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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस से इस्तीफे का किया ऐलान, बोले- मेरी वजह से पार्टी के संघर्ष में...
 

 

उत्तराखंड। उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कांग्रेस के दो संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा की है। शुक्रवार को उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के घर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई थी। इसके बाद देर रात हरीश रावत ने इंटरनेट मीडिया पर एक पोस्ट साझा कर अपने इस्तीफे की जानकारी दी।

हरीश रावत ने बताया कि वह उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के सदस्य और कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि वह इन दोनों पदों से हटना चाहते हैं, ताकि पार्टी के भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष में उनकी वजह से कोई कमजोरी न आए।

ईडी की कार्रवाई पर क्या बोले हरीश रावत?

अपनी पोस्ट में हरीश रावत ने कहा कि मीडिया में देहरादून में उनके पूर्व ओएसडी चंदन सिंह जीना के पास भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरें सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि इन तथ्यों का खुलासा आने वाले समय में होगा। रावत ने स्वीकार किया कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने सरकार तथा पार्टी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली थीं।

हरीश रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ के आरोप सही हैं और उनके प्रमाण सामने आते हैं, तो वह ऐसे कृत्य के लिए लज्जित होंगे। हालांकि, उन्होंने कहा कि उन्हें इन आरोपों पर विश्वास नहीं है।

चुनावी माहौल का भी किया जिक्र

हरीश रावत ने अपनी पोस्ट में आगामी विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तराखंड के चुनाव में बड़े राजनीतिक हित जुड़े हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर के बजाय उनके एक सहयोगी के घर पर कार्रवाई कर एक खास नैरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे समय में उनके किसी भी कृत्य से पार्टी के संघर्ष को नुकसान न पहुंचे, इसलिए उन्होंने संगठनात्मक पदों से हटने का निर्णय लिया है।

भर्ती प्रक्रिया और पूर्व सरकार के फैसलों पर सफाई

हरीश रावत ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के गठन और भर्ती प्रक्रिया को लेकर भी अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि आयोग का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उनके अनुसार, उनके लगभग तीन वर्ष के कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं।

उन्होंने कहा कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष की नियुक्ति उनके पिछले सेवा रिकॉर्ड के आधार पर की गई थी। रावत ने यह भी कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने संबंधित व्यक्ति को हटाया या उनसे इस्तीफा मांगा था।

गलती होने पर माफी की बात

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्तियों और परीक्षाओं में गड़बड़ी राज्य की आने वाली पीढ़ी के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। यदि उनसे जाने-अनजाने में कोई ऐसी चूक हुई है, जिससे युवाओं के भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा हो, तो वह उत्तराखंड की जनता से क्षमा मांगते हैं।

उन्होंने सार्वजनिक अपील करते हुए कहा कि यदि किसी के पास भर्ती मामलों में उनकी संलिप्तता के प्रमाण हैं, तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस को उपलब्ध कराया जाना चाहिए। रावत ने कहा कि यदि उन्होंने कोई गलती की है, तो कानून को उन्हें दंडित करना चाहिए।

हरीश रावत के इस फैसले के बाद उत्तराखंड कांग्रेस में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले उनके संगठनात्मक पदों से हटने को पार्टी के भीतर और प्रदेश की राजनीति में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।