वोटर बनवाने वालों के लिए जरूरी खबर! Form 6 में बदलाव पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया?
Form 6 विवाद पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि मूल फॉर्म में कोई बदलाव नहीं किया गया था। आयोग ने माना कि ऑनलाइन प्रक्रिया में SIR घोषणा दिखाने के तरीके से भ्रम हो सकता था। 21 अक्टूबर 2026 से दोनों को अलग किया गया। जानें नए मतदाताओं पर इसका क्या असर होगा।
नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव के विवाद पर चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखा है। आयोग ने कहा कि Form 6 में कोई संशोधन नहीं किया गया था, बल्कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान इसके साथ एक अलग घोषणा-पत्र जोड़ा गया था। हालांकि, आयोग ने माना कि ऑनलाइन पोर्टल पर इसे दिखाने के तरीके से फॉर्म में बदलाव होने का भ्रम पैदा हो सकता था। इसी वजह से 21 अक्टूबर 2026 से ऑनलाइन आवेदन और SIR घोषणा को अलग-अलग कर दिया गया।
Form 6 और SIR घोषणा को अलग क्यों किया गया?
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में कहा कि Form 6 में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है। यह फॉर्म मतदाता पंजीकरण नियम, 1960 के तहत निर्धारित है। आयोग के मुताबिक, SIR के दौरान मांगी गई अतिरिक्त घोषणा को मूल फॉर्म में शामिल नहीं किया गया था, बल्कि उसे एक अलग दस्तावेज के रूप में रखा गया था।
आयोग ने बताया कि ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में Form 6 और घोषणा को एक साथ इसलिए दिखाया गया था, ताकि आवेदक एक ही बार पासवर्ड (OTP) और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकें। लेकिन इस व्यवस्था से ऐसा लग सकता था कि मूल फॉर्म में बदलाव किया गया है। इसे स्पष्ट करने के लिए 21 अक्टूबर से ऑनलाइन प्रक्रिया में दोनों को अलग-अलग हिस्सों में रखा गया।
SIR घोषणा में क्या जानकारी मांगी जा रही थी?
SIR के दौरान नए मतदाताओं से एक अतिरिक्त घोषणा भरवाई जा रही थी। इसमें आवेदक को बताना होता था कि उसका अपना नाम या उसके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम पहले की गहन पुनरीक्षण वाली मतदाता सूची में दर्ज था या नहीं।
इस व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। आलोचकों का कहना था कि पुराने मतदाता रिकॉर्ड से परिवार का संबंध बताने की शर्त पहली बार वोटर बनने वाले लोगों के लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा कर सकती है, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके नाम पुरानी मतदाता सूचियों में दर्ज नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उठाया था सवाल
Form 6 से जुड़ा मुद्दा 5 अक्टूबर को भी सुप्रीम कोर्ट में उठा था। उस समय भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने स्पष्ट किया था कि अदालत ने Form 6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। यह टिप्पणी उस दावे के बाद आई थी, जिसमें चुनाव आयोग ने 26 सितंबर के अपने बयान में कहा था कि SIR से जुड़ी घोषणा को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी मिली है।
अदालत ने उस समय आयोग के रिकॉर्ड की जांच करने की बात कही थी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बदलाव किसके निर्देश पर किए गए थे।
जहां SIR पूरा, वहां ऑनलाइन Form 6 से हटाई गई घोषणा
चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ऑनलाइन Form 6 से अतिरिक्त SIR घोषणा हटा दी है, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि, जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभी जारी है, वहां यह घोषणा लागू है।
ज्ञानेश कुमार के कामकाज से जुड़ी याचिका पर दाखिल हुआ हलफनामा
चुनाव आयोग का यह हलफनामा राकेश कुमार सिंह की याचिका के जवाब में दाखिल किया गया है। याचिका में Form 6 में कथित बदलाव और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज को लेकर सवाल उठाए गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य अधिकारियों को नोटिस जारी किया था।
इसी हलफनामे में आयोग ने SIR से जुड़े फैसले एकतरफा लिए जाने के आरोपों को भी खारिज किया। आयोग के अनुसार, 24 जून 2025, 27 अक्टूबर 2025 और 14 मई 2026 को जारी किए गए तीनों SIR आदेश सर्वसम्मति से लिए गए थे।